नीति आयोग के प्रो. केवी राजू ने राजस्थान को बताया 'उपलब्धि संपन्न राज्य', पेयजल व ग्रामीण विकास की सराहना
सारांश
मुख्य बातें
नीति आयोग के सदस्य प्रोफेसर केवी राजू ने 22 जून 2026 को जयपुर में राजस्थान को 'उपलब्धि संपन्न राज्य' की संज्ञा दी और पेयजल आपूर्ति तथा ग्रामीण विकास के क्षेत्र में राज्य द्वारा की गई प्रगति की विशेष प्रशंसा की। यह टिप्पणी जिला घरेलू उत्पाद (DDP) आकलन पर आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान आई, जिसे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपने आधिकारिक आवास पर संबोधित किया।
मुख्य घटनाक्रम
प्रो. राजू ने राजस्थान में पर्यटन, कृषि, खनन और सौर ऊर्जा जैसे क्षेत्रों की अपार संभावनाओं को रेखांकित किया। उन्होंने सुझाव दिया कि इन क्षेत्रों के योगदान को सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) में अधिक प्रभावी ढंग से दर्शाने के लिए प्रौद्योगिकी आधारित डेटाबेस विकसित किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने सरकारी योजनाओं की निरंतर निगरानी, क्षमता निर्माण और असंगठित क्षेत्र में व्यापक सर्वेक्षण की आवश्यकता पर भी बल दिया।
मुख्यमंत्री का विजन
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बैठक में कहा कि राजस्थान 'विकसित भारत 2047' के राष्ट्रीय विजन को साकार करने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार एक जिला-आधारित विकास मॉडल पर काम कर रही है, जो प्रत्येक जिले की विशिष्ट पहचान, स्थानीय संसाधनों और आर्थिक शक्तियों को केंद्र में रखकर नया विकास ढाँचा तैयार करता है।
स्टार्टअप और निवेश परिदृश्य
शर्मा ने बताया कि राजस्थान का स्टार्टअप इकोसिस्टम तेज़ी से विस्तार कर रहा है — राज्य में वर्तमान में 6,000 से अधिक सक्रिय स्टार्टअप कार्यरत हैं, जो रोज़गार सृजन के साथ-साथ युवाओं में नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा दे रहे हैं। उद्योग, निवेश और सुशासन को प्रोत्साहित करने वाली नीतियों के चलते राज्य विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण निवेश आकर्षित कर रहा है।
असंगठित क्षेत्र को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ने की पहल
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार असंगठित क्षेत्र में वार्षिक उद्यम सर्वेक्षण सक्रिय रूप से संचालित कर रही है। इसके अंतर्गत चूरू के हस्तशिल्प उद्योग, भरतपुर के सरसों आधारित उद्यमों और बांसवाड़ा एवं उदयपुर के पारंपरिक आदिवासी उत्पादों को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ा जा रहा है। इन पहलों से इन उद्यमों का आर्थिक योगदान राज्य के GDP में परिलक्षित होगा और उन्हें सरकारी योजनाओं व वित्तीय सहायता तक पहुँच भी मिलेगी।
आगे की राह
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब राजस्थान अपनी आर्थिक क्षमता को संरचित रूप से मापने और नीति-निर्माण में डेटा-आधारित दृष्टिकोण अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। नीति आयोग की सक्रिय भागीदारी यह संकेत देती है कि राज्य का जिला-स्तरीय विकास मॉडल राष्ट्रीय नीति ढाँचे के साथ तालमेल बिठाने की कोशिश में है।