ममता बनर्जी के काफिले पर हमला: दिलीप घोष बोले — 'यह उनके कामों का नतीजा, पुलिस करेगी कार्रवाई'
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री दिलीप घोष ने 10 अगस्त 2026 को न्यूटाउन में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के काफिले पर हुए हमले को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा कि यह घटना 'उनके अपने कामों का नतीजा' है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून तोड़ने वाले किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध पुलिस कार्रवाई करेगी — चाहे वह कोई भी हो।
मुख्य बयान और आरोप
घोष ने कहा कि बंगाल में कुछ तत्वों ने जानबूझकर माहौल बिगाड़ा और सवाल उठाया कि इन्हें ऐसा करने के लिए किसने प्रेरित किया। उनके अनुसार, ये गतिविधियाँ 'असामाजिक और राष्ट्र-विरोधी' थीं। उन्होंने यह भी पूछा कि पिछली सरकार के कार्यकाल में ऐसी घटनाओं के दौरान पुलिस ने कोई कदम क्यों नहीं उठाया और किसी के विरुद्ध मुकदमा दर्ज क्यों नहीं किया गया।
पूर्व सरकार पर निशाना
घोष ने दावा किया कि वर्तमान सरकार के सत्ता संभालने के बाद राज्य में कानून-व्यवस्था में पहले की तुलना में 'काफी सुधार' आया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार के दौर में पुलिस केवल 'दर्शक' बनी रहती थी। गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य में राजनीतिक हिंसा के आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है।
TMC नेता का संदर्भ और 'प्लस पॉइंट' वाली टिप्पणी
घोष ने कहा कि वह ममता बनर्जी पर व्यक्तिगत आरोप नहीं लगा रहे, लेकिन उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के नेता कुणाल घोष द्वारा पूर्व में ममता बनर्जी के विरुद्ध की गई टिप्पणियों का उल्लेख किया और कहा कि ऐसे बयानों के वीडियो मीडिया में उपलब्ध हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ममता बनर्जी का महिला होना उनके लिए 'प्लस पॉइंट' है — एक टिप्पणी जिसे राजनीतिक हलकों में विवादास्पद माना जा रहा है।
आरजी कर मामले पर रुख
चर्चित आरजी कर रेप और हत्या मामले पर घोष ने कहा कि केवल वर्षों की गिनती से न्याय नहीं मिलता। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार के सत्ता में आने के बाद याचिका प्राप्त होने पर इस मामले की फाइल पुनः खोली गई और नई जाँच के आदेश दिए गए। उन्होंने आश्वासन दिया कि जाँच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे सजा अवश्य मिलेगी।
आगे की स्थिति
घोष के इस बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू होने की संभावना है। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में सत्ता-परिवर्तन के बाद विपक्षी नेताओं की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पुलिस की आगामी कार्रवाई यह तय करेगी कि मंत्री के बयान महज राजनीतिक बयानबाजी थे या उनके पीछे ठोस प्रशासनिक इरादा है।