बांग्लादेश में खसरे से 432 मौतें, 24 घंटों में 8 और की जान गई; 60,000 पार हुए मामले

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
बांग्लादेश में खसरे से 432 मौतें, 24 घंटों में 8 और की जान गई; 60,000 पार हुए मामले

सारांश

बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा — 24 घंटों में 8 और मौतें, कुल मृतक 432 और मामले 60,000 पार। विशेषज्ञ इसे हाल के वर्षों का सबसे बड़ा प्रकोप बता रहे हैं और टीकाकरण में लापरवाही को मुख्य कारण मान रहे हैं।

मुख्य बातें

बांग्लादेश में खसरे से कुल 432 मौतें दर्ज, पिछले 24 घंटों में 8 और की जान गई।
संदिग्ध और पुष्ट मामलों की कुल संख्या 60,000 से अधिक; संदिग्ध मरीज 53,056 , पुष्ट मामले 7,150 ।
पिछले 24 घंटों में 1,489 नए संदिग्ध और 126 नए पुष्ट मामले सामने आए।
विशेषज्ञ मुश्ताक हुसैन ने 50,000 से अधिक मामलों पर सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित न होने पर सवाल उठाए।
ढाका में प्रदर्शनकारियों ने पूर्व मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस और स्वास्थ्य सलाहकार नूरजहां बेगम से जवाबदेही और पीड़ितों को मुआवजे की मांग की।
'द डेली स्टार' ने संपादकीय में चेताया कि दो दशकों में बनी टीकाकरण व्यवस्था लापरवाही का शिकार हो गई है।

बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा। 14 मई 2025 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में 8 और मौतें दर्ज की गई हैं, जिससे कुल मृतकों की संख्या बढ़कर 432 हो गई है। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) के हवाले से स्थानीय मीडिया ने बताया कि संदिग्ध और पुष्ट मामलों को मिलाकर कुल संख्या 60,000 से अधिक हो चुकी है।

मौजूदा स्थिति और आंकड़े

स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में 1,489 नए संदिग्ध मामले सामने आए हैं, जिससे कुल संदिग्ध मरीजों की संख्या 53,056 पहुंच गई है। इसके अलावा 126 नए मामलों की प्रयोगशाला में पुष्टि हुई है, जिससे पुष्ट मामलों की कुल संख्या 7,150 हो गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह हाल के वर्षों में खसरे का सबसे बड़ा प्रकोप है।

विशेषज्ञों की राय

सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ मुश्ताक हुसैन ने कहा कि यदि मरीजों के उपचार के लिए समुचित व्यवस्था और समय पर हस्तक्षेप होता, तो कई जानें बचाई जा सकती थीं। उन्होंने यह भी कहा कि जब मामले 50,000 से ऊपर पहुंच जाएं, तो सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया जाना चाहिए था।

वहीं, विशेषज्ञ महबूबा जमील का मानना है कि यदि टीकाकरण अभियान निरंतर जारी रहा, तो आने वाले हफ्तों में नए मामलों में गिरावट आ सकती है। उन्होंने बताया कि जिन इलाकों में टीकाकरण हो चुका है, वहां स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर दिख रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले वर्ष टीकाकरण में आई कमी और व्यापक कुपोषण इस संक्रमण के तेजी से फैलने के प्रमुख कारण हैं।

जन आक्रोश और राजनीतिक दबाव

ढाका के धनमंडी 27 इलाके में 'सचेतन नागरिक समाज' के बैनर तले प्रदर्शन हुआ। प्रदर्शनकारियों ने पूर्व अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस और स्वास्थ्य सलाहकार नूरजहां बेगम के खिलाफ जवाबदेही तय करने और पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने की मांग की।

मीडिया और विश्लेषकों का आकलन

कुछ रिपोर्टों में इस प्रकोप को 'टाली जा सकने वाली आपदा' करार दिया गया है। बांग्लादेश के प्रमुख अखबार 'द डेली स्टार' की एक संपादकीय रिपोर्ट में कहा गया कि दो दशकों में बनी देश की मजबूत टीकाकरण व्यवस्था अब लापरवाही का शिकार हो गई है। यह ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश पहले से ही आर्थिक और राजनीतिक अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है।

आगे की राह

स्वास्थ्य अधिकारियों पर टीकाकरण अभियान को तेज करने का दबाव बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक सभी प्रभावित जिलों में व्यापक टीकाकरण अभियान नहीं चलाया जाता और कुपोषण से ग्रस्त बच्चों को प्राथमिकता नहीं दी जाती, तब तक मृत्यु दर में कमी लाना कठिन होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 से अधिक मामले यह साबित करते हैं कि यह प्रकोप महज एक स्वास्थ्य विफलता नहीं, बल्कि नीतिगत लापरवाही का परिणाम है। जब विशेषज्ञ खुद कह रहे हैं कि 50,000 मामलों पर आपातकाल घोषित होना चाहिए था और नहीं हुआ, तो सवाल उठता है कि निर्णय लेने में देरी किसने की और क्यों। गौरतलब है कि खसरा एक टीके से रोकी जा सकने वाली बीमारी है — यानी ये मौतें 'अपरिहार्य' नहीं थीं। जब तक जवाबदेही तय नहीं होती और टीकाकरण ढांचे को आपातकालीन आधार पर पुनर्जीवित नहीं किया जाता, आंकड़े और बढ़ते रहेंगे।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांग्लादेश में खसरे से अब तक कितनी मौतें हुई हैं?
स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) के आंकड़ों के अनुसार, 14 मई 2025 तक बांग्लादेश में खसरे और उससे मिलते-जुलते लक्षणों से कुल 432 लोगों की मौत हो चुकी है। पिछले 24 घंटों में 8 और मौतें दर्ज की गई हैं।
बांग्लादेश में खसरे के कुल कितने मामले सामने आए हैं?
संदिग्ध और पुष्ट मामलों को मिलाकर कुल संख्या 60,000 से अधिक हो गई है। इनमें 53,056 संदिग्ध और 7,150 प्रयोगशाला में पुष्ट मामले शामिल हैं।
बांग्लादेश में खसरा इतनी तेजी से क्यों फैला?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले वर्ष टीकाकरण अभियान में आई कमी और व्यापक कुपोषण इस संक्रमण के तेजी से फैलने के मुख्य कारण हैं। 'द डेली स्टार' ने संपादकीय में कहा कि दो दशकों में बनी टीकाकरण व्यवस्था लापरवाही का शिकार हो गई।
क्या बांग्लादेश में खसरे को लेकर सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित हुआ है?
अभी तक आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित नहीं किया गया है। विशेषज्ञ मुश्ताक हुसैन ने कहा कि जब मामले 50,000 से ऊपर पहुंच जाएं, तो आपातकाल घोषित किया जाना चाहिए था।
बांग्लादेश में खसरे के प्रकोप पर जनता की क्या प्रतिक्रिया रही है?
ढाका के धनमंडी 27 इलाके में 'सचेतन नागरिक समाज' के बैनर तले प्रदर्शन हुआ। प्रदर्शनकारियों ने पूर्व अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस और स्वास्थ्य सलाहकार नूरजहां बेगम के खिलाफ जवाबदेही और पीड़ित परिवारों को मुआवजे की मांग की।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 दिन पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 1 सप्ताह पहले
  4. 1 सप्ताह पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 6 महीने पहले