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बीमा क्षेत्र में 100% FDI: सरकार ने ऑटोमैटिक रूट से विदेशी निवेश को दी हरी झंडी

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बीमा क्षेत्र में 100% FDI: सरकार ने ऑटोमैटिक रूट से विदेशी निवेश को दी हरी झंडी

सारांश

केंद्र सरकार ने बीमा क्षेत्र में ऑटोमैटिक रूट के तहत 100% FDI को औपचारिक रूप दे दिया है — यह दिसंबर 2025 में पारित 'सबका बीमा सबकी रक्षा अधिनियम' की अगली कड़ी है। LIC के लिए सीमा 20% पर बरकरार है, जबकि बीमा मध्यस्थों को भी पूर्ण विदेशी निवेश की छूट मिली है।

मुख्य बातें

केंद्र सरकार ने 2 मई 2026 को बीमा क्षेत्र में ऑटोमैटिक रूट के तहत 100% FDI को अधिसूचित किया।
LIC में विदेशी निवेश ऑटोमैटिक रूट के तहत 20% तक सीमित रहेगा और LIC अधिनियम, 1956 से नियंत्रित होगा।
विदेशी निवेश वाली बीमा कंपनियों में बोर्ड अध्यक्ष/MD/CEO में से एक भारतीय नागरिक और निवासी होना अनिवार्य।
बीमा मध्यस्थों — ब्रोकर, कॉर्पोरेट एजेंट, थर्ड-पार्टी प्रशासक सहित — के लिए भी 100% FDI की अनुमति।
यह कदम दिसंबर 2025 में पारित 'सबका बीमा सबकी रक्षा अधिनियम' और फरवरी 2026 की DPIIT अधिसूचना की अगली कड़ी है।

केंद्र सरकार ने 2 मई 2026 को बीमा क्षेत्र में ऑटोमैटिक रूट के तहत 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को औपचारिक रूप से अधिसूचित कर दिया है। इस कदम से विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बीमा उद्योग में प्रवेश का मार्ग पहले से कहीं अधिक सुगम हो गया है, जबकि घरेलू निगरानी और विनियामक ढाँचे को भी बरकरार रखा गया है।

नई अधिसूचना में क्या है

अधिसूचना के अनुसार, बीमा कंपनियों में विदेशी निवेश बीमा अधिनियम, 1938 के प्रावधानों के पालन और भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) की अनिवार्य मंजूरी के अधीन होगा। यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि पूँजी प्रवाह के साथ-साथ नियामकीय अनुशासन भी बना रहे।

अधिसूचना में एक महत्त्वपूर्ण शर्त यह भी रखी गई है कि जिन बीमा कंपनियों में विदेशी निवेश हो, उनके बोर्ड अध्यक्ष, प्रबंध निदेशक या मुख्य कार्यकारी अधिकारी में से कम से कम एक व्यक्ति भारतीय नागरिक और निवासी होना अनिवार्य होगा।

LIC के लिए अलग नियम

अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) एक अलग ढाँचे के तहत काम करता रहेगा। LIC में ऑटोमैटिक रूट के तहत विदेशी निवेश 20 प्रतिशत तक ही सीमित रहेगा। LIC में निवेश बीमा अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों के साथ-साथ जीवन बीमा निगम अधिनियम, 1956 द्वारा नियंत्रित होता रहेगा।

बीमा मध्यस्थों को भी मिली छूट

नई अधिसूचना के दायरे में बीमा मध्यस्थ भी आते हैं। इनमें ब्रोकर, पुनर्बीमा ब्रोकर, बीमा सलाहकार, कॉर्पोरेट एजेंट, थर्ड-पार्टी प्रशासक, सर्वेक्षक और नुकसान आकलनकर्ता, प्रबंध महा एजेंट तथा बीमा रिपॉजिटरी शामिल हैं। इन सभी श्रेणियों के लिए भी ऑटोमैटिक रूट के तहत 100 प्रतिशत FDI की अनुमति दी गई है, जैसा कि IRDAI द्वारा समय-समय पर अधिसूचित किया जाता है।

विधायी पृष्ठभूमि

यह अधिसूचना सरकार के उदारीकरण की दिशा में उठाए गए पहले के कदमों की स्वाभाविक परिणति है। फरवरी 2026 में उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) ने बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत FDI की अनुमति देने की अधिसूचना जारी की थी। यह कदम दिसंबर 2025 में संसद द्वारा पारित 'सबका बीमा सबकी रक्षा (बीमा कानूनों में संशोधन) अधिनियम' के अनुरूप था।

