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बांग्लादेश में खसरे की महामारी: 32,000 से अधिक मामले, यूनुस सरकार की वैक्सीन नीति पर सवाल

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बांग्लादेश में खसरे की महामारी: 32,000 से अधिक मामले, यूनुस सरकार की वैक्सीन नीति पर सवाल

सारांश

बांग्लादेश में खसरे की महामारी ने 32,000 से अधिक बच्चों को अपनी चपेट में ले लिया है और 250 से ज़्यादा जानें जा चुकी हैं। 'साइंस एडवाइजर' की रिपोर्ट के अनुसार, यूनुस सरकार द्वारा सितंबर 2025 में यूनिसेफ की वैक्सीन खरीद व्यवस्था को खुली निविदा से बदलना इस संकट की मुख्य वजह बना — और यूनिसेफ की बार-बार की चेतावनियों को नज़रअंदाज़ किया गया।

मुख्य बातें

मार्च 2025 के मध्य से बांग्लादेश में 32,000 से अधिक संदिग्ध खसरा मामले और 250 से ज़्यादा मौतें दर्ज की गई हैं, जिनमें अधिकांश छोटे बच्चे हैं।
सितंबर 2025 में यूनुस अंतरिम सरकार ने यूनिसेफ के माध्यम से वैक्सीन खरीद की व्यवस्था समाप्त कर खुली निविदा प्रणाली लागू की, जिससे आपूर्ति ठप हो गई।
2025 में केवल 59% पात्र बच्चों को ही खसरे का टीका लग पाया — सरकारी आँकड़ों के अनुसार।
यूनिसेफ प्रतिनिधि राना फ्लावर्स ने स्वास्थ्य अधिकारियों को बार-बार आगाह किया था, परंतु चेतावनी को नज़रअंदाज़ किया गया।
आईईडीसीआर सलाहकार मोहम्मद मुश्तुक हुसैन ने सरकार से औपचारिक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित करने की माँग की है।

बांग्लादेश इस समय खसरे (मीजल्स) की गंभीर महामारी की चपेट में है। मार्च 2025 के मध्य से अब तक देश में 32,000 से अधिक संदिग्ध मामले और 250 से ज्यादा मौतें दर्ज की गई हैं, जिनमें अधिकांश छोटे बच्चे शामिल हैं। 'साइंस एडवाइजर' की रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रकोप की जड़ें मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार द्वारा वैक्सीन खरीद व्यवस्था में किए गए नीतिगत बदलाव में हैं।

अस्पतालों में अफरा-तफरी का माहौल

रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रकोप के चलते ढाका सहित देशभर के अस्पतालों में भारी दबाव है। पिछले महीने ढाका के संक्रामक रोग अस्पताल में बच्चों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी — कई बच्चे सांस लेने के लिए संघर्ष करते दिखे, जबकि कुछ निढाल अवस्था में पड़े थे। बेड की कमी के कारण कई मरीजों का इलाज फर्श पर करना पड़ा।

विशेषज्ञों के मुताबिक, बच्चों में कुपोषण की ऊँची दर और कमज़ोर स्वास्थ्य व्यवस्था ने मौतों की संख्या बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। यह स्थिति इस बात की भी याद दिलाती है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र में हुई प्रगति कितनी जल्दी कमज़ोर पड़ सकती है।

नीतिगत बदलाव: विनाशकारी टूट की कहानी

जुलाई 2024 के व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार का गठन हुआ था। 'साइंस एडवाइजर' की रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि इस सरकार के 18 महीने के कार्यकाल में वैक्सीन कवरेज व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई।

रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2025 में अंतरिम सरकार ने यूनिसेफ के माध्यम से वैक्सीन खरीद की स्थापित व्यवस्था समाप्त कर खुली निविदा प्रणाली लागू कर दी। इस प्रक्रिया में सरकार आपूर्तिकर्ताओं से बोलियाँ मंगाती है और प्रस्तावों का मूल्यांकन कर ऑर्डर देती है।

यूनिसेफ की चेतावनी और सरकार की अनदेखी

यूनिसेफ ने इस कदम का कड़ा विरोध किया था और चेतावनी दी थी कि इससे टीकाकरण व्यवस्था बाधित हो सकती है तथा महामारी फैल सकती है। बांग्लादेश में यूनिसेफ की प्रतिनिधि राना फ्लावर्स ने कहा कि उन्होंने स्वास्थ्य अधिकारियों को बार-बार आगाह किया था और तत्कालीन अंतरिम स्वास्थ्य सलाहकार नूरजहाँ बेगम से भी इस फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा था।

