क्या एसआईआर का विरोध करना संविधान के खिलाफ है? : दिलीप घोष
सारांश
Key Takeaways
- दिलीप घोष का आरोप: ममता सरकार संविधान का उल्लंघन कर रही है।
- एसआईआर प्रक्रिया वोटर लिस्ट को दुरुस्त करने में मददगार है।
- बंगाल में राजनीतिक हिंसा बढ़ रही है।
- हिंदुओं पर अत्याचार की घटनाएँ बढ़ीं हैं।
- चुनाव आयोग को स्थिति पर ध्यान देना चाहिए।
कोलकाता, २५ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल के भाजपा नेता दिलीप घोष ने एसआईआर के मुद्दे पर ममता सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा कि एसआईआर के तहत वोटर लिस्ट को सही किया जा रहा है। लेकिन, राज्य सरकार एसआईआर का विरोध कर संविधान के खिलाफ कार्य कर रही है।
राष्ट्र प्रेस से बातचीत में भाजपा नेता दिलीप घोष ने बताया कि बंगाल में एसआईआर शुरू होने के पहले ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने डीएम, एसडीओ, और बीडीओ को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि एक भी नाम हटा नहीं होना चाहिए। इसका मतलब यह है कि जो नकली नाम जोड़े गए थे, वे वैसी ही रहेंगे। उनके भतीजे ने भी कहा था कि चाहे कुछ भी हो जाए, प्रक्रिया उनके अपने तरीके से चलनी चाहिए। आज भी वे सीधे धमकी दे रहे हैं। जो बीएलओ बूथ स्तर पर यह कार्य कर रहे हैं, उनके खिलाफ रातों-रात यूनियन बनाई जा रही है और विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। यह देश और संविधान के खिलाफ है।
चुनाव आयोग के अधिकारियों पर हुए हमलों पर दिलीप घोष ने कहा कि ममता राज में बंगाली खुद सुरक्षित नहीं हैं और पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी एक दिन भी सत्ता में रहने लायक नहीं है। हमने पहले ही यह सब सहा है। २५० से अधिक लोगों की राजनीतिक हत्या हो चुकी है। चुनाव से पहले ही झड़पें शुरू हो गई हैं। उनके विधायक और नेता सीधे चुनाव आयोग के दफ्तरों में अराजकता फैला रहे हैं। चुनाव आयोग को इस पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।
भाजपा नेता दिलीप घोष ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में बंगाल की स्थिति ऐसा है कि बंगाल और बांग्लादेश में कोई अंतर नहीं बचा है। हिंदुओं पर अत्याचार हो रहे हैं। यहां गांवों और जिलों में हिंदुओं पर हमले हो रहे हैं, पूजा की अनुमति नहीं दी जा रही है। सरस्वती पूजा में हंगामा किया जा रहा है और दुर्गा पूजा के लिए कोर्ट से अनुमति लेनी पड़ती है। बांग्लादेश में भी हिंदुओं को डराया जा रहा है और उनकी जान खतरे में है।
भाजपा सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो ने एसआईआर का उल्लेख करते हुए कहा कि एसआईआर बंगाल में नहीं हो रहा है, जबकि बिहार में पहले ही पूरा हो चुका है और अन्य राज्यों में भी यह प्रक्रिया चल रही है। बंगाल की सरकार चुनाव आयोग को सहयोग नहीं कर रही है। बंगाल सरकार बांग्लादेशी घुसपैठियों के नाम वोटर लिस्ट में रखना चाहती है। पहले इसी के सहारे उन्होंने चुनाव जीते हैं। एसआईआर के जरिए वोटर लिस्ट से फर्जी मतदाताओं को हटाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी शुरू से ही एसआईआर का विरोध कर रही हैं। हालांकि, जब एसआईआर आया तो उन्होंने और उनकी पार्टी के नेताओं ने फॉर्म भरा, लेकिन अब लोगों को गुमराह कर रही हैं। एसआईआर वोटर लिस्ट को दुरुस्त करने की एक सामान्य प्रक्रिया है।