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बांग्लादेश में खसरे से 555 बच्चों की मौत, 24 घंटे में 10 और की जान गई

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बांग्लादेश में खसरे से 555 बच्चों की मौत, 24 घंटे में 10 और की जान गई

सारांश

बांग्लादेश में खसरे का संकट गहराता जा रहा है — 555 बच्चों की जान जा चुकी है और 66,000 से अधिक संदिग्ध मामले दर्ज हैं। यूनिसेफ का दावा है कि 2024 से ही चेतावनियाँ दी जा रही थीं, लेकिन समय पर कार्रवाई नहीं हुई। अब 1.8 करोड़ बच्चों के टीकाकरण की दौड़ जारी है।

मुख्य बातें

26 मई 2026 तक बांग्लादेश में खसरे और संदिग्ध लक्षणों से 555 बच्चों की मौत, पिछले 24 घंटों में 10 नई मौतें।
डीजीएचएस के अनुसार कुल 66,023 संदिग्ध और 8,772 पुष्टि मामले दर्ज; ढाका डिवीजन सबसे अधिक प्रभावित।
15 मार्च से 52,530 बच्चे अस्पताल में भर्ती हुए, जिनमें से 48,800 ठीक होकर घर लौटे।
सरकार का आपातकालीन खसरा-रूबेला टीकाकरण अभियान अप्रैल में शुरू; लक्ष्य 1.8 करोड़ बच्चों (6 माह–5 वर्ष) का टीकाकरण।
यूनिसेफ ने दावा किया कि 2024 से स्वास्थ्य मंत्रालय को 5-6 पत्र और 10 बैठकों में चेताया गया था, लेकिन समय पर कदम नहीं उठाए गए।

बांग्लादेश में खसरे और इससे मिलते-जुलते लक्षणों के कारण बच्चों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। 26 मई 2026 को मंगलवार सुबह 8 बजे तक के आँकड़ों के अनुसार पिछले 24 घंटों में 10 और बच्चों की मौत दर्ज की गई, जिससे 15 मार्च 2026 से अब तक कुल मौतों की संख्या 555 हो गई है। स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशालय (डीजीएचएस) के आँकड़े इस संकट की गंभीरता को उजागर करते हैं।

ताज़ा आँकड़े और संक्रमण की स्थिति

डीजीएचएस के अनुसार, इन 10 मौतों में से केवल 1 मौत की पुष्टि खसरे के कारण हुई है, जबकि शेष 9 मामलों को अभी संदिग्ध श्रेणी में रखा गया है। ढाका डिवीजन में संदिग्ध मौतों की संख्या सर्वाधिक बताई जा रही है।

पिछले 24 घंटों में 1,083 नए संदिग्ध मामले सामने आए, जिससे कुल संदिग्ध मामलों की संख्या 66,023 तक पहुँच गई है। इसी अवधि में 53 नए पुष्टि मामले भी दर्ज हुए, जिससे कुल पुष्टि मामलों की संख्या 8,772 हो गई है। 15 मार्च से अब तक 52,530 संदिग्ध बाल मरीज़ों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिनमें से 48,800 स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं।

सरकार का टीकाकरण अभियान

बढ़ते संक्रमण के मद्देनज़र बांग्लादेश सरकार ने अप्रैल 2026 में देशव्यापी आपातकालीन खसरा-रूबेला टीकाकरण अभियान शुरू किया। इस अभियान का लक्ष्य 6 महीने से 5 साल तक की आयु के लगभग 1.8 करोड़ बच्चों को टीका लगाना है। यह कार्यक्रम स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), यूनिसेफ और टीका एवं प्रतिरक्षा के लिए वैश्विक गठबंधन (GAVI) के सहयोग से संचालित किया जा रहा है।

स्वास्थ्य मंत्री सरदार मोहम्मद सखावत हुसैन ने कहा कि टीकाकरण अभियान के प्रभाव से आने वाले कुछ हफ्तों में स्थिति नियंत्रण में आने और मरीज़ों की संख्या में गिरावट आने की उम्मीद है।

यूनिसेफ की चेतावनी और सरकार की चूक

यह ऐसे समय में आया है जब यूनिसेफ ने दावा किया है कि अंतरिम सरकार के कार्यकाल में उसने बार-बार आगाह किया था कि उचित कदम न उठाए जाने पर परिणाम गंभीर हो सकते हैं। बांग्लादेश में यूनिसेफ की प्रतिनिधि राणा फ्लावर्स ने एक प्रेस वार्ता में बताया कि संयुक्त राष्ट्र एजेंसी ने स्वास्थ्य मंत्रालय को 5 से 6 पत्र भेजे थे और अंतरिम सरकार के कार्यकाल के दौरान 10 बैठकों में यह मामला उठाया गया था।

