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अभिषेक बनर्जी पर कथित हमला: जदयू नेता राजीव रंजन प्रसाद ने टीएमसी के भाजपा-आरोप को बताया बेबुनियाद

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अभिषेक बनर्जी पर कथित हमला: जदयू नेता राजीव रंजन प्रसाद ने टीएमसी के भाजपा-आरोप को बताया बेबुनियाद

सारांश

जदयू नेता राजीव रंजन प्रसाद ने अभिषेक बनर्जी पर कथित हमले को दुर्भाग्यपूर्ण माना, पर भाजपा पर आरोप लगाने के लिए टीएमसी पर पलटवार किया। साथ ही उन्होंने कर्नाटक कांग्रेस में बढ़ते असंतोष और रामचंद्र गुहा की टिप्पणी को राहुल गांधी की घटती प्रासंगिकता का संकेत बताया।

मुख्य बातें

जदयू नेता राजीव रंजन प्रसाद ने अभिषेक बनर्जी पर कथित हमले को 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताते हुए दोषियों पर कठोरतम कार्रवाई की माँग की।
प्रसाद ने टीएमसी द्वारा भाजपा पर आरोप लगाने की आलोचना की और पूछा कि टीएमसी-शासन में विपक्षी नेताओं पर हिंसा के वक्त ये नेता चुप क्यों रहे।
सुवेंदु अधिकारी सरकार पर भरोसा जताया; कहा कि जनता ने कानून-व्यवस्था के शासन के लिए जनादेश दिया है।
कर्नाटक कांग्रेस में राहुल गांधी की उदासीनता के कारण गुटबाजी बढ़ने की बात कही; सिद्दारमैया के नेतृत्व में बदलाव को कांग्रेस के लिए नुकसानदेह बताया।
इतिहासकार रामचंद्र गुहा की राहुल गांधी पर टिप्पणी को राहुल की प्रासंगिकता पर सवाल उठाने वाला बताया।

जनता दल (यूनाइटेड) के नेता राजीव रंजन प्रसाद ने 31 मई 2026 को पटना में तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद अभिषेक बनर्जी पर कथित हमले की घटना को 'दुर्भाग्यपूर्ण' करार दिया और दोषियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की माँग की। साथ ही उन्होंने इस घटना के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) को जिम्मेदार ठहराने की टीएमसी की कोशिश को सिरे से खारिज कर दिया।

राजीव रंजन प्रसाद की मुख्य प्रतिक्रिया

राजीव रंजन प्रसाद ने कहा, 'यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना है और इस मामले में कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।' उन्होंने पश्चिम बंगाल की सुवेंदु अधिकारी सरकार पर भरोसा जताते हुए कहा कि जनता ने कानून-व्यवस्था के शासन के लिए जनादेश दिया है और उन्हें विश्वास है कि वर्तमान सरकार ऐसे अपराधियों के विरुद्ध सख्त कदम उठाएगी।

उन्होंने टीएमसी पर पलटवार करते हुए कहा कि टीएमसी के शासनकाल में विपक्षी नेताओं को हिंसा का शिकार बनाया जाता था, उनके कार्यकर्ताओं के घर जलाए जाते थे और पुलिस की सांठगांठ से राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ कार्रवाई होती थी। उनके अनुसार, 'अब पश्चिम बंगाल उस दौर से निकल चुका है।'

टीएमसी के भाजपा-आरोप पर जदयू का पलटवार

प्रसाद ने सवाल उठाया कि जब टीएमसी सत्ता में थी और विपक्षी नेताओं पर अत्याचार हो रहे थे, तब ये नेता चुप क्यों रहे। उन्होंने कहा कि यह घटना कानून-व्यवस्था का विषय है और पश्चिम बंगाल सरकार इस पर कड़ी कार्रवाई के लिए संकल्पित है। यह ऐसे समय में आया है जब बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद राजनीतिक हिंसा का मुद्दा राष्ट्रीय बहस का केंद्र बना हुआ है।

कर्नाटक कांग्रेस पर टिप्पणी

प्रसाद ने कर्नाटक की राजनीतिक स्थिति पर भी बात की और इसे 'तूफान से पहले का सन्नाटा' बताया। उनके अनुसार कांग्रेस नेता राहुल गांधी की लंबे समय तक उदासीनता के कारण कर्नाटक कांग्रेस कई खेमों में बंट गई है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सिद्दारमैया दक्षिण भारत में कांग्रेस के सबसे बड़े चेहरों में से एक हैं और पिछड़ों की राजनीति में उनकी व्यापक स्वीकार्यता है — ऐसे में नेतृत्व को लेकर कोई भी बदलाव राहुल गांधी और कांग्रेस को भारी पड़ सकता है।

