बांग्लादेश में खसरे से 432 मौतें, 24 घंटों में 8 और की जान गई; 60,000 पार हुए मामले
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा। 14 मई 2025 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में 8 और मौतें दर्ज की गई हैं, जिससे कुल मृतकों की संख्या बढ़कर 432 हो गई है। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) के हवाले से स्थानीय मीडिया ने बताया कि संदिग्ध और पुष्ट मामलों को मिलाकर कुल संख्या 60,000 से अधिक हो चुकी है।
मौजूदा स्थिति और आंकड़े
स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में 1,489 नए संदिग्ध मामले सामने आए हैं, जिससे कुल संदिग्ध मरीजों की संख्या 53,056 पहुंच गई है। इसके अलावा 126 नए मामलों की प्रयोगशाला में पुष्टि हुई है, जिससे पुष्ट मामलों की कुल संख्या 7,150 हो गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह हाल के वर्षों में खसरे का सबसे बड़ा प्रकोप है।
विशेषज्ञों की राय
सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ मुश्ताक हुसैन ने कहा कि यदि मरीजों के उपचार के लिए समुचित व्यवस्था और समय पर हस्तक्षेप होता, तो कई जानें बचाई जा सकती थीं। उन्होंने यह भी कहा कि जब मामले 50,000 से ऊपर पहुंच जाएं, तो सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया जाना चाहिए था।
वहीं, विशेषज्ञ महबूबा जमील का मानना है कि यदि टीकाकरण अभियान निरंतर जारी रहा, तो आने वाले हफ्तों में नए मामलों में गिरावट आ सकती है। उन्होंने बताया कि जिन इलाकों में टीकाकरण हो चुका है, वहां स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर दिख रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले वर्ष टीकाकरण में आई कमी और व्यापक कुपोषण इस संक्रमण के तेजी से फैलने के प्रमुख कारण हैं।
जन आक्रोश और राजनीतिक दबाव
ढाका के धनमंडी 27 इलाके में 'सचेतन नागरिक समाज' के बैनर तले प्रदर्शन हुआ। प्रदर्शनकारियों ने पूर्व अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस और स्वास्थ्य सलाहकार नूरजहां बेगम के खिलाफ जवाबदेही तय करने और पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने की मांग की।
मीडिया और विश्लेषकों का आकलन
कुछ रिपोर्टों में इस प्रकोप को 'टाली जा सकने वाली आपदा' करार दिया गया है। बांग्लादेश के प्रमुख अखबार 'द डेली स्टार' की एक संपादकीय रिपोर्ट में कहा गया कि दो दशकों में बनी देश की मजबूत टीकाकरण व्यवस्था अब लापरवाही का शिकार हो गई है। यह ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश पहले से ही आर्थिक और राजनीतिक अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है।
आगे की राह
स्वास्थ्य अधिकारियों पर टीकाकरण अभियान को तेज करने का दबाव बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक सभी प्रभावित जिलों में व्यापक टीकाकरण अभियान नहीं चलाया जाता और कुपोषण से ग्रस्त बच्चों को प्राथमिकता नहीं दी जाती, तब तक मृत्यु दर में कमी लाना कठिन होगा।