बंगाल सरकार का 'वंदे मातरम' अनिवार्य करने का फैसला: BJP ने किया स्वागत, TMC-कांग्रेस ने जोड़ी शर्त
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल सरकार ने 13 मई 2026 को राज्य के सभी सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में सुबह की प्रार्थना सभा के दौरान 'वंदे मातरम' का गायन तत्काल प्रभाव से अनिवार्य कर दिया। शिक्षा निदेशक द्वारा स्कूल प्रमुखों को भेजे गए निर्देश में कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है। इस फैसले पर राज्य के लगभग सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने स्वागत जताया है, हालाँकि विपक्षी दलों ने धर्मनिरपेक्षता और राष्ट्रगान के महत्व को बनाए रखने की शर्त भी जोड़ी है।
सरकार का निर्देश और पृष्ठभूमि
शिक्षा निदेशक ने 13 मई को जारी परिपत्र में स्पष्ट किया कि कक्षाएँ शुरू होने से पहले प्रत्येक छात्र को 'वंदे मातरम' गाना अनिवार्य होगा। संस्थान प्रमुखों को इस आदेश का पालन न होने पर जवाबदेह ठहराया जाएगा। इससे पहले राज्य के स्कूलों में परंपरागत रूप से केवल राष्ट्रगान 'जन गण मन' — जिसे रवींद्रनाथ टैगोर ने लिखा है — का गायन होता था।
गौरतलब है कि पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने 'बांग्लार माटी बांग्लार जल' को राज्य गीत के रूप में अपनाया था, जिसे टैगोर ने 1905 में बंगाल विभाजन के विरोध के दौरान लिखा था। यह कदम केंद्र सरकार द्वारा 'राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971' में प्रस्तावित संशोधन के तुरंत बाद आया है, जिसके तहत 'वंदे मातरम' के गायन में बाधा डालना एक दंडनीय अपराध बन सकता है।
BJP का स्वागत
भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नेता शतरूपा ने इस फैसले का खुलकर स्वागत किया। उन्होंने कहा, "पूरा देश 'वंदे मातरम' गा रहा है। पश्चिम बंगाल में पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने इसे बंद कर दिया था। अब सरकार ने इसे फिर से लागू कर दिया है। इससे छात्रों में देशभक्ति की भावना बढ़ाने में मदद मिलेगी।" BJP का मानना है कि स्कूलों में राष्ट्रगीत का गायन विद्यार्थियों में राष्ट्रीय गौरव की भावना को मज़बूत करेगा।
तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस की प्रतिक्रिया
तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने फैसले पर आपत्ति नहीं जताई, लेकिन शर्त रखी। पार्टी प्रवक्ता अरूप चक्रवर्ती ने कहा, "यह गीत एक बंगाली लेखक ने लिखा था। यह बंगाल की परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों को आगे बढ़ाने में मदद करता है। हमें इससे कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि इसके कारण धर्मनिरपेक्षता, भाईचारे और सौहार्द का संदेश कहीं दब न जाए।"
कांग्रेस नेता आशुतोष चटर्जी ने भी फैसले का स्वागत करते हुए कहा, "इस पर किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। हम इस फैसले का स्वागत करते हैं, लेकिन हमें किसी भी तरह से रवींद्रनाथ टैगोर और उनके गीतों का विरोध नहीं करना चाहिए।"
वाम दलों का रुख
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने भी सतर्क समर्थन दिया। पार्टी नेता कौस्तव चटर्जी ने कहा, "वंदे मातरम गाने पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन राष्ट्रगान के महत्व के साथ कोई समझौता नहीं होना चाहिए। हमें संविधान और धर्मनिरपेक्षता की रक्षा करनी है। इस पहलू को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।"
आगे क्या होगा
यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो चुका है और स्कूल प्रमुखों को अनुपालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है। केंद्र के प्रस्तावित कानूनी संशोधन के साथ मिलकर यह कदम राष्ट्रीय प्रतीकों को लेकर व्यापक नीतिगत दिशा का संकेत देता है। राजनीतिक सहमति के बावजूद, धर्मनिरपेक्षता और सांस्कृतिक विविधता को लेकर उठाए गए सवाल आने वाले समय में बहस का केंद्र बने रहेंगे।