पश्चिम बंगाल में टीएमसी के खिलाफ जनआक्रोश: तारकिशोर प्रसाद बोले — हालात के लिए पार्टी खुद जिम्मेदार
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद ने 31 मई 2026 को कटिहार में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि पश्चिम बंगाल में राजनीतिक अस्थिरता और जनता के बढ़ते असंतोष के लिए तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सरकार और उसके नेताओं की कार्यशैली सीधे तौर पर जिम्मेदार है। उन्होंने यह बात TMC सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए कथित हमले की पृष्ठभूमि में कही।
तारकिशोर प्रसाद के मुख्य आरोप
प्रसाद ने कहा कि TMC और उसके नेताओं की यह पुरानी आदत रही है कि किसी भी घटना के बाद बिना जाँच के भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यकर्ताओं पर इल्ज़ाम लगा दिए जाते हैं। उनके अनुसार, यह प्रवृत्ति बंगाल की राजनीति में लंबे समय से देखी जा रही है और इसने राजनीतिक माहौल को और ज़हरीला बनाया है।
उन्होंने दावा किया कि राज्य में कानून-व्यवस्था पहले से कमज़ोर हुई है और महिलाओं के खिलाफ अपराधों को लेकर भी लगातार सवाल उठते रहे हैं। प्रसाद ने TMC नेतृत्व को नसीहत दी कि उन्हें अपने शासनकाल की घटनाओं पर पहले आत्ममंथन करना चाहिए।
अभिषेक बनर्जी पर कथित हमले का संदर्भ
यह विवाद तब सामने आया जब TMC सांसद अभिषेक बनर्जी एक पीड़ित परिवार से मिलने गए और वहाँ स्थानीय लोगों ने कथित तौर पर तीखी प्रतिक्रिया दी। इस घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक हलकों में तीखी बहस छिड़ गई है। गौरतलब है कि यह कोई अकेली घटना नहीं है — बंगाल में राजनीतिक हिंसा और जन-असंतोष के मामले पिछले कई वर्षों से चर्चा में हैं।
शिवसेना प्रवक्ता की प्रतिक्रिया
शिवसेना के प्रवक्ता राजू वाघमारे ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों का यह गुस्सा अचानक नहीं उभरा, बल्कि यह वर्षों से दबा हुआ जनआक्रोश है जो अब बाहर आ रहा है। वाघमारे के अनुसार, TMC शासन के दौरान पीड़ितों को न्याय देने के बजाय आरोपियों को संरक्षण देने की धारणा जनता के बीच गहरी हो चुकी है।
उन्होंने इस पूरी स्थिति को 'एक्शन और रिएक्शन' का परिणाम बताया। वाघमारे ने स्पष्ट किया कि वे किसी भी स्तर पर हिंसा का समर्थन नहीं करते, लेकिन जनता की भावनाओं को नज़रअंदाज़ भी नहीं किया जा सकता।
सुशासन का दावा और विपक्ष की चुनौती
तारकिशोर प्रसाद ने कहा कि यदि राज्य में कोई शिकायत या अपराध सामने आता है, तो अब पश्चिम बंगाल में एक जवाबदेह सरकार काम कर रही है और कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित होगी। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि राज्य में राजनीतिक हिंसा की जड़ें बहुत गहरी हैं और महज़ बयानबाज़ी से हालात नहीं बदलेंगे।
आगे क्या
अभिषेक बनर्जी पर कथित हमले की जाँच अभी जारी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना 2026 के बंगाल राजनीतिक समीकरणों पर असर डाल सकती है। सभी दलों की नज़र अब इस बात पर है कि राज्य प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है।