राजस्थान CM भजनलाल शर्मा का ईंधन बचत पर जन आंदोलन का आह्वान, 47 GW नवीकरणीय क्षमता का दावा
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 15 मई 2026 को जयपुर में आयोजित राजस्थान एनर्जी कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए ऊर्जा संरक्षण और ईंधन बचत को एक व्यापक जन आंदोलन का रूप देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पेट्रोल और डीजल की बचत अब केवल व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय आवश्यकता है, और भविष्य की ऊर्जा चुनौतियों का स्थायी समाधान स्वच्छ एवं वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों में ही निहित है।
मुख्य घोषणाएँ और राज्य की ऊर्जा स्थिति
मुख्यमंत्री शर्मा ने बताया कि राजस्थान में अब तक 47 गीगावाट से अधिक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता स्थापित की जा चुकी है, जिससे राज्य सौर परियोजना कार्यान्वयन में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी बन गया है। वर्तमान सरकार के कार्यकाल में नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में 24,410 मेगावाट की वृद्धि दर्ज की गई है। राज्य की अनुमानित सौर ऊर्जा क्षमता 828 गीगावाट और पवन ऊर्जा क्षमता 284 गीगावाट आँकी गई है।
उन्होंने यह भी बताया कि राज्य के उद्यमों और संयुक्त उद्यमों के माध्यम से 4,670 मेगावाट क्षमता वाले सौर पार्क स्थापित किए जा चुके हैं, जबकि 12,000 मेगावाट से अधिक की परियोजनाएँ निर्माणाधीन हैं।
पीएम-कुसुम और कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा
मुख्यमंत्री ने बताया कि पीएम-कुसुम योजना के अंतर्गत कृषि भूमि पर लघु सौर परियोजनाएँ स्थापित की जा रही हैं, जिससे कृषि क्षेत्र की बिजली माँग पूरी की जा सके। इस योजना के तहत 4,000 मेगावाट से अधिक की परियोजनाएँ पहले ही चालू हो चुकी हैं, जबकि 6,500 मेगावाट की संयुक्त क्षमता वाली परियोजनाओं का आवंटन किया जा चुका है।
गौरतलब है कि यह योजना उन किसानों के लिए विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण है जो सिंचाई के लिए डीजल पंपों पर निर्भर हैं — ऊर्जा बचत का यह पहलू सीधे कृषि लागत से जुड़ा है।
नीतिगत ढाँचा और निवेशकों को आमंत्रण
नवीकरणीय ऊर्जा, जैव ईंधन, ऊर्जा भंडारण और हरित हाइड्रोजन में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने राजस्थान एकीकृत स्वच्छ ऊर्जा नीति 2024 लागू की है। मुख्यमंत्री ने सौर, पवन, जैव-ऊर्जा, पंप स्टोरेज और हरित हाइड्रोजन परियोजनाओं में निवेश के लिए उद्योगपतियों को आमंत्रित किया और कहा कि राजस्थान देश के सबसे निवेश-अनुकूल राज्यों में से एक है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता और 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन के राष्ट्रीय लक्ष्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि राजस्थान इन लक्ष्यों की प्राप्ति में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।
ऊर्जा मंत्री की प्रतिक्रिया
ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हीरालाल नागर ने कहा कि प्रधानमंत्री की अपील के बाद ऊर्जा संरक्षण और ईंधन दक्षता एक सामूहिक जिम्मेदारी बन गई है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने, सौर ऊर्जा के उपयोग को विस्तार देने और पूरे राजस्थान में फास्ट-चार्जिंग बुनियादी ढाँचे की स्थापना पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
आगे की राह
राजस्थान सरकार ने सरकारी वाहनों के संयमित उपयोग और व्यापक ऊर्जा संरक्षण उपायों के लिए दिशानिर्देश पहले ही जारी कर दिए हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आएगी। यह ऐसे समय में आया है जब देश भर में ईंधन आयात पर निर्भरता कम करने की माँग तेज हो रही है और राज्य सरकारें केंद्र के हरित ऊर्जा एजेंडे के साथ अपनी नीतियाँ संरेखित कर रही हैं।