दिलीप घोष का ममता पर तीखा प्रहार: 'संकट में कोर्ट जाती हैं, पर फैसले नहीं मानतीं'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता दिलीप घोष ने 17 जून 2026 को कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी द्वारा हाई कोर्ट में याचिका दायर किए जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। घोष ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी संकट के समय न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाती हैं, लेकिन जब अदालत उनके विरुद्ध फैसला सुनाती है तो वे उसे स्वीकार करने से इनकार कर देती हैं।
चुनाव परिणाम और पुनर्मतगणना की मांग पर निशाना
घोष ने कहा कि जो उम्मीदवार 15,000 से अधिक मतों के अंतर से चुनाव हार चुके हैं, वे अब पुनर्मतगणना और पुनर्मतदान की मांग कर रहे हैं। उन्होंने इसे 'पुरानी आदत' बताते हुए कहा कि चुनाव परिणाम स्पष्ट हो चुके हैं और इस तरह की अपीलों से कुछ भी बदलने वाला नहीं है।
घोष ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि विपक्ष अभी भी यह मानने को तैयार नहीं है कि चुनाव समाप्त हो चुका है और उन्हें हार स्वीकार करनी चाहिए।
अभिषेक बनर्जी और जाँच एजेंसियों पर टिप्पणी
TMC नेता अभिषेक बनर्जी के प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आपराधिक जाँच विभाग (CID) के समक्ष पेश होने के मुद्दे पर दिलीप घोष ने कहा कि उनके खिलाफ पहले से ही कई शिकायतें दर्ज हैं और अब नई शिकायतें भी सामने आ रही हैं। उन्होंने दावा किया कि पहले लोग भय के कारण आगे नहीं आते थे, परंतु अब समय आ गया है कि इन मामलों में जवाबदेही तय हो।
घोष ने यह भी कहा कि जब किसी नेता के खिलाफ बार-बार शिकायतें आती हैं तो जाँच अनिवार्य हो जाती है — चाहे वह पार्टी के भीतर का नेता हो या बाहर का।
ओवैसी के बयान पर पलटवार
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया था कि मुस्लिम समुदाय के साथ 'धोखा' हुआ, जिसके कारण ममता बनर्जी की हार हुई। इस पर घोष ने पलटवार करते हुए कहा कि यदि बंगाल के मुसलमानों ने TMC को वोट नहीं दिया, तो ओवैसी स्वयं भी क्यों हारे? उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी का राजनीतिक अध्याय समाप्त हो चुका है और अब सवाल यह है कि ओवैसी का भविष्य क्या होगा।
राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद का सियासी माहौल गर्म है और विभिन्न दलों के बीच कानूनी और राजनीतिक लड़ाई जारी है। गौरतलब है कि ममता बनर्जी और BJP के बीच टकराव पिछले कई वर्षों से चला आ रहा है और हर चुनाव के बाद यह विवाद न्यायालय तक पहुँचता रहा है। आने वाले दिनों में हाई कोर्ट की सुनवाई और ED-CID की जाँच की दिशा ही यह तय करेगी कि पश्चिम बंगाल की राजनीति किस ओर मुड़ती है।