गौरतलब है कि 2024 से ही सरकार को चेताया जाता रहा कि वैक्सीन की कमी एक बड़े स्वास्थ्य संकट का कारण बन सकती है, लेकिन आलोचकों के अनुसार आवश्यक कदम समय पर नहीं उठाए गए। यह चूक अब सैकड़ों बच्चों की जान लेने वाले संकट के रूप में सामने आई है।

आम जनता और स्वास्थ्य तंत्र पर असर

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, ढाका सहित देश के विभिन्न हिस्सों में अस्पतालों पर दबाव बना हुआ है। 52,530 से अधिक बच्चों के अस्पताल में भर्ती होने से स्वास्थ्य ढाँचे की सीमाएँ उजागर हुई हैं। हालाँकि 48,800 बच्चों के ठीक होने की खबर कुछ राहत देती है, लेकिन प्रतिदिन हज़ार से अधिक नए संदिग्ध मामले चिंता का विषय बने हुए हैं।

आगे की राह

स्वास्थ्य मंत्री के बयान के अनुसार टीकाकरण अभियान के असर से स्थिति में जल्द सुधार की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि 1.8 करोड़ बच्चों के टीकाकरण के पूरा होने पर संक्रमण की रफ्तार थमेगी। बांग्लादेश का यह संकट दक्षिण एशिया में बाल स्वास्थ्य प्रणालियों की कमज़ोरियों को एक बार फिर रेखांकित करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि नीतिगत विफलता का प्रमाण है। यूनिसेफ का यह दावा कि उसने 2024 से ही 10 बैठकों और 5-6 पत्रों के ज़रिए चेताया था, सवाल उठाता है कि अंतरिम सरकार ने वैक्सीन भंडारण को प्राथमिकता क्यों नहीं दी। 555 बच्चों की मौत उस चूक की कीमत है जो पूरी तरह टाली जा सकती थी। टीकाकरण अभियान अब सही दिशा में है, लेकिन यह देरी से उठाया गया कदम है — और जवाबदेही तय हुए बिना यह संकट भविष्य में दोहराए जाने का जोखिम बना रहेगा।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांग्लादेश में खसरे से कितने बच्चों की मौत हुई है?
26 मई 2026 तक के आँकड़ों के अनुसार 15 मार्च 2026 से अब तक कुल 555 बच्चों की मौत खसरे और इससे मिलते-जुलते लक्षणों के कारण हुई है। पिछले 24 घंटों में 10 नई मौतें दर्ज की गईं, जिनमें से 1 की पुष्टि खसरे से और 9 संदिग्ध श्रेणी में हैं।
बांग्लादेश में खसरे के कुल कितने मामले सामने आए हैं?
डीजीएचएस के अनुसार 15 मार्च 2026 से अब तक कुल 66,023 संदिग्ध और 8,772 पुष्टि मामले दर्ज हुए हैं। 52,530 बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिनमें से 48,800 ठीक हो चुके हैं।
बांग्लादेश सरकार ने खसरे को रोकने के लिए क्या कदम उठाए हैं?
सरकार ने अप्रैल 2026 में देशव्यापी आपातकालीन खसरा-रूबेला टीकाकरण अभियान शुरू किया है, जिसका लक्ष्य 6 महीने से 5 साल तक के लगभग 1.8 करोड़ बच्चों को टीका लगाना है। यह अभियान WHO, यूनिसेफ और GAVI के सहयोग से चलाया जा रहा है।
यूनिसेफ ने बांग्लादेश सरकार को खसरे के बारे में कब चेताया था?
यूनिसेफ की प्रतिनिधि राणा फ्लावर्स के अनुसार संयुक्त राष्ट्र एजेंसी ने 2024 से ही स्वास्थ्य मंत्रालय को 5-6 पत्र भेजे और अंतरिम सरकार के कार्यकाल में 10 बैठकों में यह मुद्दा उठाया था। चेतावनी दी गई थी कि वैक्सीन की कमी बड़े स्वास्थ्य संकट का कारण बन सकती है।
बांग्लादेश में खसरे से सबसे ज़्यादा प्रभावित क्षेत्र कौन सा है?
डीजीएचएस के आँकड़ों के अनुसार ढाका डिवीजन में संदिग्ध मौतों की संख्या सबसे अधिक रही है। देशभर में संक्रमण फैला हुआ है और अस्पतालों पर दबाव बना हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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