अजीत सिंह हत्याकांड का आरोपी प्रदीप सिंह कबूतरा सुभासपा में शामिल, ओम प्रकाश राजभर ने दिलाई सदस्यता
सारांश
मुख्य बातें
लखनऊ के विभूतिखंड में 6 जनवरी 2021 को हुई ब्लॉक प्रमुख पति अजीत सिंह की हत्या के मामले में आरोपी प्रदीप सिंह कबूतरा ने 19 मई 2026 को सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) की सदस्यता ग्रहण कर ली। कैबिनेट मंत्री एवं सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर की उपस्थिति में यह शामिल होना हुआ, जिसने उत्तर प्रदेश की राजनीति में तीखी बहस छेड़ दी है।
मुख्य घटनाक्रम
इस अवसर पर 51 लोगों ने समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) छोड़कर सुभासपा की सदस्यता ली। संजीव सिंह बंटू भी इसी मौके पर पार्टी में शामिल हुए। राजभर ने बताया कि एक दिन पहले भी 600 लोग सपा छोड़कर सुभासपा में आए थे।
गौरतलब है कि प्रदीप सिंह कबूतरा पर आरोप है कि उसने अजीत सिंह हत्याकांड के शूटरों को मदद और शरण दी थी। लखनऊ पुलिस के दबाव के चलते उसने अप्रैल 2021 में आजमगढ़ में आत्मसमर्पण किया था। जेल से रिहाई के बाद अब वह सुभासपा में शामिल हो गया है।
आरोपी की आपराधिक पृष्ठभूमि
रिपोर्टों के अनुसार, प्रदीप सिंह कबूतरा के कासगंज जेल में बंद गैंगस्टर ध्रुव सिंह कुटू और लॉरेंस बिश्नोई गैंग के शार्पशूटर राजन जाट उर्फ कुणाल से कनेक्शन बताए गए हैं। यह वह पृष्ठभूमि है जिसके बावजूद उसे भाजपा की सहयोगी पार्टी सुभासपा ने अपने दामन में लिया है।
राजभर की सफाई और सपा पर हमला
ओम प्रकाश राजभर ने सपा के विरोध प्रदर्शन को खारिज करते हुए कहा कि जब चाहें, एक लाख महिलाओं को इकट्ठा कर सकते हैं। उन्होंने सपा नेता राजकुमार भाटी के ब्राह्मणों संबंधी बयान का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि सपा नेता जातियों को आपस में लड़ाने का काम करते हैं। राजभर ने कहा कि पार्टी के विचारों और नीतियों पर भरोसा करके लोग सुभासपा से जुड़ रहे हैं।
अजीत सिंह हत्याकांड की पृष्ठभूमि
6 जनवरी 2021 को लखनऊ के विभूतिखंड इलाके में ब्लॉक प्रमुख पति अजीत सिंह को गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी। यह मामला उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर चर्चा में आया था। इस हत्याकांड में शूटरों को सहयोग देने के आरोप में प्रदीप सिंह कबूतरा का नाम सामने आया था।
राजनीतिक विवाद
आलोचकों का कहना है कि एक गंभीर आपराधिक मामले के आरोपी को पार्टी में शामिल करना सत्तारूढ़ गठबंधन की जवाबदेही पर सवाल खड़े करता है। सुभासपा उत्तर प्रदेश सरकार में भाजपा की सहयोगी है और राजभर स्वयं कैबिनेट मंत्री हैं। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष पहले से ही सत्तारूढ़ दल पर आपराधिक तत्वों को संरक्षण देने के आरोप लगाता रहा है।