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अभिषेक बनर्जी पर कथित हमला: दिलीप घोष बोले — 'हीरो बनने क्यों गए, घर में रहते'

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अभिषेक बनर्जी पर कथित हमला: दिलीप घोष बोले — 'हीरो बनने क्यों गए, घर में रहते'

सारांश

BJP नेता दिलीप घोष ने अभिषेक बनर्जी पर कथित हमले की निंदा तो की, लेकिन इसे TMC के 15 साल के 'अत्याचार' की प्रतिक्रिया बताया। फाल्टा में TMC के चौथे स्थान को जनता के रोष का प्रमाण बताते हुए उन्होंने कहा — 'हीरो बनने क्यों गए, घर में रहते।'

मुख्य बातें

BJP नेता दिलीप घोष ने 31 मई को न्यूटाउन में अभिषेक बनर्जी पर कथित हमले को 'गलत' बताया, लेकिन TMC शासन की आलोचना भी की।
घोष ने दावा किया कि पिछले 10-12 वर्षों में BJP के 321 कार्यकर्ताओं की हत्या हुई और अधिकांश में FIR दर्ज नहीं हुई।
चुनाव के बाद हिंसा में 56 BJP कार्यकर्ताओं की मौत का आरोप; 35 दुष्कर्म पीड़ित महिलाओं की शिकायतें भी दर्ज नहीं हुईं।
फाल्टा उपचुनाव में TMC के चौथे स्थान को घोष ने जनता के रोष का प्रमाण बताया।
घोष ने कहा कि BJP सरकार ही जनता को कानून हाथ में लेने से रोक रही है।

न्यूटाउन में 31 मई को पत्रकारों से बातचीत करते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता दिलीप घोष ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता अभिषेक बनर्जी पर हुए कथित हमले पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि हमला गलत है, लेकिन साथ ही TMC के 15 वर्षों के शासन में आम जनता पर हुए अत्याचारों की याद भी दिलाई। घोष ने कहा, 'अभिषेक बनर्जी के साथ जो हुआ, वो नहीं होना चाहिए — कानून हाथ में लेने का अधिकार किसी को नहीं है।'

जनता के रोष का हवाला

दिलीप घोष ने कहा कि बीते 15 वर्षों में जनता ने जो झेला, उसका रोष अब सामने आ रहा है। उन्होंने फाल्टा उपचुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि TMC वहाँ चौथे स्थान पर रही — यह परिणाम खुद बता देता है कि जनता कितनी नाराज है। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, 'हीरो बनने क्यों चले गए? घर में शांति से रहें, देश-विदेश घूमें।'

TMC राज में कानून-व्यवस्था पर हमला

घोष ने आरोप लगाया कि TMC शासन में पुलिस पूरी तरह दलगत हितों की सेवा करती थी। उनके अनुसार, 'TMC का एक छोटा नेता तीन-चार गाड़ियों से चलता था, ट्रैफिक पुलिस का नामोनिशान नहीं होता था; हर TMC नेता के घर पर पुलिसकर्मी तैनात रहते थे।' उन्होंने यह भी कहा कि घरों के सामने सड़कें बंद कर दी जाती थीं और ऐसा करने का अधिकार किसी को नहीं था।

BJP कार्यकर्ताओं पर हिंसा के आरोप

घोष ने दावा किया कि पिछले 10-12 वर्षों में BJP के 321 कार्यकर्ताओं को मारा गया और अधिकांश मामलों में FIR तक दर्ज नहीं हुई। उन्होंने कहा कि चुनाव के बाद हुई हिंसा में 56 कार्यकर्ताओं की मौत हुई और CBI के हस्तक्षेप के बाद ही FIR दर्ज हो सकी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 35 दुष्कर्म पीड़ित महिलाओं की शिकायतें भी दर्ज नहीं की गईं और पीड़ित महिलाएं खेतों व जंगलों में छिपने को मजबूर थीं।

जेपी नड्डा पर हमले का जिक्र

घोष ने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि चुनाव प्रचार के दौरान BJP राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के काफिले पर TMC समर्थकों ने ईंट-पत्थर फेंके थे और 10 गाड़ियाँ तोड़ दी गई थीं — वे उस काफिले में स्वयं मौजूद थे। उन्होंने कहा, 'आज भी मेरे शरीर पर उन चोटों के दाग हैं, लेकिन मैंने कभी किसी को नहीं दिखाया।'

