अभिषेक बनर्जी पर हमला: BJP बोली — 'टीएमसी शासन से त्रस्त जनता का आक्रोश'
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसकी सहयोगी शिवसेना के नेताओं ने 31 मई 2026 को तीखी प्रतिक्रियाएँ दीं। BJP नेताओं ने इस घटना को TMC के वर्षों के कथित दुःशासन के विरुद्ध जनाक्रोश का प्रतिफल बताया, हालाँकि कुछ नेताओं ने हिंसा को 'अच्छा नहीं' भी कहा।
मुख्य घटनाक्रम
BJP के राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत कुमार गौतम ने कहा, 'यह जनता का उन अत्याचारों का बदला है जो उस पर किए गए हैं। पाँच साल पहले भी मैं बंगाल गया था और देखा कि कैसे उनके कारण लाखों लोगों को अपने घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। लोगों को जिंदा जलाया गया, घरों में आग लगाई गई और अत्याचार किए गए। उनके शासन में महिलाओं की गरिमा का हनन हुआ।'
पश्चिम बंगाल के भाटपारा से BJP विधायक अर्जुन सिंह ने कहा, 'यह जनता का गुस्सा था या कोई साजिश, इसकी जाँच पुलिस को करनी है, लेकिन जनता का गुस्सा साफ दिख रहा था। अगर उन्हें थप्पड़ मारा गया और उन पर जूता फेंका गया, तो इसका मतलब है कि बंगाल की जनता ने अपनी ताकत दिखा दी है।'
विभिन्न नेताओं की प्रतिक्रिया
रांची से BJP विधायक सीपी सिंह ने संतुलित रुख अपनाते हुए कहा, 'राजनीति में हिंसा की कोई जगह नहीं है, चाहे व्यक्ति कोई भी हो, लेकिन जैसा करोगे वैसा भरोगे। हालाँकि अभिषेक बनर्जी के साथ जो हुआ, मैं उसे अच्छा नहीं मानता।'
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने घटना को 'बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और दुखद' बताया और कहा कि रविवार सुबह तक इस घटना में शामिल सभी लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तारकेश्वर प्रसाद ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले TMC सरकार और उसके कार्यकर्ताओं ने जनता को परेशान किया था, जिसके चलते जनता में गहरा आक्रोश था। उन्होंने कहा कि इस हमले के लिए BJP को दोष देना उचित नहीं है।
शिवसेना का रुख
महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे ने कहा कि लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि है और सत्ता में रहते हुए नेताओं को जिम्मेदारी से काम करना चाहिए। शिवसेना नेता शायना एनसी ने घटना की 'कड़ी निंदा' करते हुए भी इसे 'पिछले 15 वर्षों की गुंडागर्दी और भ्रष्टाचार का परिणाम' बताया। उन्होंने पश्चिम बंगाल में कथित जबरन वसूली, गिरोह राज, भूमि हड़पने और कल्याणकारी योजनाओं के चुनिंदा वितरण का उल्लेख किया।
आम जनता पर असर
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज है। गौरतलब है कि राज्य में सत्तारूढ़ दल के नेताओं पर हमले की यह पहली घटना नहीं है। BJP और शिवसेना के बयान जहाँ एक ओर जनाक्रोश को वैधता देने की कोशिश करते हैं, वहीं हिंसा की आलोचना न करना उनकी राजनीतिक स्थिति को विवादास्पद बनाता है।
क्या होगा आगे
पुलिस जाँच जारी है और गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना आगामी चुनावी मौसम में पश्चिम बंगाल की राजनीति को और अधिक ध्रुवीकृत कर सकती है। TMC और BJP के बीच यह टकराव नया नहीं है, लेकिन इस बार सत्तारूढ़ दल के सांसद पर हुए हमले ने राज्य की कानून-व्यवस्था को फिर से केंद्र में ला दिया है।