अरुणाचल प्रदेश में भारत का पहला रिवर काइनेटिक एनर्जी प्लांट: नॉर्वे की टाइडल सेल एएस के साथ 500 KW प्रोजेक्ट का एमओयू
सारांश
मुख्य बातें
अरुणाचल प्रदेश सरकार ने 14 जुलाई 2026 को नॉर्वे की कंपनी टाइडल सेल एएस के साथ 500 किलोवॉट के रिवर काइनेटिक एनर्जी डेमोंस्ट्रेशन प्रोजेक्ट के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए, जिससे पूर्वोत्तर भारत में देश के पहले ऐसे प्रदर्शन संयंत्र की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हो गया है। यह एमओयू भारत-नॉर्वे ग्रीन पार्टनरशिप के अंतर्गत सेंटर फॉर अर्थ साइंसेज एंड हिमालयन स्टडीज, अरुणाचल प्रदेश सरकार और टाइडल सेल एएस के बीच नई दिल्ली में आयोजित हस्ताक्षर समारोह में संपन्न हुआ।
प्रोजेक्ट की विशेषताएँ
केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) और इनोवेशन नॉर्वे के सहयोग से संचालित यह परियोजना एक अनूठी तकनीक का प्रदर्शन करेगी — जो बिना किसी बड़े सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर के सीधे नदी की जलधाराओं से बिजली उत्पन्न करती है। ईटानगर में अधिकारियों के अनुसार, यह तकनीक पर्यावरण के अनुकूल और किफायती नवीकरणीय ऊर्जा समाधान प्रदान करने में सक्षम है। गौरतलब है कि पारंपरिक जलविद्युत परियोजनाओं के विपरीत, इस तकनीक में बाँध या बड़े बुनियादी ढाँचे की आवश्यकता नहीं होती।
सरकार की प्रतिक्रिया
हस्ताक्षर समारोह में उपस्थित अरुणाचल प्रदेश की विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री दासांगलू पुल ने इस समझौते को राज्य के स्वच्छ ऊर्जा बदलाव में एक मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि 'यह साझेदारी नवाचार, सस्टेनेबिलिटी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के प्रति साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है।' पुल ने यह भी भरोसा जताया कि राज्य की विशाल नदी प्रणालियों में नवीकरणीय ऊर्जा की अपार संभावनाएँ हैं और यह प्रोजेक्ट प्राकृतिक संसाधनों के पर्यावरण-अनुकूल उपयोग को सुनिश्चित करते हुए ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा।
उन्होंने इस पहल में सहयोग के लिए MNRE, विदेश मंत्रालय, रॉयल नॉर्वेजियन दूतावास, इनोवेशन नॉर्वे, टाइडल सेल एएस और अन्य सहयोगी संस्थानों के प्रति आभार व्यक्त किया।
नॉर्वे का नज़रिया
भारत में नॉर्वे की राजदूत मे-एलिन स्टेनर ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश की नदी प्रणालियाँ इसे रिवर काइनेटिक एनर्जी तकनीक के प्रदर्शन के लिए एक आदर्श स्थान बनाती हैं, जो मौजूदा नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की पूरक हो सकती है और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ा सकती है। उन्होंने इस प्रोजेक्ट को जियोथर्मल ऊर्जा, जियोटेक्निकल इंजीनियरिंग और सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में नॉर्वे और अरुणाचल प्रदेश के बीच बढ़ते सहयोग का प्रतीक बताया।
व्यापक संदर्भ और महत्व
यह ऐसे समय में आया है जब भारत 2030 तक 500 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है। पूर्वोत्तर भारत, जो नदियों के घने जाल से समृद्ध है, इस दिशा में एक रणनीतिक भूमिका निभा सकता है। रिवर काइनेटिक तकनीक उन दूरदराज़ और पहाड़ी क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से उपयोगी मानी जाती है जहाँ पारंपरिक ग्रिड कनेक्टिविटी सीमित है। यह प्रोजेक्ट सफल रहा तो इसे देश की अन्य नदी-समृद्ध राज्यों में भी दोहराया जा सकता है।
आगे की राह
यह डेमोंस्ट्रेशन प्रोजेक्ट तकनीकी व्यवहार्यता और स्थानीय परिस्थितियों में प्रदर्शन को परखने का अवसर देगा। सफलता की स्थिति में, इसे बड़े पैमाने पर व्यावसायिक तैनाती के लिए एक मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है। भारत-नॉर्वे ग्रीन पार्टनरशिप के तहत यह सहयोग दोनों देशों के बीच हरित ऊर्जा के क्षेत्र में गहरे होते संबंधों की दिशा में एक ठोस कदम है।