ममता बनर्जी और अस्पताल विवाद

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए घोष ने कहा कि उनके परिवार के लोग आज तक किसी सरकारी अस्पताल में नहीं गए। उन्होंने आरोप लगाया कि TMC के मंत्रियों और विधायकों ने सरकारी अस्पतालों का उपयोग पालतू जानवरों के इलाज के लिए किया। घोष ने व्यंग्य किया, 'अब मजबूरी में अस्पताल जा रहे हैं क्योंकि केस के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट चाहिए।'

घोष ने अंत में कहा कि BJP सरकार होने की वजह से ही जनता का आक्रोश नियंत्रण में है — 'हम लोग ही लोगों को कानून हाथ में लेने से रोक रहे हैं।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में राजनीतिक तनाव चरम पर है और TMC व BJP के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह BJP की उस रणनीति को दर्शाता है जो नैतिक ऊँचाई का दावा करते हुए भी जनाक्रोश को वैधता देती है। '321 कार्यकर्ताओं की हत्या' और '56 मौतें' जैसे आँकड़े गंभीर हैं और स्वतंत्र सत्यापन की माँग करते हैं — इन्हें केवल राजनीतिक बयानबाजी में नहीं खपाया जाना चाहिए। फाल्टा परिणाम को 'जनादेश' बताना सुविधाजनक है, लेकिन एकल उपचुनाव से राज्यव्यापी निष्कर्ष निकालना विश्लेषणात्मक दृष्टि से कमज़ोर है। असली सवाल यह है कि जब BJP सत्ता में है, तो कानून हाथ में लेने वाले तत्वों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही — केवल बयान देने से जवाबदेही नहीं बनती।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिलीप घोष ने अभिषेक बनर्जी पर कथित हमले पर क्या कहा?
BJP नेता दिलीप घोष ने कहा कि अभिषेक बनर्जी के साथ जो हुआ वो नहीं होना चाहिए और कानून हाथ में लेने का अधिकार किसी को नहीं है। हालाँकि, उन्होंने इसे TMC के 15 साल के शासन में जनता पर हुए अत्याचारों की प्रतिक्रिया भी बताया।
फाल्टा उपचुनाव में TMC का क्या परिणाम रहा?
दिलीप घोष के अनुसार फाल्टा उपचुनाव में TMC चौथे स्थान पर रही, जिसे उन्होंने जनता के रोष का प्रमाण बताया। यह परिणाम TMC के लिए राजनीतिक रूप से बेहद असहज माना जा रहा है।
दिलीप घोष ने BJP कार्यकर्ताओं पर हिंसा के बारे में क्या दावे किए?
घोष ने दावा किया कि पिछले 10-12 वर्षों में BJP के 321 कार्यकर्ताओं को मारा गया और अधिकांश में FIR दर्ज नहीं हुई। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव के बाद हुई हिंसा में 56 कार्यकर्ताओं की मौत हुई और CBI के हस्तक्षेप के बाद ही मामले दर्ज हो सके।
दिलीप घोष ने ममता बनर्जी पर क्या आरोप लगाए?
घोष ने कहा कि ममता बनर्जी के परिवार के लोग आज तक किसी सरकारी अस्पताल में नहीं गए। उन्होंने आरोप लगाया कि TMC के मंत्रियों और विधायकों ने सरकारी अस्पतालों का उपयोग पालतू जानवरों के इलाज के लिए किया और अब केवल मेडिकल सर्टिफिकेट के लिए अस्पताल जाया जा रहा है।
जेपी नड्डा के काफिले पर हमले का दिलीप घोष ने क्या जिक्र किया?
घोष ने बताया कि चुनाव प्रचार के दौरान BJP अध्यक्ष जेपी नड्डा के काफिले पर TMC समर्थकों ने ईंट-पत्थर फेंके और 10 गाड़ियाँ तोड़ दी गईं। वे स्वयं उस काफिले में मौजूद थे और उनके शरीर पर अब भी उन चोटों के निशान हैं।
राष्ट्र प्रेस
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