बांग्लादेश जेलों में 8 महीने में 132 कैदियों की मौत, मानवाधिकार संगठनों ने उठाई जवाबदेही की माँग
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश की जेलों में हिरासत में होने वाली मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। रिपोर्टों के अनुसार, 2026 के पहले साढ़े आठ महीनों में देशभर की जेलों में कम से कम 132 कैदियों की मौत हो चुकी है — यानी लगभग हर रोज़ एक मौत। भीड़भाड़ से जर्जर जेलें, अपर्याप्त चिकित्सा सुविधाएँ और पारदर्शी जवाबदेही का अभाव — इन तीन मोर्चों पर मानवाधिकार संगठन अब खुलकर सरकार से जवाब माँग रहे हैं।
मुख्य घटनाक्रम
ढाका स्थित मानवाधिकार संगठन आइन ओ सालिश केंद्र (ASK) ने जनवरी से अगस्त 2026 के बीच 79 कैदियों की मौत दर्ज की है, जिनमें 47 विचाराधीन और 32 सजायाफ्ता कैदी शामिल थे। इनमें से सर्वाधिक 44 मौतें अकेले ढाका डिवीजन में हुईं।
सितंबर के पहले 15 दिनों में ही बीमारियों के कारण कम से कम 10 और कैदियों की जान गई, जिससे साल 2026 में कुल मौतों की संख्या 132 तक पहुँच गई। कुछ दिनों में एक ही दिन में चार मौतें दर्ज की गईं।
ताज़ा मामलों में 54 वर्षीय मोहम्मद रफीकुल इस्लाम और 60 वर्षीय अब्दुर रहीम शामिल हैं, जिनकी सोमवार को ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मौत हुई। इससे एक दिन पहले ढाका सेंट्रल जेल के दो कैदियों — अब्दुल बारेक और अब्दुल माबूद — की भी मौत हो चुकी थी।
मानवाधिकार संगठनों की चिंता
ASK के वरिष्ठ समन्वयक अबू अहमद फैजुल कबीर ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'कैदी अपनी आज़ादी खो सकते हैं, लेकिन वे अपनी मानवीय गरिमा और मौलिक अधिकार नहीं खोते।' उन्होंने माँग की कि हर मौत की स्वतंत्र जाँच हो, जिसमें उपलब्ध चिकित्सा उपचार, सुरक्षा व्यवस्था और जेल अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल शामिल हो।
कबीर ने जोर देकर कहा कि राज्य हिरासत में रखे गए प्रत्येक व्यक्ति के जीवन, स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए जवाबदेह है — चाहे वह विचाराधीन कैदी हो या सजायाफ्ता। यह ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश की नई अंतरिम सरकार पर शासन सुधार के दबाव पहले से बने हुए हैं।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
ढाका विश्वविद्यालय के समाज कल्याण और अनुसंधान संस्थान में अपराध विज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर तौहीदुल हक ने जेलों में व्यापक मानवाधिकार संकट की जड़ में भीड़भाड़, अपर्याप्त स्वास्थ्य सेवा और खराब भोजन मानकों को बताया। उनके अनुसार, 'इन सभी क्षेत्रों में मानवाधिकारों के मुद्दे की अनदेखी की जा रही है।'
गौरतलब है कि रिपोर्टिंग अवधि और स्रोतों के अनुसार आँकड़ों में अंतर देखा गया है। रिपोर्ट के अनुसार, यह अंतर स्वयं इस बात की ओर इशारा करता है कि जेलों के भीतर बीमार कैदियों को कितनी जल्दी इलाज मिलता है और क्या उनके परिवारों को समय पर सूचित किया जाता है — इन बुनियादी सवालों के जवाब आज भी अस्पष्ट हैं।
आम जनता और परिवारों पर असर
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि कानूनी तौर पर हिरासत में सजा का मतलब केवल आज़ादी से वंचित करना होना चाहिए — मौत नहीं। लेकिन जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को सलाखों के पीछे खोया, उनके लिए यह सजा अपरिवर्तनीय हो गई। विचाराधीन कैदियों की मौतें विशेष रूप से चिंताजनक हैं, क्योंकि वे अभी दोषसिद्ध भी नहीं थे।
आगे क्या
मानवाधिकार संगठन ASK और अन्य नागरिक समाज समूहों ने बांग्लादेश सरकार से प्रत्येक हिरासत मृत्यु की स्वतंत्र और पारदर्शी जाँच सुनिश्चित करने की माँग की है। आलोचकों का कहना है कि जब तक जेल प्रशासन में संरचनात्मक सुधार नहीं होते — अधिक चिकित्सा कर्मचारी, भीड़भाड़ कम करने की नीति और परिवारों को अनिवार्य सूचना — तब तक मौतों का यह सिलसिला जारी रह सकता है।