कन्नूर: होंठ के घाव पर एनेस्थीसिया के बाद 18 माह के देवांश की मौत, डॉक्टर अंजलि पोडुवल पर केस दर्ज
सारांश
मुख्य बातें
केरल के कन्नूर में 18 महीने के मासूम देवांश शौर्या की मौत ने चिकित्सा जगत में गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 5 जुलाई 2026 को घर के बाहर खेलते समय गिरने से बच्चे के होंठ पर मामूली कट लगा था, जिसके उपचार के दौरान पयन्नूर स्थित बेबी मेमोरियल अस्पताल में एनेस्थीसिया दिए जाने के तुरंत बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई और शुक्रवार रात करीब 9 बजे उसने दम तोड़ दिया। परिवार ने मेडिकल लापरवाही का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।
घटनाक्रम: क्या हुआ उस दिन
परिवार के अनुसार, 5 जुलाई को खेल के दौरान गिरने से देवांश के होंठ पर चोट लगी। उसे तत्काल पयन्नूर के बेबी मेमोरियल अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने घाव पर टाँके लगाने के लिए एनेस्थीसिया देने का निर्णय किया। रिपोर्टों के अनुसार, एनेस्थीसिया दिए जाने के तुरंत बाद बच्चे को होश नहीं आया और उसकी स्थिति गंभीर हो गई।
इसके बाद बच्चे को बेहतर उपचार के लिए अस्पताल की कन्नूर यूनिट में स्थानांतरित किया गया, जहाँ वह वेंटिलेटर सपोर्ट पर रहा। पाँच दिन तक जीवन और मृत्यु के बीच झूलते रहने के बाद शुक्रवार रात उसकी मौत हो गई।
पुलिस कार्रवाई और दर्ज मामला
बच्चे के रिश्तेदार के. राजीव की शिकायत पर पयन्नूर पुलिस ने एनेस्थीसिया देने वाली डॉक्टर अंजलि पोडुवल के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 125 के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस फिलहाल मामले की जाँच कर रही है और आगे की कार्रवाई जाँच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।
अस्पताल की सफाई
बेबी मेमोरियल अस्पताल ने लापरवाही के सभी आरोपों को खारिज किया है। अस्पताल की ओर से जारी बयान में कहा गया कि एनेस्थीसिया के तुरंत बाद बच्चे को अचानक कार्डियक अरेस्ट हुआ, जो एक अत्यंत दुर्लभ चिकित्सीय स्थिति है। अस्पताल का दावा है कि सभी मानक चिकित्सा प्रोटोकॉल का पालन किया गया, तत्काल इमरजेंसी उपचार शुरू किया गया और बच्चे की जान बचाने की हर संभव कोशिश की गई।
अस्पताल ने यह भी स्पष्ट किया कि सही तरीके से एनेस्थीसिया दिए जाने पर भी दुर्लभ मामलों में जटिलताएँ उत्पन्न हो सकती हैं — हालाँकि परिवार इस स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं है।
आम जनता और चिकित्सा जगत पर असर
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब देश में छोटे बच्चों पर एनेस्थीसिया के उपयोग को लेकर चिकित्सा विशेषज्ञों के बीच पहले से ही बहस चल रही है। गौरतलब है कि शिशुओं और छोटे बच्चों में एनेस्थीसिया की प्रतिक्रिया वयस्कों से भिन्न हो सकती है, और ऐसे मामलों में पूर्व-जाँच की प्रक्रिया अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
इस मामले ने केरल में निजी अस्पतालों में उपचार प्रोटोकॉल और जवाबदेही के सवालों को फिर से केंद्र में ला दिया है। जाँच के नतीजे न केवल परिवार को न्याय दिलाने की दृष्टि से, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए भी अहम होंगे।