सोनारपुर में अभिषेक बनर्जी पर हमला: भाजपा बोली — 'जनता के आक्रोश का नतीजा'
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी पर शनिवार, 30 मई को पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर में उस समय हमला किया गया, जब वे एक पार्टी कार्यकर्ता से मिलने पहुँचे थे। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस घटना को तृणमूल के विरुद्ध जनता के गहरे असंतोष की अभिव्यक्ति बताया, हालाँकि साथ ही हिंसा की निंदा भी की।
घटनाक्रम: क्या हुआ सोनारपुर में
अभिषेक बनर्जी उस पार्टी कार्यकर्ता से मुलाकात करने सोनारपुर गए थे, जो कथित तौर पर 4 मई को विधानसभा चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद हुई चुनावोत्तर हिंसा का शिकार हुआ था। रिपोर्टों के अनुसार, वहाँ पहुँचने पर भीड़ ने उन पर अंडे और चप्पलें फेंकीं और उनके साथ मारपीट की। बंगाल पुलिस ने उन्हें सुरक्षित निकालने का प्रयास किया।
भाजपा की प्रतिक्रिया
भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने कहा, 'जिस तरह से इन्होंने लोगों, माताओं और बहनों के खिलाफ अत्याचार किए हैं, इतने सारे लोगों की हत्या की गई है, भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या की गई है — इसलिए उनके प्रति लोगों का गुस्सा जायज़ है।' हालाँकि शर्मा ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून को अपने हाथ में लेने की कोई ज़रूरत नहीं है और हिंसा का जवाब हिंसा से नहीं दिया जा सकता।
भाजपा सांसद राहुल सिन्हा ने दावा किया कि तृणमूल नेताओं के खिलाफ जनता में भारी आक्रोश है। उन्होंने कहा, 'जब ममता बनर्जी अदालत गईं, तो लोग 'चोर-चोर' के नारे लगा रहे थे — इनमें आम जनता और वकील दोनों शामिल थे।' सिन्हा ने इसे जनता की 'स्वाभाविक प्रतिक्रिया' करार दिया और कहा कि यह सिलसिला केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं रहेगा। साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि भाजपा किसी पर भी इस तरह के हमलों का समर्थन नहीं करती।
भाजपा सांसद सौमित्र खान ने हमले के दौरान अभिषेक बनर्जी को सुरक्षित निकालने के प्रयासों के लिए बंगाल पुलिस की सराहना की।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद चुनावोत्तर हिंसा को लेकर राज्य में तनाव बना हुआ है। 4 मई के परिणामों के बाद से कई जिलों में हिंसा की खबरें सामने आई हैं। गौरतलब है कि तृणमूल कांग्रेस पर भाजपा लंबे समय से अपने कार्यकर्ताओं पर अत्याचार का आरोप लगाती रही है।
आगे क्या
इस हमले के बाद राज्य की कानून-व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सत्ता परिवर्तन के बाद का यह दौर पश्चिम बंगाल में आने वाले हफ्तों में और संवेदनशील हो सकता है। बंगाल पुलिस के रवैये पर सभी दलों की नज़र बनी रहेगी।