पश्चिम बंगाल मदरसों में 'वंदे मातरम' अनिवार्य: हुमायूं कबीर बोले — मुख्यमंत्री सबके हैं, संविधान की रक्षा होनी चाहिए

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पश्चिम बंगाल मदरसों में 'वंदे मातरम' अनिवार्य: हुमायूं कबीर बोले — मुख्यमंत्री सबके हैं, संविधान की रक्षा होनी चाहिए

सारांश

पश्चिम बंगाल सरकार के 19 मई के उस आदेश पर जिसने राज्य के सभी मदरसों में 'वंदे मातरम' अनिवार्य किया, एजेयूपी अध्यक्ष हुमायूं कबीर ने कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने मुख्यमंत्री को संविधान की याद दिलाते हुए सड़क पर उतरने की चेतावनी दी।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल सरकार ने 19 मई 2026 को आदेश जारी कर राज्य के सभी मदरसों में 'वंदे मातरम' गाना अनिवार्य किया।
आदेश सरकारी मॉडल, सहायता प्राप्त और बिना सहायता प्राप्त — तीनों प्रकार के मदरसों पर तत्काल लागू है।
एजेयूपी अध्यक्ष हुमायूं कबीर ने आदेश को संविधान-विरुद्ध बताते हुए विरोध की घोषणा की।
कबीर ने मुख्यमंत्री को याद दिलाया कि 'वे सबके मुख्यमंत्री हैं' और संविधान के अनुसार चलने की अपील की।
कबीर ने कुर्बानी के लिए गाय खरीदने वालों को पुलिस द्वारा चेतावनी दिए जाने का भी विरोध किया।

पश्चिम बंगाल के मदरसों में 'वंदे मातरम' गाना अनिवार्य किए जाने के सरकारी आदेश के विरोध में अखिल भारतीय जमीयत उलेमा-ए-पश्चिम बंगाल (एजेयूपी) के अध्यक्ष हुमायूं कबीर ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। 21 मई 2026 को कोलकाता में कबीर ने कहा कि संविधान हर नागरिक को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार देता है और सरकार को इस अधिकार का सम्मान करना चाहिए।

हुमायूं कबीर की मुख्य आपत्तियाँ

हुमायूं कबीर ने कहा कि यदि सरकार मुसलमानों पर हिंदू धर्म की सांस्कृतिक परंपराओं को थोपती है, तो उसे स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि मदरसे किसी के विरुद्ध नहीं हैं — वे कुरान की शिक्षा के केंद्र हैं और पवित्र कुरान की हिफाज़त करना हर मुसलमान का अधिकार है।

कबीर ने कहा, 'संविधान की शपथ लेने वाले मुख्यमंत्री को यह ध्यान रखना चाहिए कि वे सबके मुख्यमंत्री हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि वे इस निर्णय के विरोध में मुसलमानों को एकजुट करेंगे और यदि ज़रूरत पड़ी तो सड़क पर उतरेंगे।

सरकारी आदेश का विवरण

पश्चिम बंगाल सरकार ने 19 मई 2026 को एक आदेश जारी कर राज्य के सभी मदरसों में 'वंदे मातरम' गाना अनिवार्य कर दिया। यह आदेश सरकारी मॉडल मदरसों, सरकारी सहायता प्राप्त मदरसों और बिना सहायता प्राप्त मदरसों — तीनों पर तत्काल प्रभाव से लागू है। नए नियम के तहत प्रतिदिन कक्षाएँ शुरू होने से पहले सुबह की प्रार्थना सभा में 'वंदे मातरम' गाना अनिवार्य होगा।

कबीर का मुर्शिदाबाद और कुर्बानी प्रसंग

कबीर ने कहा कि जब उन्होंने मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद बनाने की बात की थी, उसी समय बहरामपुर में राम मंदिर निर्माण की माँग उठाई गई — यह उल्लेख उन्होंने सांप्रदायिक समानता के संदर्भ में किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बंगाल पुलिस कुर्बानी के लिए गाय खरीदने वालों को घर-घर जाकर चेतावनी दे रही है। कबीर ने मुख्यमंत्री से अपील की कि पुलिस को ऐसे कदम उठाने से रोका जाए।

