11 जुलाई 2026
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सीबीआई जांच में सहयोग करें ममता और अभिषेक, अदालत के आदेश सबके लिए बाध्यकारी: दिलीप घोष

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सीबीआई जांच में सहयोग करें ममता और अभिषेक, अदालत के आदेश सबके लिए बाध्यकारी: दिलीप घोष

सारांश

पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने साफ कहा — जो अदालत की शरण लें, वे उसके आदेश भी मानें। ममता और अभिषेक बनर्जी पर सीबीआई-ईडी जांच में सहयोग न करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने TMC शासनकाल में सिंडिकेट राज और कानून-व्यवस्था की विफलता को भी कठघरे में खड़ा किया।

मुख्य बातें

मंत्री दिलीप घोष ने 11 जुलाई को कहा कि अदालत के आदेश सभी के लिए बाध्यकारी हैं, चाहे वे किसी भी दल के हों।
ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी पर सीबीआई व ईडी की जांच जारी है; दोनों ने पूर्व में अदालत से कानूनी सुरक्षा माँगी थी।
घोष ने TMC शासनकाल में सिंडिकेट सिस्टम , जबरन दखलंदाजी और जमीन-विवादों के कारण उद्योगों के पलायन का आरोप लगाया।
उन्होंने दावा किया कि नई सरकार के बाद कानून-व्यवस्था में सुधार हुआ है और निवेश का माहौल बेहतर हो रहा है।
ममता के हालिया बयानों को घोष ने 'सहानुभूति हासिल करने का प्रयास' करार दिया।

पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री दिलीप घोष ने शनिवार, 11 जुलाई को कोलकाता में पत्रकारों से बातचीत में तृणमूल कांग्रेस (TMC), पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और सांसद अभिषेक बनर्जी पर सीधा हमला बोला। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि न्यायालय के आदेशों का पालन करना देश के हर नागरिक के लिए अनिवार्य है — चाहे वह किसी भी राजनीतिक दल से क्यों न हो।

अदालत के निर्देशों पर घोष का रुख

घोष ने कहा कि अभिषेक बनर्जी और ममता बनर्जी के विरुद्ध केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच के दौरान दोनों नेताओं ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और कानूनी संरक्षण माँगा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब खुद जांच से बचने के लिए न्यायालय की शरण ली गई, तो अब उसी अदालत के जांच में सहयोग सुनिश्चित करने के निर्देशों का विरोध क्यों किया जा रहा है।

घोष के अनुसार, 'जरूरत पड़ने पर अदालत का सहारा लेना और बाद में उसके आदेशों की अनदेखी करना — यह दोहरा रवैया संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा के विरुद्ध है।'

पश्चिम बंगाल में औद्योगीकरण पर आरोप

मंत्री ने दावा किया कि पूर्व TMC शासनकाल में राज्य में उद्योग स्थापित करने की कई कोशिशें हुईं, परंतु सिंडिकेट सिस्टम, जबरन दखलंदाजी और जमीन-विवादों के चलते अनेक उद्योगों को अपना काम बंद करना पड़ा। उन्होंने कहा कि नई सरकार के आने के बाद कानून-व्यवस्था में सुधार हुआ है और उद्योगपतियों को बेहतर कारोबारी माहौल देने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं, जिससे निवेश की संभावनाएँ बढ़ रही हैं।

ममता बनर्जी के बयानों पर पलटवार

पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के हालिया बयानों को घोष ने 'केवल भावनात्मक माहौल बनाने और सहानुभूति हासिल करने का प्रयास' करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि TMC के शासनकाल में हत्या, उत्पीड़न, सिंडिकेट संचालन और महिलाओं के खिलाफ अपराध जैसी घटनाएँ सामने आईं। साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष को अपनी बात रखने से नहीं रोका जा रहा है।

संवैधानिक संस्थाओं के सम्मान पर जोर

घोष ने अपनी बात दोहराते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति जांच एजेंसियों की कार्रवाई के समय न्यायालय से राहत माँग सकता है, तो उसे अदालत के निर्देशों का सम्मान करते हुए जांच में सहयोग भी करना चाहिए। उनके अनुसार, कानून-व्यवस्था बनाए रखना और संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है — राजनीतिक पद या दल से परे।

आगे क्या होगा

सीबीआई और ईडी की जांच में TMC नेताओं की भूमिका को लेकर राजनीतिक तनाव जारी है। अदालत के निर्देशों के परिप्रेक्ष्य में आने वाले हफ्तों में यह मामला और अधिक कानूनी पेचीदगियाँ ले सकता है, जिस पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका राजनीतिक समय उतना ही महत्वपूर्ण है जितना इसका सार। पश्चिम बंगाल में सत्ता-परिवर्तन के बाद केंद्रीय एजेंसियों की सक्रियता को विपक्ष लगातार राजनीतिक प्रतिशोध बताता रहा है — और यह बहस अदालतों में भी जारी है। 'अदालत की शरण लो, फिर उसके आदेश भी मानो' — यह तर्क तार्किक है, परंतु यह नहीं भूलना चाहिए कि न्यायालय ने ही कई मामलों में जांच एजेंसियों के अधिकार-क्षेत्र पर सवाल उठाए हैं। असली जवाबदेही तब सिद्ध होगी जब जांच के नतीजे अदालत में टिकेंगे — न कि केवल प्रेस वार्ताओं में।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिलीप घोष ने ममता और अभिषेक बनर्जी के बारे में क्या कहा?
मंत्री दिलीप घोष ने कहा कि ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी को सीबीआई व ईडी जांच में सहयोग करना चाहिए क्योंकि अदालत के आदेश सभी के लिए बाध्यकारी हैं। उन्होंने तर्क दिया कि जब दोनों नेताओं ने खुद जांच से बचने के लिए अदालत का सहारा लिया, तो अब उसी अदालत के निर्देशों का विरोध उचित नहीं है।
अभिषेक बनर्जी और ममता बनर्जी पर कौन-सी जांच चल रही है?
दोनों नेताओं के विरुद्ध केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच चल रही है। कथित तौर पर जांच से बचने के लिए दोनों ने अदालत से कानूनी सुरक्षा माँगी थी, जिस पर अदालत ने जांच में सहयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
पश्चिम बंगाल में औद्योगीकरण पर दिलीप घोष ने क्या आरोप लगाए?
घोष ने दावा किया कि TMC शासनकाल में सिंडिकेट सिस्टम, जबरन दखलंदाजी और जमीन-विवादों के कारण कई उद्योगों को राज्य से बाहर जाना पड़ा। उन्होंने कहा कि नई सरकार के बाद कारोबारी माहौल में सुधार हो रहा है और निवेश की संभावनाएँ बढ़ रही हैं।
ममता बनर्जी के हालिया बयानों पर घोष की क्या प्रतिक्रिया रही?
घोष ने ममता बनर्जी के हालिया बयानों को 'भावनात्मक माहौल बनाने और सहानुभूति हासिल करने का प्रयास' बताया। उन्होंने TMC शासनकाल में हत्या, उत्पीड़न और महिलाओं के खिलाफ अपराध जैसी घटनाओं का हवाला देते हुए उनके दावों को खारिज किया।
क्या पश्चिम बंगाल में विपक्ष पर कोई रोक है?
दिलीप घोष ने स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष को अपनी बात रखने से नहीं रोका जा रहा है और सभी को अपनी राय व्यक्त करने का अधिकार है। उन्होंने संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करने की अपील की।
राष्ट्र प्रेस
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