18 जुलाई 2026
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ममता बनर्जी के लिए टीएमसी बचाना बड़ी चुनौती: जदयू नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया

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ममता बनर्जी के लिए टीएमसी बचाना बड़ी चुनौती: जदयू नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया

सारांश

अभिषेक बनर्जी पर हमले के बाद ममता बनर्जी का सड़क पर उतरना महज विरोध नहीं — यह एक कमज़ोर होती पार्टी को थामने की कोशिश है। जदयू नेताओं का कहना है कि विधायकों की बेरुखी और नेताओं का पार्टी छोड़ना बता रहा है कि असली लड़ाई सड़क पर नहीं, टीएमसी के भीतर है।

मुख्य बातें

जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि टीएमसी 'अहंकार' के कारण विखंडन की राह पर है।
जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने विधायक दल की बैठक में कम उपस्थिति को ममता बनर्जी के घटते जनाधार का प्रमाण बताया।
नतीजों के बाद बड़ी संख्या में पार्षदों ने टीएमसी छोड़ी; शांतनु सेन सहित कई बड़े नेताओं ने विरोधी रुख अपनाया।
अभिषेक बनर्जी पर हमले के बाद ममता बनर्जी ने कोलकाता में सड़क पर विरोध प्रदर्शन किया; हमले के लिए BJP को जिम्मेदार ठहराया।
जदयू के अनुसार, सत्ता-परिवर्तन के बाद 'भय' समाप्त होने से जनप्रतिनिधियों में पार्टी छोड़ने की छटपटाहट बढ़ी है।

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा कोलकाता में किए गए विरोध प्रदर्शन पर जनता दल (यूनाइटेड) — जदयू — के नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। जदयू नेताओं का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में भीतरी दरार इतनी गहरी हो चुकी है कि पार्टी को एकजुट रखना ममता बनर्जी के लिए सबसे बड़ी राजनीतिक परीक्षा बन गई है।

जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार का हमला

जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा, 'टीएमसी को प्रदर्शन करने का अधिकार प्राप्त है, लेकिन आत्म-अवलोकन करने का दायित्व भी है। अभिषेक बनर्जी पर हमला दुखद है, मगर कानूनी लड़ाई से बेहतर आप जनता की लड़ाई मानते हैं — इसका आपको अधिकार है।' उन्होंने आगे कहा कि जनता ने टीएमसी से 'ममता करना' क्यों छोड़ दिया, इसका जवाब पार्टी नहीं दे पा रही।

टीएमसी में अंतर्कलह पर नीरज कुमार ने कहा, 'यह टीएमसी का अंदरूनी मामला है। अगर इस पार्टी में दरार है और इस क्रम में यह जवाब दिया जाना कि जिसको जाना है जाए — यह अहंकार को दर्शाता है। अहंकार से राजनीति में कभी एकजुटता नहीं होती, बल्कि विखंडन होता है और इसका उदाहरण टीएमसी है।'

राजीव रंजन प्रसाद की चेतावनी: बड़ी टूट की आशंका

जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि बंगाल में ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी दोनों के लिए स्थिति लगातार बिगड़ रही है। उन्होंने विधायक दल की बैठक में विधायकों की कम उपस्थिति का हवाला देते हुए कहा कि यह स्पष्ट संकेत है कि बड़ी संख्या में विधायकों का विश्वास ममता बनर्जी के साथ नहीं रहा।

राजीव रंजन प्रसाद ने कहा, 'नतीजों के बाद बड़ी संख्या में पार्षदों ने टीएमसी छोड़ी है। शांतनु सेन सहित कई बड़े नाम हैं जो मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं। पार्टी को बचाना ममता बनर्जी के लिए बड़ी चुनौती है।'

उन्होंने यह भी कहा कि भय की वजह से अनेक जनप्रतिनिधि ममता बनर्जी के साथ बने हुए थे, लेकिन जब सरकार बदली है तो उन जनप्रतिनिधियों के अंदर बाहर निकलने की छटपटाहट है। यह टीएमसी में एक बड़ी टूट का कारण बन सकता है।

विरोध प्रदर्शन की पृष्ठभूमि

टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी पर हालिया हमले के बाद ममता बनर्जी ने कोलकाता की सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने का फैसला लिया। वे इस हमले के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) को जिम्मेदार ठहरा रही हैं। यह ऐसे समय में आया है जब टीएमसी के भीतर नेतृत्व को लेकर असंतोष की खबरें सामने आ रही हैं।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि बंगाल में सत्ता-परिवर्तन के बाद यह पहली बार है जब टीएमसी के भीतर इतने खुले स्वर में असंतोष उभरा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, पार्टी की एकजुटता बनाए रखना और विपक्षी भूमिका में विश्वसनीयता स्थापित करना — दोनों मोर्चों पर ममता बनर्जी को एक साथ लड़ना होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

विचारधारा पर नहीं। अभिषेक बनर्जी पर हमले को BJP पर मढ़ने की रणनीति ध्यान भटकाने का प्रयास लग सकती है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या ममता बनर्जी विपक्ष में रहते हुए पार्टी को वह नेतृत्व दे पाएँगी जो सत्ता में रहते हुए भी संदिग्ध होता जा रहा था।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ममता बनर्जी ने कोलकाता में विरोध प्रदर्शन क्यों किया?
टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी पर हालिया हमले के बाद ममता बनर्जी ने कोलकाता की सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। वे इस हमले के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) को जिम्मेदार ठहरा रही हैं।
जदयू नेताओं ने टीएमसी पर क्या आरोप लगाए?
जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि टीएमसी 'अहंकार' के कारण विखंडन की राह पर है और पार्टी यह नहीं बता पा रही कि जनता ने उससे समर्थन क्यों वापस लिया। जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने विधायकों की कम उपस्थिति और पार्षदों के पार्टी छोड़ने को ममता के घटते प्रभाव का संकेत बताया।
टीएमसी में अंतर्कलह के क्या संकेत हैं?
विधायक दल की बैठक में विधायकों की बेहद कम उपस्थिति, नतीजों के बाद बड़ी संख्या में पार्षदों का पार्टी छोड़ना, और शांतनु सेन जैसे वरिष्ठ नेताओं का ममता बनर्जी के खिलाफ खुलकर बोलना — ये सभी टीएमसी में गहरी दरार के संकेत हैं।
क्या टीएमसी में बड़ी टूट हो सकती है?
जदयू नेताओं के अनुसार, सत्ता-परिवर्तन के बाद 'भय' समाप्त होने से कई जनप्रतिनिधि पार्टी छोड़ने की स्थिति में आ सकते हैं। राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि यह टीएमसी में एक बड़ी टूट का कारण बन सकता है।
शांतनु सेन कौन हैं और उनकी भूमिका क्यों अहम है?
शांतनु सेन टीएमसी के वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं जिनका नाम जदयू प्रवक्ता ने उन नेताओं में लिया जो ममता बनर्जी के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं। उनका और अन्य बड़े नामों का विरोधी रुख टीएमसी के नेतृत्व संकट को और गहरा कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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