बांग्लादेश में खसरे का संकट: 38 बच्चों की जान गई, मामलों में तेज वृद्धि

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बांग्लादेश में खसरे का संकट: 38 बच्चों की जान गई, मामलों में तेज वृद्धि

सारांश

बांग्लादेश में खसरे के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है, जिससे 38 बच्चों की जान जा चुकी है। चट्टोग्राम मेडिकल कॉलेज में नए मरीजों का भर्ती होना चिंता बढ़ा रहा है। जानें इस गंभीर स्थिति के बारे में विस्तार से।

मुख्य बातें

बांग्लादेश में खसरे के मामलों में वृद्धि 38 बच्चों की मौत टीकाकरण कवरेज में कमी अस्पतालों पर दबाव विशेषज्ञों की अपील

ढाका, 30 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। बांग्लादेश के चट्टोग्राम मेडिकल कॉलेज अस्पताल (सीएमसीएच) में खसरे जैसे लक्षणों वाले छह नए मरीज भर्ती हुए हैं, जिससे सोमवार को बच्चों के वार्ड में मरीजों की संख्या 18 हो गई है।

सीएमसीएच के बाल चिकित्सा विभाग के प्रमुख मुहम्मद मूसा ने बताया कि सभी मरीजों को आइसोलेशन में रखा गया है।

रिपोर्टों के अनुसार, ढाका और कई अन्य जिलों में खसरा तेजी से फैल रहा है। इस वर्ष इस संक्रामक बीमारी और इससे जुड़ी जटिलताओं के कारण 38 बच्चों की मौत हो चुकी है।

'द डेली स्टार' की रिपोर्ट के अनुसार, मार्च महीने में 32 मौतें हुई हैं। इनमें से 21 राजधानी के मोहाखाली स्थित संक्रामक रोग अस्पताल (आईडीएच) में दर्ज की गई हैं, जिसमें रविवार को हुई तीन मौतें भी शामिल हैं। देशभर से मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण अस्पताल पर दबाव बढ़ गया है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, टीकाकरण कवरेज में कमी इस प्रकोप का मुख्य कारण है। कई बच्चे विस्तारित टीकाकरण कार्यक्रम (ईपीआई) से बाहर रह जाते हैं या पूरी खुराक नहीं ले पाते, जिससे वे संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई बच्चे टीकाकरण के लिए वापस नहीं आते हैं। इसके अलावा, कभी-कभी वैक्सीन की कमी भी स्थिति को और गंभीर बना देती है।

हालांकि कुल मिलाकर टीकाकरण कवरेज उच्च है, फिर भी लगभग दस प्रतिशत बच्चे अब भी बिना टीकाकरण के रह जाते हैं। इस कमी को दूर करने के लिए सरकार समय-समय पर “कैच-अप” अभियान चलाती है, लेकिन 2024 के अंत में प्रस्तावित एक कार्यक्रम प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण लागू नहीं हो सका, जिससे कई बच्चे जोखिम में रह गए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति, उच्च जनसंख्या घनत्व और व्यापक कुपोषण के साथ मिलकर, बीमारी के तेजी से फैलने का कारण बनी है।

मोहाखाली स्थित संक्रामक रोग अस्पताल में जूनियर कंसल्टेंट श्रेबाश पॉल ने बताया कि 2026 के पहले तीन महीनों में अस्पताल में 560 खसरा मरीज भर्ती हुए, जबकि 2025 में यह संख्या केवल 69 थी।

रिपोर्ट के अनुसार, मासिक भर्ती संख्या जनवरी में 35 से बढ़कर फरवरी में 88 हुई और मार्च में इसमें तेज उछाल आया। पहले के वर्षों में जहां केवल दस प्रतिशत सैंपल पॉजिटिव आते थे, वहीं इस वर्ष यह आंकड़ा 90 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

पॉल ने आगे बताया कि अधिकतर संक्रमित बच्चे नौ महीने से कम उम्र के हैं और अभी तक उनका टीकाकरण नहीं हुआ है।

अस्पतालों पर भारी दबाव के चलते मरीजों का इलाज केबिन के फर्श, गलियारों और यहां तक कि लिफ्ट के सामने भी किया जा रहा है, क्योंकि बेड की कमी है। हालांकि बांग्लादेश सरकार ने अन्य अस्पतालों को भी खसरा मरीजों को भर्ती करने का निर्देश दिया है, फिर भी स्थिति गंभीर बनी हुई है।

विशेषज्ञों ने इस प्रकोप को नियंत्रित करने के लिए टीकाकरण कवरेज बढ़ाने, जन जागरूकता में सुधार करने और कैच-अप अभियानों को जल्द लागू करने की अपील की है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बच्चों की मौत की बढ़ती संख्या और अस्पतालों पर बढ़ता दबाव हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या टीकाकरण कवरेज में कमी के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। सरकार को इस पर तुरंत ध्यान देने की आवश्यकता है।
RashtraPress
16 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

खसरे का टीका कब लगाना चाहिए?
बच्चों को खसरे का टीका आमतौर पर 9 महीने की उम्र में दिया जाता है।
खसरे के लक्षण क्या हैं?
खसरे के लक्षणों में बुखार, खांसी, नाक बहना, और दाने शामिल हैं।
खसरे से बचाव कैसे करें?
खसरे से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका टीकाकरण है।
क्या खसरा गंभीर हो सकता है?
हाँ, खसरा गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है, जैसे निमोनिया और मस्तिष्क की सूजन।
राष्ट्र प्रेस
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