रिपोर्ट में कहा गया है कि निविदा प्रक्रिया नौकरशाही देरी में फँस गई, जिससे वैक्सीन आपूर्ति ठप हो गई और देशभर में स्टॉक खत्म होने लगा। इससे नियमित टीकाकरण बुरी तरह प्रभावित हुआ।

टीकाकरण अभियान का हाल

खसरा-रूबेला (एमआर) का विशेष टीकाकरण अभियान, जो पहले 2024 में होना था और राजनीतिक अशांति के कारण 2025 तक टाल दिया गया था, उसे भी रद्द कर दिया गया। मार्च 2025 के अंत तक सरकारी आँकड़ों में सामने आया कि 2025 में केवल 59 प्रतिशत पात्र बच्चों को ही खसरे का टीका लग पाया।

बांग्लादेश स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के पूर्व रोग नियंत्रण निदेशक बे-नजीर अहमद ने चेतावनी दी कि मौजूदा गति से चल रहा आपातकालीन टीकाकरण अभियान महामारी को जल्दी नहीं रोक पाएगा।

विशेषज्ञों की माँग: सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित हो

ढाका स्थित महामारी विज्ञान, रोग नियंत्रण एवं अनुसंधान संस्थान (आईईडीसीआर) के सलाहकार मोहम्मद मुश्तुक हुसैन ने कहा कि बांग्लादेश सरकार को स्थिति की गंभीरता देखते हुए औपचारिक रूप से सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित करना चाहिए। उन्होंने कहा,

संपादकीय दृष्टिकोण

यह दर्शाता है कि यूनुस सरकार ने जन-स्वास्थ्य को राजनीतिक पुनर्गठन की भेंट चढ़ा दिया। गौरतलब है कि टीकाकरण कवरेज में गिरावट के नतीजे तुरंत नहीं, बल्कि महीनों बाद महामारी के रूप में सामने आते हैं — और तब तक हज़ारों बच्चों की जान दाँव पर लग जाती है। 59% टीकाकरण दर एक आँकड़ा नहीं, एक नीतिगत अपराध की गवाही है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांग्लादेश में खसरे की महामारी कब से शुरू हुई?
'साइंस एडवाइजर' की रिपोर्ट के अनुसार, यह प्रकोप मार्च 2025 के मध्य से तेज़ी से फैला है। तब से अब तक 32,000 से अधिक संदिग्ध मामले और 250 से ज़्यादा मौतें दर्ज की जा चुकी हैं।
यूनुस सरकार की कौन सी नीति इस महामारी से जुड़ी मानी जा रही है?
रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2025 में यूनुस अंतरिम सरकार ने यूनिसेफ के माध्यम से वैक्सीन खरीद की स्थापित व्यवस्था समाप्त कर खुली निविदा प्रणाली लागू की। इस बदलाव से वैक्सीन आपूर्ति ठप हो गई और देशभर में स्टॉक खत्म होने लगा।
यूनिसेफ ने इस फैसले पर क्या कहा था?
यूनिसेफ ने इस कदम का कड़ा विरोध किया था। बांग्लादेश में यूनिसेफ की प्रतिनिधि राना फ्लावर्स ने स्वास्थ्य अधिकारियों और तत्कालीन अंतरिम स्वास्थ्य सलाहकार नूरजहाँ बेगम को बार-बार आगाह किया था कि इस बदलाव से महामारी फैल सकती है।
बांग्लादेश में खसरे का टीकाकरण कितना प्रभावित हुआ?
मार्च 2025 के अंत तक सरकारी आँकड़ों के अनुसार केवल 59% पात्र बच्चों को ही खसरे का टीका लग पाया। इसके अलावा, 2024 के लिए निर्धारित खसरा-रूबेला विशेष टीकाकरण अभियान को पहले 2025 तक टाला गया और फिर रद्द कर दिया गया।
विशेषज्ञ अब क्या माँग कर रहे हैं?
आईईडीसीआर के सलाहकार मोहम्मद मुश्तुक हुसैन ने बांग्लादेश सरकार से औपचारिक रूप से सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित करने की माँग की है। बांग्लादेश स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के पूर्व रोग नियंत्रण निदेशक बे-नजीर अहमद ने भी चेतावनी दी है कि मौजूदा आपातकालीन टीकाकरण अभियान महामारी को जल्दी नहीं रोक पाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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