अभिषेक बनर्जी विवाद पर BJP का पलटवार: देबजीत सरकार बोले, 15 साल की TMC तानाशाही का नतीजा है जनता का गुस्सा
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के मुख्य प्रवक्ता देबजीत सरकार ने 31 मई 2026 को कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद अभिषेक बनर्जी से जुड़े हालिया विवादों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में आज जो राजनीतिक तनाव देखा जा रहा है, वह 15 वर्षों की TMC शासन में पनपी तानाशाही का स्वाभाविक परिणाम है।
मुख्य बयान: जनता की नाराज़गी को समझना होगा
देबजीत सरकार ने कहा कि पश्चिम बंगाल में शायद ही कोई ऐसा इलाका हो जहाँ TMC के कार्यकर्ताओं या नेताओं पर उत्पात और राजनीतिक हिंसा के आरोप न लगे हों। उन्होंने स्पष्ट किया कि BJP किसी भी प्रकार की हिंसा का समर्थन नहीं करती और ऐसी घटनाएँ निंदनीय हैं। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि यह समझना ज़रूरी है कि ये परिस्थितियाँ आखिरकार पैदा कैसे हुईं।
सरकार ने कहा, 'यदि आज कुछ लोग अभिषेक बनर्जी के खिलाफ नारे लगा रहे हैं, उन्हें अपशब्द कह रहे हैं या विरोध कर रहे हैं, तो इसके पीछे जनता की नाराज़गी को भी समझना होगा।'
अतीत की घटनाओं का हवाला
BJP प्रवक्ता ने पुराने विवादों का उल्लेख करते हुए कहा कि जब BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा पर हमला हुआ था, उस समय अभिषेक बनर्जी ने कहा था कि नड्डा 'गड्ढे में गिर गए'। सरकार ने इसे TMC नेतृत्व की राजनीतिक हिंसा के प्रति संवेदनहीनता का उदाहरण बताया।
उन्होंने BJP नेता सुवेंदु अधिकारी पर हुए हमले और दिलीप घोष की गाड़ी में तोड़फोड़ की घटनाओं का भी ज़िक्र किया। उन्होंने सवाल किया कि उन मामलों में तत्कालीन राज्य सरकार और प्रशासन ने क्या कार्रवाई की थी और कितने लोगों को गिरफ्तार किया गया था। उनका आरोप था कि उस समय प्रशासन ने कोई सख्त कदम नहीं उठाए।
कानून-व्यवस्था पर BJP का दावा
देबजीत सरकार ने कहा कि वर्तमान में कानून-व्यवस्था की वजह से स्थिति नियंत्रण में है। उनके अनुसार, यदि मज़बूत प्रशासनिक व्यवस्था न होती तो हालात और गंभीर हो सकते थे।
उन्होंने कहा, 'अभी राज्य में BJP की सरकार है, इसलिए ये लोग बच गए।' यह बयान राज्य की कानून-व्यवस्था पर BJP के दावे को रेखांकित करता है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में BJP और TMC के बीच राजनीतिक टकराव लंबे समय से चला आ रहा है। TMC पर BJP नेताओं के खिलाफ हिंसा के आरोप पहले भी लगते रहे हैं, जबकि TMC इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताती है। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल की राजनीति में सत्ता-संघर्ष एक बार फिर तेज़ हो रहा है।
आगे क्या
देबजीत सरकार के इस बयान के बाद TMC की ओर से प्रतिक्रिया आने की संभावना है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप पश्चिम बंगाल में आगामी राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं।