कन्नूर: एनेस्थीसिया के बाद 18 माह के देवांश की मौत, निजी अस्पताल के डॉक्टर पर BNS की धारा 125 के तहत केस
सारांश
मुख्य बातें
केरल के कन्नूर में एक निजी अस्पताल में 18 महीने के मासूम देवांश शौर्य की 11 जुलाई 2025 की रात मौत हो गई। 5 जुलाई को कटे हुए होंठ पर टांके लगाने के लिए एनेस्थीसिया दिए जाने के तुरंत बाद बच्चे की हालत गंभीर हो गई थी और वह पाँच दिनों तक बेहोश रहा। परिवार की शिकायत पर पुलिस ने संबंधित डॉक्टर के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 125 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है।
घटनाक्रम: कैसे हुई दुर्घटना
5 जुलाई को एरामम-कुटूर ग्राम पंचायत के मथामंगलम निवासी देवांश अपने घर के आँगन में खेलते समय गिर गया, जिससे उसके होंठ पर गहरा कट लग गया। माता-पिता उसे तत्काल एक निजी अस्पताल ले गए, जहाँ डॉक्टरों ने घाव पर टांके लगाने के लिए एनेस्थीसिया दिया। अस्पताल के अनुसार, एनेस्थीसिया दिए जाने के तुरंत बाद बच्चे को अचानक कार्डियक अरेस्ट हुआ और उसे तत्काल वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया।
प्रारंभिक उपचार के बाद अस्पताल ने देवांश को बेहतर क्रिटिकल केयर के लिए अपनी कन्नूर यूनिट में स्थानांतरित किया। पाँच दिनों तक संघर्ष के बाद शुक्रवार रात लगभग 9 बजे उसने दम तोड़ दिया।
परिवार की पीड़ा
देवांश अपने माता-पिता की शादी के 8 साल बाद पैदा हुई इकलौती संतान था। परिवार के लिए यह क्षति अकल्पनीय है। पीड़ित परिवार ने बच्चे की मौत के बाद स्थानीय पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई।
कानूनी कार्रवाई
परिवार की शिकायत के आधार पर पुलिस ने अस्पताल के संबंधित डॉक्टर के विरुद्ध BNS की धारा 125 के तहत मामला दर्ज किया है। यह धारा ऐसे कृत्यों से संबंधित है जो किसी व्यक्ति के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालते हैं। इस धारा के तहत दोषी पाए जाने पर अधिकतम तीन महीने की कैद का प्रावधान है। जाँच जारी है।
अस्पताल का पक्ष
अस्पताल प्रबंधन ने चिकित्सीय लापरवाही के आरोपों से स्पष्ट इनकार किया है। अस्पताल की ओर से जारी बयान में कहा गया कि एनेस्थीसिया की सही खुराक दी गई थी और उपचार के सभी स्थापित प्रोटोकॉल का पालन किया गया। अस्पताल ने यह भी कहा कि कभी-कभी सही चिकित्सीय देखभाल के बावजूद एनेस्थीसिया के बाद जटिलताएँ उत्पन्न हो सकती हैं और बच्चे की जान बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए गए।
आगे क्या होगा
पुलिस मामले की विस्तृत जाँच कर रही है। चिकित्सा विशेषज्ञों की राय और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मामले की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी। यह घटना केरल में निजी अस्पतालों में एनेस्थीसिया प्रशासन की सुरक्षा प्रक्रियाओं पर नए सिरे से सवाल खड़े करती है।