बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप: 24 घंटे में 7 और बच्चों की मौत, कुल मृतक 620
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश में खसरे जैसे लक्षणों वाली बीमारी का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा। 7 जून 2026 को रविवार सुबह 8 बजे तक के 24 घंटों में 7 और बच्चों की मौत दर्ज की गई, जिससे कुल मृतकों की संख्या बढ़कर 620 हो गई है। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के मेडिकल बुलेटिन के अनुसार, हालिया मौतों को अभी भी संदिग्ध खसरा मामलों के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
मुख्य आँकड़े और स्थिति
डीजीएचएस के नवीनतम आँकड़ों के अनुसार, संदिग्ध खसरे से मृतकों की संख्या 529 हो गई है, जबकि प्रयोगशाला परीक्षण से पुष्टि किए गए मृतकों की संख्या 91 पर बनी हुई है। पिछले 24 घंटों में 1,221 नए संदिग्ध मामले सामने आए, जिससे कुल संदिग्ध मामलों की संख्या 79,012 तक पहुँच गई। इसी अवधि में 66 नए पुष्ट मामले दर्ज हुए, और पुष्टि किए गए कुल संक्रमणों की संख्या 9,686 हो गई।
अस्पतालों पर बढ़ता बोझ
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, 15 मार्च 2026 से अब तक 64,263 संदिग्ध मरीजों को अस्पतालों में भर्ती कराया जा चुका है। इनमें से 60,084 मरीज स्वस्थ होकर अस्पताल से छुट्टी पा चुके हैं। बावजूद इसके, लगातार बढ़ते नए मामलों ने बांग्लादेश की स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। यह ऐसे समय में आया है जब देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली पहले से ही संसाधनों के दबाव में है।
टीकाकरण की कमी मुख्य कारण
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, मार्च से मई 2026 के बीच बांग्लादेश में खसरे के 62,000 से अधिक संदिग्ध मामले और 8,000 से अधिक प्रयोगशाला-पुष्टि संक्रमण दर्ज किए गए। बांग्लादेशी अंग्रेजी दैनिक के अनुसार, अधिकांश पीड़ित बच्चे पाँच वर्ष से कम आयु के थे और कई को खसरे का पूरा टीकाकरण नहीं मिला था। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और यूनिसेफ ने भी टीकाकरण कवरेज में कमी को इस संकट का प्रमुख कारण बताया है।
खसरे की संक्रामकता और खतरा
गौरतलब है कि खसरा दुनिया की सबसे अधिक संक्रामक वायरल बीमारियों में से एक है। एक संक्रमित बच्चा आसपास के लगभग 90 प्रतिशत बिना टीके वाले बच्चों में वायरस फैला सकता है। यह तथ्य मौजूदा प्रकोप की गंभीरता को और अधिक रेखांकित करता है।
स्वास्थ्य अधिकारियों की अपील
स्वास्थ्य अधिकारियों ने अभिभावकों से बच्चों का समय पर टीकाकरण कराने और संक्रमण के लक्षण दिखते ही तुरंत चिकित्सा सहायता लेने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक टीकाकरण अभियान को व्यापक स्तर पर तेज नहीं किया जाता, तब तक नए मामलों की रफ्तार पर काबू पाना मुश्किल होगा।