विरोध की चेतावनी

कबीर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि उनके समुदाय पर अत्याचार हुआ तो वे एक कदम भी पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा, 'मैं संविधान मानकर चलूँगा; मुख्यमंत्री को भी संविधान के मुताबिक चलना चाहिए।' उन्होंने मुख्यमंत्री के खिलाफ आवाज़ उठाने और सभी मुसलमानों को एकजुट कर सड़क पर विरोध करने की चेतावनी दी।

आगे क्या होगा

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब पश्चिम बंगाल में धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों को लेकर राजनीतिक तनाव पहले से बढ़ा हुआ है। एजेयूपी के विरोध के बाद यह देखना होगा कि राज्य सरकार अपने 19 मई के आदेश पर कायम रहती है या कोई संशोधन करती है। संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता के सवाल को लेकर कानूनी चुनौती की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन अनुच्छेद 51A(a) नागरिकों से राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करने की अपेक्षा भी रखता है — इन दोनों के बीच की रेखा न्यायालयों में खिंचनी बाकी है। हुमायूं कबीर की भाषा आक्रामक है, लेकिन उनकी मूल माँग — कि संविधान सर्वोपरि हो — संवैधानिक ढाँचे के भीतर है। असली सवाल यह है कि क्या राज्य सरकार ने इस आदेश को लागू करने से पहले कानूनी जाँच की थी, या यह केवल राजनीतिक संकेत था।
RashtraPress
21 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल के मदरसों में 'वंदे मातरम' अनिवार्य करने का आदेश कब और कैसे जारी हुआ?
पश्चिम बंगाल सरकार ने 19 मई 2026 को यह आदेश जारी किया, जिसके तहत राज्य के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और बिना सहायता प्राप्त मदरसों में प्रतिदिन सुबह की प्रार्थना सभा में 'वंदे मातरम' गाना अनिवार्य कर दिया गया। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किया गया।
हुमायूं कबीर कौन हैं और उन्होंने इस आदेश का विरोध क्यों किया?
हुमायूं कबीर अखिल भारतीय जमीयत उलेमा-ए-पश्चिम बंगाल (एजेयूपी) के अध्यक्ष हैं। उन्होंने इस आदेश को संविधान में दी गई धार्मिक स्वतंत्रता के विरुद्ध बताया और कहा कि मुसलमानों पर हिंदू सांस्कृतिक परंपराएँ थोपना अस्वीकार्य है।
क्या हुमायूं कबीर ने किसी कानूनी या सड़क-आंदोलन की चेतावनी दी है?
हाँ, कबीर ने कहा कि वे मुसलमानों को एकजुट कर सड़क पर विरोध करेंगे और मुख्यमंत्री के खिलाफ आवाज़ उठाएँगे। उन्होंने यह भी कहा कि वे संविधान के दायरे में रहकर हर कदम उठाएँगे।
इस विवाद में संविधान की क्या भूमिका है?
कबीर ने संविधान के उस प्रावधान का हवाला दिया जो हर नागरिक को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार देता है। उन्होंने मुख्यमंत्री को याद दिलाया कि उन्होंने संविधान की शपथ ली है और उन्हें सभी समुदायों के अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए।
इस आदेश का मदरसों की दैनिक गतिविधियों पर क्या असर होगा?
नए आदेश के अनुसार अब हर मदरसे में कक्षाएँ शुरू होने से पहले सुबह की प्रार्थना सभा में 'वंदे मातरम' गाना अनिवार्य होगा। यह नियम राज्य के सभी प्रकार के मदरसों पर एकसमान लागू होगा।
राष्ट्र प्रेस
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