दिलीप घोष का ममता पर तीखा हमला: 'न पार्टी बची, न पार्टी ऑफिस', सुरक्षा हटाने पर भी बोले
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने 18 जून 2026 को कोलकाता में कई अहम राजनीतिक मुद्दों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी द्वारा हॉकर्स को हटाए जाने के विरुद्ध चलाए जा रहे विरोध प्रदर्शन को लेकर घोष ने कहा कि ममता बनर्जी की राजनीतिक स्थिति इतनी कमज़ोर हो चुकी है कि 'न उनके पास पार्टी बची है और न ही पार्टी कार्यालय।' उनके इस बयान ने राज्य की सियासत में हलचल मचा दी है।
हॉकर्स विवाद पर घोष का पलटवार
घोष ने दावा किया कि ममता बनर्जी से 'सब कुछ छिन चुका है' और हॉकर्स के मुद्दे को भुनाना उनकी 'सुर्खियों में बने रहने की आखिरी कोशिश' है। उन्होंने कहा कि यह विरोध प्रदर्शन जनहित से कम और राजनीतिक अस्तित्व बचाने की कवायद अधिक है। गौरतलब है कि हॉकर्स हटाने का मुद्दा कोलकाता में लंबे समय से संवेदनशील रहा है और इसे लेकर सड़क विक्रेताओं में असंतोष है।
लोकसभा अध्यक्ष और अभिषेक बनर्जी की बैठक पर टिप्पणी
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और TMC सांसद अभिषेक बनर्जी के बीच संभावित बैठक को लेकर दिलीप घोष ने कहा कि 'लोकसभा और विधानसभा की कार्यवाही तय नियमों के अनुसार चलती है और इसमें स्पीकर की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि स्पीकर को आवश्यकता पड़ने पर किसी भी सदस्य को बुलाने का संवैधानिक अधिकार है।
मेसी विवाद और बंगाल की छवि
फुटबॉल के महान खिलाड़ी लियोनेल मेसी से जुड़े विवाद पर घोष ने नाराज़गी जताई। उन्होंने कहा कि मेसी जैसे विश्वप्रसिद्ध खिलाड़ी के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये इकट्ठे किए गए, लेकिन दर्शकों को उन्हें देखने तक का अवसर नहीं मिला — इससे बंगाल की छवि को गंभीर नुकसान पहुँचा है। घोष ने बताया कि मामले की जाँच जारी है और मेसी के कार्यालय से एक ई-मेल प्राप्त हुआ है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि वह इस विवाद में किसी भी प्रकार से शामिल नहीं थे और उनके साथ केवल एक समझौता हुआ था।
ममता की सुरक्षा हटाने पर सवाल
ममता बनर्जी की सुरक्षा व्यवस्था में हुए बदलाव पर घोष ने कहा कि जब वे स्वयं मुख्यमंत्री और गृह मंत्री थीं, तब सुरक्षा तैनाती के सभी फैसले वे खुद लेती थीं। उन्होंने कहा, 'अगर सुरक्षा में बदलाव हुआ है तो इतना हंगामा करने की क्या जरूरत है। हाँ, अगर उन्हें सुरक्षा नहीं चाहिए तो यह अलग बात है।' घोष ने यह भी बताया कि बुधवार शाम के बाद से पूर्व मुख्यमंत्री के आवास पर पुलिस सुरक्षा तैनात नहीं है और वहाँ स्थित पुलिस चौकी भी पूरी तरह खाली कर दी गई है।
आगे क्या
दिलीप घोष के इन बयानों से पश्चिम बंगाल की राजनीति में तल्खी और बढ़ने के संकेत हैं। मेसी विवाद की जाँच और ममता बनर्जी की सुरक्षा व्यवस्था का मुद्दा आने वाले दिनों में विधानसभा और सड़क — दोनों स्तरों पर गर्माने की संभावना है।