TMC 'साइन बोर्ड' बन गई — दिलीप घोष का तंज, अभिषेक-राहुल मुलाकात पर BJP का पलटवार
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री दिलीप घोष ने 11 जून 2026 को तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर तीखा हमला बोला, यह कहते हुए कि विधानसभा चुनाव में हार के बाद TMC अब खुद 'साइन बोर्ड' बन चुकी है। यह प्रतिक्रिया अभिषेक बनर्जी और ममता बनर्जी की सोनिया गांधी व राहुल गांधी से हुई मुलाकात के संदर्भ में आई। पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह बयान ऐसे समय में आया है जब TMC के भीतर टूट की प्रक्रिया तेज़ी से जारी है।
दिलीप घोष का बयान
पत्रकारों से बात करते हुए दिलीप घोष ने कहा, 'मैंने पहले ही कहा है कि जिस दिन पार्टी (TMC) हारेगी, पार्टी खत्म हो जाएगी। और लोग नेताओं के पीछे भागेंगे और उनकी पिटाई करेंगे।' उन्होंने आगे कहा, 'जो TMC कांग्रेस को गाली देती थी और साइन बोर्ड बताती थी, आज TMC खुद साइन बोर्ड बन चुकी है और कांग्रेस का सराहा ले रही है। कांग्रेस से निकली हुई सभी पार्टियाँ कांग्रेस में ही मिल जाती हैं — यही परंपरा रही है। अब TMC की बारी भी आई है।'
TMC में बगावत का सिलसिला
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद TMC के भीतर असंतोष रुकने का नाम नहीं ले रहा। पिछले तीन दिनों में दिग्गज नेता सुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव ने TMC से इस्तीफा दे दिया। गुरुवार को सांसद प्रकाश चिक बराइक ने भी राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। इन इस्तीफों के बाद संसद के उच्च सदन में TMC के सांसदों की संख्या घटकर 10 रह गई है।
लोकसभा में भी संख्या घटने की आशंका
रिपोर्टों के अनुसार, लगभग 20 TMC सांसद ममता बनर्जी से बगावत कर सकते हैं। इनमें काकोली घोष दस्तीदार भी शामिल हैं, जिन्होंने TMC में अपने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था और पार्टी पर गंभीर सवाल उठाए हैं। इसके अलावा, TMC के कई विधायक भी बागी रुख अपना चुके हैं और ममता बनर्जी की बैठक में शामिल नहीं हुए।
राजनीतिक संदर्भ
गौरतलब है कि TMC की स्थापना 1998 में ममता बनर्जी ने कांग्रेस से अलग होकर की थी। दिलीप घोष की यह टिप्पणी उसी इतिहास को रेखांकित करती है। यह ऐसे समय में आई है जब TMC नेतृत्व कांग्रेस के साथ संभावित समन्वय की दिशा में कदम बढ़ाता दिख रहा है — जो पार्टी की पुरानी राजनीतिक रणनीति से बड़ा बदलाव है।
आगे क्या होगा
TMC के भीतर बगावत का यह दौर पश्चिम बंगाल की विपक्षी राजनीति को नए सिरे से परिभाषित कर सकता है। यदि कथित तौर पर चर्चित 20 सांसद पार्टी छोड़ते हैं, तो लोकसभा में TMC की उपस्थिति और कमज़ोर होगी, जिसका सीधा असर राष्ट्रीय राजनीति में पार्टी की भूमिका पर पड़ेगा।