आंध्र प्रदेश की स्वच्छ ऊर्जा नीति: ₹3,000 करोड़ की 600 MW सौर परियोजना शुरू, 2029 तक ₹10 लाख करोड़ निवेश का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
आंध्र प्रदेश सरकार ने अपनी एकीकृत स्वच्छ ऊर्जा नीति 2024 के क्रियान्वयन में निर्णायक गति लाते हुए वाईएसआर कडप्पा जिले में 600 मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजनाओं को औपचारिक रूप से शुरू किया है। राज्य का लक्ष्य 2029 तक नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण, हरित हाइड्रोजन, बिजली पारेषण और विनिर्माण क्षेत्रों में ₹10 लाख करोड़ का निवेश आकर्षित करना है। ₹3,000 करोड़ की लागत से तैयार यह परियोजना राज्य के स्वच्छ ऊर्जा अभियान का पहला और अब तक का सबसे बड़ा व्यावहारिक कदम है।
परियोजना का विवरण और उपलब्धि
एसएईएल लिमिटेड ने आंध्र प्रदेश में अपने 600 मेगावाट के सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट को रिकॉर्ड 11 महीनों में सफलतापूर्वक चालू कर दिया है। यह परियोजना दो चरणों में विभाजित है — 'एसएईएल सोलर एमएचपी1' (300 मेगावाट) और 'एसएईएल सोलर एमएचपी2' (300 मेगावाट) — जिनका व्यावसायिक संचालन क्रमशः 30 जनवरी 2026 और 13 मार्च 2026 को शुरू हो चुका है। 2,400 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैली यह परियोजना हाल के वर्षों में आंध्र प्रदेश का सबसे महत्वपूर्ण नवीकरणीय ऊर्जा निवेश मानी जा रही है।
मानव संसाधन विकास, सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स और रियल टाइम गवर्नेंस मंत्री नारा लोकेश शुक्रवार को दोनों परियोजनाओं का औपचारिक उद्घाटन करेंगे।
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि एकीकृत स्वच्छ ऊर्जा नीति 2024 के तहत पहला प्रोजेक्ट शुरू होना आंध्र प्रदेश के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने कहा कि सरकार आंध्र प्रदेश को भारत की स्वच्छ ऊर्जा राजधानी बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
तकनीकी विशेषताएँ
इस परियोजना में 12 लाख से अधिक उन्नत टॉपकॉन बाइफेशियल सौर मॉड्यूल लगाए गए हैं। इनमें से अधिकांश मॉड्यूल एसएईएल लिमिटेड की पंजाब और राजस्थान स्थित विनिर्माण इकाइयों में तैयार किए गए हैं। परियोजना से उत्पन्न स्वच्छ ऊर्जा भारतीय सौर ऊर्जा निगम के साथ 25 वर्षीय बिजली खरीद समझौते के तहत सीधे राष्ट्रीय ग्रिड में भेजी जाएगी।
पर्यावरण और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर असर
इन परियोजनाओं से प्रतिवर्ष लगभग 11 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आने का अनुमान है। निर्माण के दौरान 1,000 से अधिक श्रमिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से कार्यरत रहे, जिनमें लगभग 80 प्रतिशत स्थानीय समुदायों से थे। इसके अलावा, लगभग 25 वर्षों तक चलने वाली भूमि पट्टा व्यवस्था के ज़रिए क्षेत्र के किसानों को दीर्घकालिक आय के स्थिर स्रोत मिले हैं, जिससे ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होने की उम्मीद है।
आगे की राह
यह परियोजना आंध्र प्रदेश के उस व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा है, जिसमें राज्य को देश में स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं को सबसे तेज़ी से पूरा करने वाले अग्रणी राज्यों में स्थापित किया जाना है। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार भी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता विस्तार को राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में आगे बढ़ा रही है। राज्य सरकार के अनुसार, ₹10 लाख करोड़ के निवेश लक्ष्य की दिशा में आने वाले वर्षों में और अधिक परियोजनाओं की घोषणा अपेक्षित है।