भुवन चंद्र खंडूरी के निधन पर पुत्री ऋतु खंडूरी भूषण बोलीं — 'पिता को खोया, परिवार के लिए दुख का समय'

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भुवन चंद्र खंडूरी के निधन पर पुत्री ऋतु खंडूरी भूषण बोलीं — 'पिता को खोया, परिवार के लिए दुख का समय'

सारांश

तीन युद्ध लड़ने वाले सैनिक से उत्तराखंड के दो बार मुख्यमंत्री बने मेजर जनरल (रिटायर्ड) भुवन चंद्र खंडूरी अब नहीं रहे। 50 दिन अस्पताल में रहने के बाद 19 मई को कार्डियक अरेस्ट ने उन्हें छीन लिया। पुत्री ऋतु खंडूरी भूषण की आँखें बोल रही थीं जो शब्द नहीं कह पाए।

मुख्य बातें

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल (रिटायर्ड) भुवन चंद्र खंडूरी का 19 मई 2025 को 91 वर्ष की आयु में देहरादून के मैक्स अस्पताल में निधन हुआ।
निधन का कारण कार्डियक अरेस्ट रहा; वे पिछले 50 दिनों से अस्पताल में भर्ती थे।
पुत्री व उत्तराखंड विधानसभा स्पीकर ऋतु खंडूरी भूषण ने कहा — 'मैंने अपने पिता को खोया, यह परिवार के लिए दुख का समय है।' खंडूरी ने तीन युद्ध लड़े और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में दो कार्यकाल ( 2007-2009 और 2011-2012 ) पूरे किए।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित राजनीतिक जगत ने गहरा शोक व्यक्त किया।

उत्तराखंड विधानसभा की स्पीकर ऋतु खंडूरी भूषण ने अपने पिता और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल (रिटायर्ड) भुवन चंद्र खंडूरी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। 19 मई 2025 को देहरादून के मैक्स अस्पताल में 91 वर्ष की आयु में कार्डियक अरेस्ट के कारण उनका निधन हो गया। ऋतु खंडूरी भूषण ने भावुक होते हुए कहा, 'मैंने अपने पिता को खोया है — यह परिवार के लिए बहुत दुख का समय है।'

बेटी की भावुक विदाई

देहरादून में मीडिया से बातचीत के दौरान ऋतु खंडूरी भूषण ने कहा कि इस वक्त बोलना उनके लिए कठिन हो रहा है। उन्होंने कहा, 'एक पिता के रूप में मैंने जो उनसे सीखा और देखा, वह अविस्मरणीय है। उन्होंने देश की सेवा में लगातार योगदान दिया। उन्होंने तीन युद्ध लड़े और बच्चों को वही संस्कार दिए कि देश के लिए जीना है और देश के लिए मरना है।'

उन्होंने बताया कि उनके पिता पिछले 50 दिनों से अस्पताल में भर्ती थे और हालत में सुधार हो रहा था। चिकित्सक भी उनके ठीक होने की प्रगति से आश्चर्यचकित थे। लेकिन 19 मई की सुबह अचानक कार्डियक अरेस्ट आया और उन्हें पुनर्जीवित नहीं किया जा सका।

सैनिक से मुख्यमंत्री तक का सफर

भुवन चंद्र खंडूरी भारतीय सेना से राजनीति में आए और अपनी सादगी, अनुशासन तथा ईमानदार छवि के लिए पहचाने जाते थे। वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उत्तराखंड में वरिष्ठतम नेताओं में से एक थे।

उन्होंने दो बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री का पद संभाला — पहला कार्यकाल 2007 से 2009 तक और दूसरा 2011 से 2012 तक। अपने कार्यकाल में उन्होंने भ्रष्टाचार के विरुद्ध कड़ा रुख अपनाया और पारदर्शी एवं अनुशासित प्रशासन की नींव रखी।

राजनीतिक जगत में शोक

उनके निधन की खबर से राजनीतिक और सामाजिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि देते हुए लिखा, 'खंडूरी जी ने भारतीय सेना में रहते हुए राष्ट्र सेवा, अनुशासन और समर्पण का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया। सैन्य जीवन से लेकर सार्वजनिक जीवन तक उनका व्यक्तित्व राष्ट्रहित और जनसेवा के प्रति समर्पित रहा।'

विरासत और स्मृति

गौरतलब है कि भुवन चंद्र खंडूरी उन विरले राजनेताओं में से थे जिन्होंने सेना की वर्दी उतारकर सार्वजनिक जीवन में भी वही अनुशासन और निष्ठा बनाए रखी। तीन युद्धों में भाग लेने वाले इस सैनिक-नेता की विरासत उत्तराखंड की राजनीति में लंबे समय तक याद की जाएगी। उनके परिवार, समर्थकों और पूरे राज्य के लिए यह एक अपूरणीय क्षति है।

संपादकीय दृष्टिकोण

सुविधा नहीं — और यही बात उन्हें समकालीन राजनीति में अलग करती थी। उत्तराखंड जैसे नवगठित राज्य में उन्होंने जो अनुशासित प्रशासन की परंपरा स्थापित करने की कोशिश की, वह आज भी मानक के रूप में उद्धृत होती है। उनके निधन के साथ भारतीय राजनीति में सैनिक-नेता की एक विशिष्ट शैली का अध्याय बंद होता है — ऐसे समय में जब राजनीतिक विमर्श तेजी से छवि-प्रबंधन की ओर झुक रहा है।
RashtraPress
19 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भुवन चंद्र खंडूरी का निधन कैसे हुआ?
मेजर जनरल (रिटायर्ड) भुवन चंद्र खंडूरी का 19 मई 2025 को देहरादून के मैक्स अस्पताल में कार्डियक अरेस्ट के कारण निधन हुआ। वे 91 वर्ष के थे और पिछले 50 दिनों से अस्पताल में भर्ती थे।
भुवन चंद्र खंडूरी कितनी बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे?
भुवन चंद्र खंडूरी दो बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे — पहला कार्यकाल 2007 से 2009 तक और दूसरा 2011 से 2012 तक। दोनों कार्यकालों में वे भ्रष्टाचार-विरोध और अनुशासित प्रशासन के लिए जाने गए।
ऋतु खंडूरी भूषण कौन हैं?
ऋतु खंडूरी भूषण उत्तराखंड विधानसभा की स्पीकर हैं और भुवन चंद्र खंडूरी की पुत्री हैं। उन्होंने अपने पिता के निधन पर देहरादून में मीडिया से बात करते हुए गहरा दुख व्यक्त किया।
भुवन चंद्र खंडूरी की सैन्य पृष्ठभूमि क्या थी?
भुवन चंद्र खंडूरी मेजर जनरल के पद से सेवानिवृत्त हुए थे और उन्होंने तीन युद्धों में भाग लिया था। सेना से राजनीति में आने के बाद भी उन्होंने अपनी सादगी और अनुशासन की छवि बनाए रखी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खंडूरी के निधन पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि खंडूरी जी ने भारतीय सेना में रहते हुए राष्ट्र सेवा, अनुशासन और समर्पण का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया और सैन्य जीवन से सार्वजनिक जीवन तक उनका व्यक्तित्व राष्ट्रहित के प्रति समर्पित रहा।
राष्ट्र प्रेस
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