पश्चिम बंगाल के सरकारी स्कूलों में 'वंदे मातरम' अनिवार्य, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने साझा की अधिसूचना
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल सरकार ने गुरुवार, 14 मई की शाम को आधिकारिक अधिसूचना जारी कर राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में 'वंदे मातरम' का गायन तत्काल प्रभाव से अनिवार्य कर दिया। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली नई सरकार का यह पहला बड़ा शिक्षा-नीति संबंधी निर्णय है।
अधिसूचना का विवरण
राज्य के शिक्षा विभाग की प्रशासनिक शाखा के अतिरिक्त मुख्य सचिव द्वारा जारी इस अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि सभी पूर्व आदेशों और प्रचलित परंपराओं को निरस्त करते हुए, स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले समस्त विद्यालयों में प्रतिदिन कक्षाओं के प्रारंभ से पूर्व प्रार्थना सभा के दौरान राष्ट्रगान के साथ-साथ 'वंदे मातरम' का गायन अनिवार्य रहेगा। राज्य के नौवें मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इस अधिसूचना को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर साझा किया।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
उल्लेखनीय है कि सत्तारूढ़ और विपक्षी, दोनों प्रमुख दलों ने इस कदम का सैद्धांतिक स्वागत किया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने कहा कि उसे विद्यालयों में 'वंदे मातरम' गाए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है — विशेषकर इसलिए कि यह गीत एक बंगाली साहित्यकार की रचना है — बशर्ते यह निर्णय राज्य में धर्मनिरपेक्षता, भाईचारे और सामाजिक सद्भाव के मूल्यों को किसी भी रूप में आघात न पहुँचाए।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) की पश्चिम बंगाल इकाई ने भी इस निर्णय पर सहमति जताते हुए एकमात्र शर्त रखी कि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा रचित राष्ट्रगान 'जन गण मन' की प्राथमिकता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के नेतृत्व ने भी इसी भावना को दोहराया।
BJP का तर्क
BJP की राज्य इकाई का कहना है कि विद्यालयों में 'वंदे मातरम' का नियमित गायन छात्रों में राष्ट्रीय गौरव और देशभक्ति की भावना को सुदृढ़ करेगा। गौरतलब है कि 'वंदे मातरम' की रचना प्रख्यात बंगाली साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी, जिसे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में प्रेरणागीत के रूप में विशेष महत्व प्राप्त है।
व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में BJP की नई सरकार ने हाल ही में सत्ता संभाली है और राज्य में शिक्षा व सांस्कृतिक नीतियों को लेकर नई दिशा तय करने की कोशिश की जा रही है। विपक्षी दलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे राष्ट्रगान 'जन गण मन' की संवैधानिक प्राथमिकता से किसी भी प्रकार के समझौते के पक्ष में नहीं हैं। आने वाले दिनों में इस नीति के क्रियान्वयन और उसकी व्यापक प्रतिक्रिया पर सभी की नज़रें टिकी रहेंगी।