इस अधिनियम के माध्यम से बीमा अधिनियम, 1938, जीवन बीमा निगम अधिनियम, 1956 और IRDAI अधिनियम, 1999 के प्रमुख प्रावधानों में संशोधन किए गए, जिनका उद्देश्य देश में पूँजी प्रवाह बढ़ाना और बीमा की पहुँच का विस्तार करना था। गौरतलब है कि भारत में बीमा पैठ (insurance penetration) अभी भी वैश्विक औसत से काफी नीचे है, और सरकार इस अंतर को पाटने के लिए विदेशी पूँजी को प्रमुख उपकरण मान रही है।

आगे क्या होगा

नवीनतम अधिसूचना ने मौजूदा ढाँचे को औपचारिक रूप दे दिया है। विश्लेषकों के अनुसार, इससे वैश्विक बीमा कंपनियों की भारतीय बाज़ार में रुचि बढ़ेगी और घरेलू बीमा कंपनियों को अधिक पूँजी व तकनीकी सहयोग मिल सकेगा। IRDAI की निगरानी में यह उदारीकरण भारतीय पॉलिसीधारकों के हितों की रक्षा करते हुए क्षेत्र के विस्तार का मार्ग प्रशस्त करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन में है। IRDAI की अनिवार्य मंजूरी और 'कम से कम एक भारतीय CEO/MD' की शर्त स्वागतयोग्य सुरक्षा उपाय हैं, परंतु यह देखना होगा कि ये शर्तें व्यवहार में कितनी कड़ाई से लागू होती हैं। LIC को अलग ढाँचे में रखना राजनीतिक रूप से समझ में आता है, किंतु यह दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धात्मकता के सवाल उठाता है। भारत की बीमा पैठ वैश्विक औसत से नीचे बनी हुई है — विदेशी पूँजी अकेले इस समस्या का हल नहीं है; वितरण नेटवर्क और उपभोक्ता जागरूकता उतनी ही ज़रूरी है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बीमा क्षेत्र में 100% FDI ऑटोमैटिक रूट क्या है?
ऑटोमैटिक रूट के तहत 100% FDI का अर्थ है कि विदेशी निवेशक सरकार की पूर्व अनुमति के बिना भारतीय बीमा कंपनियों में पूर्ण स्वामित्व ले सकते हैं। हालाँकि, IRDAI की मंजूरी और बीमा अधिनियम, 1938 का पालन अनिवार्य रहेगा।
LIC में विदेशी निवेश की सीमा क्या है?
LIC में ऑटोमैटिक रूट के तहत विदेशी निवेश 20 प्रतिशत तक सीमित रहेगा। LIC एक अलग ढाँचे के तहत काम करता रहेगा और इसमें निवेश LIC अधिनियम, 1956 तथा बीमा अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों से नियंत्रित होगा।
यह अधिसूचना किस कानून के तहत जारी की गई है?
यह अधिसूचना दिसंबर 2025 में संसद द्वारा पारित 'सबका बीमा सबकी रक्षा (बीमा कानूनों में संशोधन) अधिनियम' और फरवरी 2026 में DPIIT की अधिसूचना के अनुरूप जारी की गई है। इस अधिनियम ने बीमा अधिनियम 1938, LIC अधिनियम 1956 और IRDAI अधिनियम 1999 में संशोधन किए थे।
विदेशी निवेश वाली बीमा कंपनियों के लिए क्या शर्तें हैं?
ऐसी कंपनियों में बोर्ड अध्यक्ष, प्रबंध निदेशक या मुख्य कार्यकारी अधिकारी में से कम से कम एक व्यक्ति भारतीय नागरिक और निवासी होना अनिवार्य है। इसके अलावा IRDAI की अनिवार्य मंजूरी और बीमा अधिनियम 1938 का पालन भी ज़रूरी है।
क्या बीमा मध्यस्थों में भी 100% FDI की अनुमति है?
हाँ, ब्रोकर, पुनर्बीमा ब्रोकर, बीमा सलाहकार, कॉर्पोरेट एजेंट, थर्ड-पार्टी प्रशासक, सर्वेक्षक और नुकसान आकलनकर्ता, प्रबंध महा एजेंट तथा बीमा रिपॉजिटरी — सभी के लिए ऑटोमैटिक रूट के तहत 100% FDI की अनुमति दी गई है।
राष्ट्र प्रेस
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