कांकेर IED विस्फोट: घायल DRG कांस्टेबल परमानंद कोर्रम शहीद, कुल 4 जवानों ने दी कुर्बानी
सारांश
Key Takeaways
छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में हुए IED विस्फोट में गंभीर रूप से घायल जिला रिजर्व गार्ड (DRG) के कांस्टेबल परमानंद कोर्रम ने शनिवार, 2 मई 2026 को रायपुर के अस्पताल में दम तोड़ दिया। उन्हें बेहतर इलाज के लिए रायपुर रेफर किया गया था, किंतु विस्फोट की तीव्रता के कारण लगी चोटें जानलेवा साबित हुईं। इस दुखद घटना के साथ ही इस एक विस्फोट में शहीद होने वाले DRG जवानों की कुल संख्या 4 हो गई है।
घटनाक्रम: कैसे हुआ विस्फोट
यह घटना कांकेर जिले के छोटेबेठिया पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में घटी। DRG की एक विशेष टीम कांकेर-नारायणपुर सीमा के निकट बारूदी सुरंग निष्क्रियकरण और तलाशी अभियान पर निकली थी। अभियान के दौरान जमीन में दबा एक तात्कालिक विस्फोटक उपकरण (IED) भीषण धमाके के साथ फट गया, जिससे आसपास का पूरा इलाका हिल उठा।
विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि मौके पर मौजूद 4 जवान तत्काल गंभीर रूप से घायल हो गए। आपातकालीन प्रोटोकॉल सक्रिय करते हुए सभी घायलों को तुरंत चिकित्सा सुविधा के लिए भेजा गया, लेकिन सभी चारों जवान अंततः अपनी चोटों के कारण शहीद हो गए।
शहीद जवानों की पहचान
इस विस्फोट में जिन चार वीर जवानों ने अपनी जान कुर्बान की, उनकी पहचान इस प्रकार है — DRG प्रभारी सुखराम वट्टी, कांस्टेबल कृष्णा कोमरा, कांस्टेबल संजय गढ़पाले और कांस्टेबल परमानंद कोर्रम। ये सभी जवान छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बनाए रखने में अहम भूमिका निभाने के लिए जाने जाते थे। बारूदी सुरंगों को निष्क्रिय करने का उनका यह अभियान नागरिकों और सुरक्षाबलों की सुरक्षा के लिए था।
मानवीय क्षति: एक परिवार का टूटता सपना
सामरिक नुकसान के अतिरिक्त, इस त्रासदी ने कई परिवारों को गहरे शोक में डुबो दिया है। कांस्टेबल संजय कुमार गढ़पाले के गाँव में 2027 की शुरुआत में होने वाली शादी की तैयारियाँ चल रही थीं — वही घर, जो कुछ समय पहले तक खुशियों से भरा था, अब मातम में डूबा है। तिरंगे में लिपटे उनके पार्थिव शरीर की वापसी ने परिवार के भविष्य के सपनों को चकनाचूर कर दिया।
समुदाय और बल की श्रद्धांजलि
शहादत की खबर फैलते ही पूरा समुदाय एकजुट होकर बस्तर फाइटर्स फोर्स के इन वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुँचा। स्थानीय लोगों ने उन जवानों की बहादुरी को सलाम किया, जिन्होंने दूसरों की रक्षा के लिए अपनी जान की बाजी लगा दी। गौरतलब है कि नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र में IED विस्फोट सुरक्षाबलों के लिए सबसे बड़े खतरों में से एक बना हुआ है, और यह हादसा उस खतरे की भयावह याद दिलाता है।
अधिकारियों के अनुसार, इस क्षेत्र में आगे भी तलाशी और माइन-क्लियरेंस अभियान जारी रहेंगे। शहीद जवानों की कुर्बानी व्यर्थ न जाए — यही संकल्प अब सुरक्षाबलों को आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रहा है।