माउंट एवरेस्ट फतह: अमेरिकी राजनयिक माइक हार्कर 8,848.86 मीटर की चोटी पर पहुँचे
सारांश
मुख्य बातें
नेपाल स्थित अमेरिकी दूतावास के पब्लिक अफेयर्स प्रमुख माइक हार्कर ने 21 मई 2026 को माउंट एवरेस्ट (सागरमाथा) की 8,848.86 मीटर ऊँची चोटी सफलतापूर्वक फतह कर ली। वह इस वसंत सीजन में दुनिया की सर्वोच्च पर्वत शिखर पर पहुँचने वाले राजनयिक समुदाय के सबसे चर्चित पर्वतारोहियों में से एक बन गए हैं।
मुख्य घटनाक्रम
एवरेस्ट अभियान आयोजक सेवन समिट ट्रेक्स के अनुसार, हार्कर बुधवार सुबह 9 बजकर 15 मिनट पर शिखर पर पहुँचे। यह उनकी दुनिया की सबसे ऊँची चोटी पर पहली सफल चढ़ाई थी। इससे पहले वह लोबुचे ईस्ट (6,119 मीटर) फतह कर चुके हैं और अन्नपूर्णा सर्किट ट्रेक भी पूरा कर चुके हैं — जो नेपाल के पहाड़ों के साथ उनके वर्षों पुराने जुड़ाव को दर्शाता है।
सेवन समिट ट्रेक्स की प्रतिक्रिया
सेवन समिट ट्रेक्स ने अपने बधाई संदेश में कहा, 'एवरेस्ट की चोटी पर खड़ा होना उनके लिए बेहद खास और भावुक पल रहा होगा, जहाँ पहाड़ों के प्रति उनका प्यार और इस पवित्र भूमि के प्रति सम्मान एक साथ नज़र आया।' संस्था के निदेशक छंग दावा शेरपा ने सोशल मीडिया पर हार्कर की 'शांत दृढ़ता और पहाड़ों, नेपाल की संस्कृति तथा आध्यात्मिकता के प्रति गहरे सम्मान' की सराहना की।
नेपाल का रिकॉर्ड वसंत सीजन
नेपाल के पर्यटन विभाग के अनुसार, इस वसंत सीजन में 494 विदेशी पर्वतारोहियों को एवरेस्ट चढ़ाई के परमिट जारी किए गए हैं — जो अब तक का सबसे बड़ा आँकड़ा है। इनमें से 77 अमेरिकी नागरिक शामिल हैं। गौरतलब है कि नेपाल में रॉयल्टी फीस बढ़ने और पश्चिम एशिया में तनाव के कारण उड़ानों में व्यवधान के बावजूद दुनिया की सबसे ऊँची चोटी का आकर्षण कम नहीं हुआ है।
व्यावसायिक पर्वतारोहण का बढ़ता चलन
पिछले कुछ वर्षों में राजनयिक अधिकारी, कॉर्पोरेट अधिकारी और शौकिया पर्वतारोही भी गाइडेड अभियानों के ज़रिए एवरेस्ट तक पहुँचने की कोशिश कर रहे हैं। इसी के साथ नेपाल का व्यावसायिक पर्वतारोहण उद्योग तेज़ी से विस्तार पा रहा है। हार्कर की यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब नेपाल स्थित अमेरिकी दूतावास पर्वतीय पर्यटन के भविष्य पर सक्रिय रूप से विमर्श में भाग ले रहा है।
आगे क्या
इसी महीने अमेरिकी दूतावास 'असेंट समिट 2026' का आयोजन करने जा रहा है, जिसमें 'एवरेस्ट पर्यटन का बदलता चेहरा' विषय पर एक पैनल चर्चा भी शामिल होगी। हार्कर की यह सफलता उस व्यापक संवाद को और प्रासंगिक बनाती है जो एवरेस्ट पर बढ़ती भीड़, पर्यावरणीय दबाव और व्यावसायीकरण के बीच संतुलन को लेकर चल रहा है।