मध्य प्रदेश में जनजातीय समाज मुख्यधारा से जुड़ रहा: जनजातीय मंत्री विजय शाह का भोपाल कार्यशाला में बड़ा बयान
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह ने 19 मई 2026 को भोपाल स्थित आदि भवन में आयोजित कार्यशाला में कहा कि राज्य के जनजातीय वर्ग के जीवन में ऐतिहासिक बदलाव आ रहा है और यह समाज अब विकास की मुख्यधारा से तेज़ी से जुड़ रहा है। जनजातीय गरिमा उत्सव के तहत 'तकनीकी आधारित सतत जनजाति विकास अवधारणा' पर आयोजित इस कार्यशाला में उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का विस्तृत ब्यौरा दिया।
मुख्य घटनाक्रम
मंत्री विजय शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनजातीय समाज की पीड़ा को गहराई से समझा और उनकी विकास प्रक्रिया में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी नीतियाँ बनाई हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री जनमन योजना और धरती आबा ग्राम उत्कर्ष जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन योजनाओं से जनजातीय समाज के उत्थान के लिए ठोस कार्य हो रहे हैं।
शाह ने बताया कि वे वर्ष 1990 से निरंतर जनजातीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और इस दौरान उन्होंने इस समाज के साथ मिलकर काम किया है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों से आग्रह किया कि वे गाँवों और वनवासी अंचलों में जाएँ, लोगों के जीवन को नज़दीक से देखें और प्रत्यक्ष अनुभव के आधार पर नीतियाँ लागू करें।
सरकारी योजनाओं की पहुँच
मंत्री शाह ने बताया कि जनजातीय वर्ग तक सरकारी योजनाओं की पहुँच सुनिश्चित करने के लिए 'जन भागीदारी — सबसे दूर, सबसे पहले' अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के अंतर्गत शिविरों के माध्यम से 18 विभागों की 25 योजनाओं का लाभ जनजातीय ग्रामीणों तक सीधे पहुँचाया जाएगा।
यह ऐसे समय में आया है जब मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार वनवासी अंचलों में बुनियादी ढाँचे और सामाजिक सेवाओं के विस्तार पर विशेष ज़ोर दे रही है। शाह ने कहा कि 1990 के दशक की तुलना में आज जनजातीय समाज की स्थिति में व्यापक सुधार आया है।
शुद्ध पेयजल और बालिका शिक्षा पर पहल
मंत्री शाह ने अपने विधानसभा क्षेत्र में की गई व्यक्तिगत पहलों का भी ज़िक्र किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने आंगनवाड़ी केंद्रों में 50 हज़ार पानी की बोतलें वितरित की हैं और पहली से 12वीं कक्षा तक के 45 हज़ार बच्चों को पेयजल के लिए बोतलें प्रदान की हैं। इसके अलावा 150 ग्राम पंचायतों में वॉटर कूलर और आरओ सिस्टम लगाए गए हैं, जिससे हर गाँव और स्कूल में शुद्ध पेयजल सुलभ होगा।
बालिका शिक्षा के संदर्भ में उन्होंने बताया कि जनजातीय अंचल की बच्चियाँ सुविधाओं के अभाव में उच्च शिक्षा छोड़ देती थीं। प्रायोगिक तौर पर अपने क्षेत्र में 4 बसें संचालित की गईं, जिसके परिणामस्वरूप कॉलेज जाने वाली बालिकाओं की संख्या 30 प्रतिशत से बढ़कर 80 प्रतिशत हो गई। उन्होंने इस मॉडल को अन्य क्षेत्रों में भी विस्तार देने की वकालत की।
तकनीक और विशेषज्ञों का योगदान
कार्यशाला में आयुक्त जनजातीय क्षेत्र विकास डॉ. सतेंद्र सिंह ने विभागीय योजनाओं की जानकारी दी। मैनिट के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संयम शुक्ला ने आजीविका और रोज़गार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अनुप्रयोग पर संबोधन दिया। आईआईएसईआर के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. कुमार गौरव ने सतत जनजातीय विकास में जीआईएस और उपग्रह सुदूर संवेदन की भूमिका पर विचार रखे।
आगे की राह
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश देश के उन राज्यों में है जहाँ जनजातीय जनसंख्या का अनुपात सर्वाधिक है। इस कार्यशाला में उभरे तकनीकी और नीतिगत सुझाव राज्य की जनजातीय विकास रणनीति को नई दिशा देने में सहायक हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बालिका शिक्षा बस सेवा जैसे स्थानीय प्रयोगों को यदि नीतिगत स्तर पर अपनाया जाए तो इसका व्यापक असर पड़ सकता है।