रामचंद्र गुहा के बयान पर प्रतिक्रिया

इतिहासकार रामचंद्र गुहा के राहुल गांधी पर दिए गए बयान को लेकर प्रसाद ने कहा कि गुहा नेहरू-गांधी परिवार से लंबे समय से जुड़े रहे हैं और उन्हें सोनिया गांधी के विश्वस्त सलाहकारों में गिना जाता है। उनके अनुसार, जब पूरे देश में राहुल गांधी की प्रासंगिकता पर बहस छिड़ी हुई है, तब गुहा जैसे बुद्धिजीवी की गंभीर टिप्पणी कांग्रेस के लिए एक संकेत है।

प्रसाद ने कहा कि कांग्रेस आज कुछ राज्यों की पार्टी बनकर रह गई है और राहुल गांधी की उदासीनता पार्टी के लिए गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है। उन्होंने कांग्रेस से अपील की कि वह गुहा जैसे बुद्धिजीवियों की बातों को गंभीरता से ले।

आगे क्या

अभिषेक बनर्जी पर कथित हमले की जाँच पश्चिम बंगाल पुलिस के पास है और राजनीतिक दबाव के बीच त्वरित कार्रवाई की माँग तेज हो रही है। यह घटना आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीतिक हिंसा के व्यापक विमर्श को और गहरा कर सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली निशाना टीएमसी की विश्वसनीयता पर रखो। यह उस व्यापक BJP-JDU कथानक का हिस्सा है जो बंगाल में 'कानून-व्यवस्था की बहाली' को सत्ता-परिवर्तन की वैधता से जोड़ता है। गौरतलब है कि रामचंद्र गुहा प्रकरण को इस प्रेस वार्ता में जोड़ना संकेत देता है कि जदयू कांग्रेस की आंतरिक कमज़ोरियों को अधिकतम प्रचार देना चाहता है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूकती है वह यह है कि प्रसाद ने अभिषेक बनर्जी हमले की जाँच की स्वतंत्रता या समयसीमा पर कोई ठोस माँग नहीं रखी — जो दर्शाता है कि राजनीतिक स्कोरिंग तथ्यात्मक जवाबदेही से आगे निकल गई।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अभिषेक बनर्जी पर कथित हमला क्या था?
टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के साथ कथित दुर्व्यवहार और हमले की घटना सामने आई, जिसे लेकर टीएमसी ने भाजपा पर आरोप लगाए। घटना का विवरण अभी जाँच के दायरे में है।
जदयू नेता राजीव रंजन प्रसाद ने इस घटना पर क्या कहा?
प्रसाद ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कठोरतम कार्रवाई की माँग की। साथ ही उन्होंने टीएमसी के भाजपा-आरोप को खारिज करते हुए कहा कि टीएमसी शासन में विपक्षी नेताओं पर खुद हिंसा होती थी।
सुवेंदु अधिकारी सरकार से क्या उम्मीद जताई गई?
प्रसाद ने कहा कि जनता ने पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था के शासन के लिए जनादेश दिया है और उन्हें विश्वास है कि सुवेंदु अधिकारी की सरकार दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगी।
रामचंद्र गुहा के बयान पर जदयू की क्या प्रतिक्रिया रही?
प्रसाद ने कहा कि रामचंद्र गुहा नेहरू-गांधी परिवार के करीबी रहे हैं, इसलिए राहुल गांधी पर उनकी गंभीर टिप्पणी कांग्रेस के लिए एक बड़ा संकेत है। उन्होंने कांग्रेस से इसे गंभीरता से लेने की अपील की।
कर्नाटक कांग्रेस को लेकर प्रसाद ने क्या कहा?
प्रसाद ने कर्नाटक की स्थिति को 'तूफान से पहले का सन्नाटा' बताया। उनके अनुसार राहुल गांधी की उदासीनता से कर्नाटक कांग्रेस कई गुटों में बंट गई है और सिद्दारमैया जैसे कद्दावर नेता के नेतृत्व में बदलाव कांग्रेस को भारी पड़ सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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