बांग्लादेश में खसरे का कहर: 10 और बच्चों की मौत, कुल मृतक 294; विशेषज्ञों ने माँगी पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी

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बांग्लादेश में खसरे का कहर: 10 और बच्चों की मौत, कुल मृतक 294; विशेषज्ञों ने माँगी पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी

सारांश

बांग्लादेश में खसरे का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा — 294 बच्चों की जान जा चुकी है और 40,000 से अधिक संदिग्ध मामले सामने आए हैं। जुलाई 2024 के बाद टीकाकरण तंत्र के ध्वस्त होने और यूनिसेफ के ज़रिए वैक्सीन खरीद बंद होने से यह संकट और गहरा गया है।

मुख्य बातें

बांग्लादेश में खसरे से कुल मृतकों की संख्या 294 हुई; 4 मई 2026 तक 10 और बच्चों की मौत।
DGHS के अनुसार कुल 5,313 पुष्ट मामले और 40,491 संदिग्ध मामले दर्ज।
बंदरबन जिले के अलीकादम उपज़िला में बच्चों का इलाज हर्बल दवाओं से हो रहा है, 5 बच्चों की मौत।
जुलाई 2024 के बाद वैक्सीन खरीद में रुकावट और सितंबर 2025 में यूनिसेफ के ज़रिए खरीद बंद होने से टीकाकरण दर गिरी।
WHO ने तत्काल कदम उठाने की अपील की; IEDCR सलाहकार मोहम्मद मुश्तुक हुसैन ने पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित करने की माँग की।

बांग्लादेश में खसरे और खसरे जैसे लक्षणों से 10 और बच्चों की मौत हो जाने के बाद कुल मृतकों की संख्या 294 तक पहुँच गई है। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) के आँकड़ों के हवाले से द डेली स्टार ने बताया कि 4 मई 2026 तक देशभर में 40,491 संदिग्ध मामले और 5,313 पुष्ट मामले दर्ज हो चुके हैं। यह प्रकोप उस देश में तेज़ी से फैल रहा है जहाँ टीकाकरण दर में भारी गिरावट और कमज़ोर स्वास्थ्य ढाँचा पहले से ही चिंता का विषय बना हुआ है।

मुख्य घटनाक्रम

DGHS के आँकड़ों के अनुसार, शनिवार से रविवार सुबह तक के 24 घंटों में खसरे से होने वाली मौतों की संख्या 50 तक पहुँच गई। इसी अवधि में 9 नए संदिग्ध मामले सामने आए, जिससे इस अवधि के कुल संदिग्ध 244 हो गए। साथ ही 95 नए पुष्ट मामले दर्ज किए गए और पिछले 24 घंटों में 1,166 नए संदिग्ध मामले जोड़े गए।

विभागीय स्तर पर देखें तो ढाका डिवीजन में चार, बारिशाल में दो, तथा चटगाँव, खुलना और सिलहट डिवीजन में एक-एक मौत दर्ज की गई।

दूरदराज़ इलाकों में हालात गंभीर

स्थानीय मीडिया के अनुसार, बंदरबन जिले के अलीकादम उपज़िला की कई पहाड़ी बस्तियों में खसरे जैसे लक्षण वाले बच्चों का इलाज स्थानीय नुस्खों और हर्बल दवाओं से किया जा रहा है। पिछले कुछ दिनों में इस इलाके के 10 से 15 गाँवों में खसरे जैसे लक्षणों से पाँच बच्चों की मौत हो गई और कई अन्य बच्चे भी संक्रमित हो गए हैं। आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की अनुपलब्धता इन दूरदराज़ क्षेत्रों में मृत्युदर को और बढ़ा रही है।

वैक्सीन की कमी और प्रशासनिक विफलता

'साइंस एडवाइजर' के हवाले से बताया गया है कि यह महामारी जुलाई 2024 के विरोध प्रदर्शनों के बाद वैक्सीन खरीद में आई

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि राजनीतिक अस्थिरता के सार्वजनिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दीर्घकालिक दुष्परिणामों की कड़वी मिसाल है। जुलाई 2024 के बाद यूनिसेफ जैसी सिद्ध खरीद प्रणाली को बंद कर ओपन टेंडर अपनाना एक ऐसा प्रशासनिक निर्णय था जिसकी कीमत अब सैकड़ों बच्चों की जान से चुकाई जा रही है। गौरतलब है कि कुपोषण और कमज़ोर स्वास्थ्य ढाँचा पहले से मौजूद था — नई सरकार की नीतिगत चूक ने उसे विस्फोटक बना दिया। जब तक बांग्लादेश सरकार इसे आधिकारिक पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित नहीं करती, अंतरराष्ट्रीय सहायता और समन्वित प्रतिक्रिया की गति उस स्तर तक नहीं पहुँचेगी जो इस प्रकोप को रोकने के लिए ज़रूरी है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांग्लादेश में खसरे से अब तक कितने बच्चों की मौत हुई है?
DGHS के आँकड़ों के अनुसार 4 मई 2026 तक बांग्लादेश में खसरे और खसरे जैसे लक्षणों से कुल 294 बच्चों की मौत हो चुकी है। पिछले 24 घंटों में 10 नई मौतें दर्ज की गईं और देशभर में 40,491 संदिग्ध मामले सामने आए हैं।
बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप इतना गंभीर क्यों हो गया?
'साइंस एडवाइजर' के अनुसार, जुलाई 2024 के विरोध प्रदर्शनों के बाद वैक्सीन खरीद में भारी रुकावट आई, जिससे टीकाकरण दर में गिरावट आई। सितंबर 2025 में अंतरिम सरकार ने यूनिसेफ के ज़रिए वैक्सीन खरीद बंद कर ओपन टेंडर प्रणाली अपना ली, जिससे आपूर्ति शृंखला और कमज़ोर हुई।
WHO ने बांग्लादेश के खसरा संकट पर क्या कहा है?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने पिछले महीने बांग्लादेश में खसरे के प्रकोप को नियंत्रित करने के लिए तत्काल कदम उठाने की अपील की थी। WHO ने चेतावनी दी कि यदि निगरानी, त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली और टीकाकरण कवरेज में सुधार नहीं हुआ तो संक्रमण और तेज़ी से फैल सकता है।
क्या बांग्लादेश में पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित की गई है?
अभी तक नहीं। इंस्टिट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी, डिज़ीज़ कंट्रोल एंड रिसर्च (IEDCR) के सलाहकार मोहम्मद मुश्तुक हुसैन ने सरकार से आधिकारिक रूप से पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित करने की माँग की है। उन्होंने कहा कि ज़मीनी हालात पहले से ही आपातकाल जैसे हैं।
बंदरबन जिले में खसरे की स्थिति क्या है?
स्थानीय मीडिया के अनुसार बंदरबन जिले के अलीकादम उपज़िला की पहाड़ी बस्तियों में बच्चों का इलाज हर्बल दवाओं और स्थानीय नुस्खों से हो रहा है। पिछले कुछ दिनों में 10 से 15 गाँवों में पाँच बच्चों की मौत हो चुकी है और कई अन्य संक्रमित हैं।
राष्ट्र प्रेस
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