27 जुलाई 2026
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TMC 'साइन बोर्ड' बन गई — दिलीप घोष का तंज, अभिषेक-राहुल मुलाकात पर BJP का पलटवार

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TMC 'साइन बोर्ड' बन गई — दिलीप घोष का तंज, अभिषेक-राहुल मुलाकात पर BJP का पलटवार

सारांश

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद TMC बिखरती दिख रही है — तीन दिनों में तीन बड़े इस्तीफे, राज्यसभा में संख्या घटकर 10। BJP के दिलीप घोष ने अभिषेक-राहुल मुलाकात पर तंज कसते हुए कहा कि जो TMC कांग्रेस को 'साइन बोर्ड' कहती थी, आज खुद वही बन गई है।

मुख्य बातें

BJP मंत्री दिलीप घोष ने 11 जून 2026 को कहा कि TMC 'साइन बोर्ड' बन गई है और कांग्रेस का सहारा ले रही है।
अभिषेक बनर्जी व ममता बनर्जी की सोनिया गांधी और राहुल गांधी से मुलाकात के बाद यह बयान आया।
तीन दिनों में सुखेंदु शेखर रॉय , सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक ने TMC से इस्तीफा दिया।
राज्यसभा में TMC सांसदों की संख्या घटकर 10 रह गई।
रिपोर्टों के अनुसार लगभग 20 TMC सांसद बगावत कर सकते हैं; काकोली घोष दस्तीदार पहले ही पार्टी पदों से इस्तीफा दे चुकी हैं।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री दिलीप घोष ने 11 जून 2026 को तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर तीखा हमला बोला, यह कहते हुए कि विधानसभा चुनाव में हार के बाद TMC अब खुद 'साइन बोर्ड' बन चुकी है। यह प्रतिक्रिया अभिषेक बनर्जी और ममता बनर्जी की सोनिया गांधीराहुल गांधी से हुई मुलाकात के संदर्भ में आई। पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह बयान ऐसे समय में आया है जब TMC के भीतर टूट की प्रक्रिया तेज़ी से जारी है।

दिलीप घोष का बयान

पत्रकारों से बात करते हुए दिलीप घोष ने कहा, 'मैंने पहले ही कहा है कि जिस दिन पार्टी (TMC) हारेगी, पार्टी खत्म हो जाएगी। और लोग नेताओं के पीछे भागेंगे और उनकी पिटाई करेंगे।' उन्होंने आगे कहा, 'जो TMC कांग्रेस को गाली देती थी और साइन बोर्ड बताती थी, आज TMC खुद साइन बोर्ड बन चुकी है और कांग्रेस का सराहा ले रही है। कांग्रेस से निकली हुई सभी पार्टियाँ कांग्रेस में ही मिल जाती हैं — यही परंपरा रही है। अब TMC की बारी भी आई है।'

TMC में बगावत का सिलसिला

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद TMC के भीतर असंतोष रुकने का नाम नहीं ले रहा। पिछले तीन दिनों में दिग्गज नेता सुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव ने TMC से इस्तीफा दे दिया। गुरुवार को सांसद प्रकाश चिक बराइक ने भी राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। इन इस्तीफों के बाद संसद के उच्च सदन में TMC के सांसदों की संख्या घटकर 10 रह गई है।

लोकसभा में भी संख्या घटने की आशंका

रिपोर्टों के अनुसार, लगभग 20 TMC सांसद ममता बनर्जी से बगावत कर सकते हैं। इनमें काकोली घोष दस्तीदार भी शामिल हैं, जिन्होंने TMC में अपने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था और पार्टी पर गंभीर सवाल उठाए हैं। इसके अलावा, TMC के कई विधायक भी बागी रुख अपना चुके हैं और ममता बनर्जी की बैठक में शामिल नहीं हुए।

राजनीतिक संदर्भ

गौरतलब है कि TMC की स्थापना 1998 में ममता बनर्जी ने कांग्रेस से अलग होकर की थी। दिलीप घोष की यह टिप्पणी उसी इतिहास को रेखांकित करती है। यह ऐसे समय में आई है जब TMC नेतृत्व कांग्रेस के साथ संभावित समन्वय की दिशा में कदम बढ़ाता दिख रहा है — जो पार्टी की पुरानी राजनीतिक रणनीति से बड़ा बदलाव है।

आगे क्या होगा

TMC के भीतर बगावत का यह दौर पश्चिम बंगाल की विपक्षी राजनीति को नए सिरे से परिभाषित कर सकता है। यदि कथित तौर पर चर्चित 20 सांसद पार्टी छोड़ते हैं, तो लोकसभा में TMC की उपस्थिति और कमज़ोर होगी, जिसका सीधा असर राष्ट्रीय राजनीति में पार्टी की भूमिका पर पड़ेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि केवल असंतुष्ट विधायकों तक सीमित है। असली सवाल यह है कि क्या ममता बनर्जी के पास अभी भी वह राजनीतिक पूँजी है जो 2011 और 2021 में थी — या 2026 की हार ने उस अधिकार को स्थायी रूप से कमज़ोर कर दिया है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिलीप घोष ने TMC को 'साइन बोर्ड' क्यों कहा?
BJP मंत्री दिलीप घोष ने यह टिप्पणी अभिषेक बनर्जी और ममता बनर्जी की राहुल गांधी व सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद की। उनका तर्क था कि TMC पहले कांग्रेस को 'साइन बोर्ड' कहती थी, और अब हार के बाद खुद कांग्रेस का सहारा ले रही है।
TMC में हाल ही में कौन-कौन से बड़े नेताओं ने इस्तीफा दिया?
पिछले तीन दिनों में राज्यसभा सदस्य सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और सांसद प्रकाश चिक बराइक ने TMC से इस्तीफा दिया है। इन इस्तीफों के बाद राज्यसभा में TMC के सांसदों की संख्या घटकर 10 रह गई है।
क्या TMC की लोकसभा में भी संख्या घट सकती है?
रिपोर्टों के अनुसार लगभग 20 TMC सांसद बगावत कर सकते हैं। काकोली घोष दस्तीदार पहले ही पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे चुकी हैं और पार्टी पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
अभिषेक बनर्जी और राहुल गांधी की मुलाकात का क्या महत्व है?
यह मुलाकात इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि TMC ने ऐतिहासिक रूप से कांग्रेस-विरोध को अपनी राजनीतिक पहचान बनाया था। पश्चिम बंगाल चुनाव में हार के बाद यह मुलाकात दोनों दलों के बीच संभावित राजनीतिक समन्वय की ओर संकेत करती है।
पश्चिम बंगाल चुनाव में हार के बाद TMC की क्या स्थिति है?
विधानसभा चुनाव में हार के बाद TMC लगातार बगावत का सामना कर रही है। राज्यसभा में सांसद संख्या 10 तक सिमट गई है, कई विधायक बागी हो चुके हैं, और कथित तौर पर 20 लोकसभा सांसद भी पार्टी छोड़ने पर विचार कर रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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