उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी का 91 वर्ष की आयु में निधन, सीएम धामी ने दी श्रद्धांजलि

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उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी का 91 वर्ष की आयु में निधन, सीएम धामी ने दी श्रद्धांजलि

सारांश

सेना से राजनीति तक का सफर तय करने वाले मेजर जनरल (से. नि.) भुवन चंद्र खंडूरी अब नहीं रहे। 91 वर्ष की आयु में देहरादून में निधन। दो बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे खंडूरी अपनी ईमानदारी और अनुशासित प्रशासन के लिए जाने जाते थे। राज्य की राजनीति में उनकी विरासत अमिट रहेगी।

मुख्य बातें

नि.) भुवन चंद्र खंडूरी का 19 मई को देहरादून के मैक्स अस्पताल में निधन हो गया।
वह 91 वर्ष के थे और लंबे समय से बीमार चल रहे थे।
खंडूरी ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में दो कार्यकाल संभाले — 2007–2009 और 2011–2012 ।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने फेसबुक पोस्ट के माध्यम से शोक व्यक्त करते हुए उनके निधन को राष्ट्रीय राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति बताया।
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने एक्स पर पोस्ट कर उन्हें राष्ट्रसेवा और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक बताया।

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खंडूरी का मंगलवार, 19 मई को निधन हो गया। देहरादून के मैक्स अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। वह 91 वर्ष के थे और लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उनके जाने से राजनीतिक और सामाजिक जगत में शोक की गहरी लहर दौड़ गई है।

सैनिक से मुख्यमंत्री तक का सफर

भुवन चंद्र खंडूरी उन विरले नेताओं में से थे जिन्होंने भारतीय सेना में मेजर जनरल के पद तक सेवा की और फिर सक्रिय राजनीति में कदम रखा। सेना में अर्जित अनुशासन और राष्ट्रसेवा की भावना को उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में भी बनाए रखा। वह अपनी सादगी, स्पष्टवादिता और भ्रष्टाचार के प्रति शून्य-सहिष्णुता की नीति के लिए विशेष रूप से जाने जाते थे।

दो बार संभाला मुख्यमंत्री पद

खंडूरी ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में दो कार्यकाल पूरे किए। उनका पहला कार्यकाल 2007 से 2009 तक और दूसरा कार्यकाल 2011 से 2012 तक रहा। दोनों कार्यकालों में उन्होंने भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त प्रशासनिक रुख अपनाया। उनके नेतृत्व में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत संरचना के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हुए, जो आज भी विकास की मजबूत नींव के रूप में देखे जाते हैं। विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों के विकास के प्रति उनका समर्पण अविस्मरणीय रहा।

मुख्यमंत्री धामी की श्रद्धांजलि

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खंडूरी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। एक फेसबुक पोस्ट में धामी ने लिखा, 'उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी (सेवानिवृत्त) के निधन का दुःखद समाचार प्राप्त हुआ। खंडूरी जी ने भारतीय सेना में रहते हुए राष्ट्र सेवा, अनुशासन और समर्पण का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया।' उन्होंने आगे कहा, 'राजनीतिक जीवन में उन्होंने उत्तराखंड के विकास, सुशासन, पारदर्शिता और ईमानदार कार्यशैली की मजबूत पहचान बनाई। उनका निधन उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति है।'

कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या की प्रतिक्रिया

धामी सरकार की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, 'हम सभी के लिए यह अत्यंत दुःखद और अपूरणीय क्षति है कि उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री, प्रखर राष्ट्रभक्त एवं आदर्श जनसेवक श्रद्धेय मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी (से. नि.) अब हमारे बीच नहीं रहे।' उन्होंने कहा कि एक वीर सैनिक से लेकर मुख्यमंत्री पद तक की उनकी यात्रा राष्ट्रसेवा, अनुशासन, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा का अनुपम उदाहरण रही। आर्या ने यह भी कहा कि खंडूरी केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि सेवा, त्याग और राष्ट्रनिष्ठा की जीवंत प्रेरणा थे।

राजनीतिक विरासत और आगे का शोक

गौरतलब है कि खंडूरी उन नेताओं में गिने जाते थे जिन्होंने सांसद, विधायक और मुख्यमंत्री — तीनों भूमिकाओं में जनहित को सर्वोपरि रखा। उनकी सादगी और दृढ़ प्रशासनिक क्षमता ने उन्हें दलीय सीमाओं से परे भी सम्मान दिलाया। उनके निधन के साथ उत्तराखंड ने एक ऐसे नेता को खो दिया है जो राज्य के निर्माण काल से ही उसकी राजनीति का अभिन्न हिस्सा रहे। राज्य में शोक की औपचारिक घोषणा और अंतिम संस्कार की व्यवस्था के बारे में अधिकारिक जानकारी की प्रतीक्षा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो दर्शाता है कि राज्य की राजनीति में स्थिरता की चुनौतियाँ उनके कार्यकाल में भी बनी रहीं। उनकी विरासत का सही मूल्यांकन इस बात से होगा कि उनके द्वारा शुरू की गई पारदर्शी प्रशासन की परंपरा को उत्तराखंड की भावी सरकारें किस हद तक आगे ले जाती हैं।
RashtraPress
19 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भुवन चंद्र खंडूरी कौन थे?
भुवन चंद्र खंडूरी उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता थे। वह भारतीय सेना में मेजर जनरल के पद तक पहुँचे और सेवानिवृत्ति के बाद राजनीति में आए।
भुवन चंद्र खंडूरी का निधन कब और कहाँ हुआ?
उनका निधन 19 मई को देहरादून के मैक्स अस्पताल में हुआ। वह 91 वर्ष के थे और लंबे समय से बीमार चल रहे थे।
खंडूरी ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में कितने कार्यकाल पूरे किए?
उन्होंने दो कार्यकाल पूरे किए — पहला 2007 से 2009 तक और दूसरा 2011 से 2012 तक। दोनों कार्यकालों में वह भ्रष्टाचार विरोधी और पारदर्शी प्रशासन के लिए जाने गए।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खंडूरी के निधन पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री धामी ने फेसबुक पोस्ट के जरिए शोक व्यक्त करते हुए खंडूरी के निधन को उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति बताया। उन्होंने खंडूरी को राष्ट्रसेवा, अनुशासन और समर्पण का अद्वितीय उदाहरण कहा।
खंडूरी की राजनीतिक विरासत क्या है?
खंडूरी ने सांसद, विधायक और मुख्यमंत्री के रूप में जनहित को सर्वोपरि रखा। उनके नेतृत्व में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्वतीय क्षेत्रों के विकास में उल्लेखनीय कार्य हुए, जो आज भी उत्तराखंड की विकास यात्रा की नींव माने जाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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