बांग्लादेश में खसरे का कहर: 4 नई मौतें, 15 मार्च से कुल मृतक संख्या 605 पहुँची
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के आँकड़ों के अनुसार, 5 जून 2026 को गुरुवार सुबह तक के 24 घंटों में खसरा और खसरे जैसे लक्षणों से चार और लोगों की मौत हो गई, जिससे 15 मार्च 2026 से अब तक पुष्टि और संदिग्ध मौतों की कुल संख्या बढ़कर 605 हो गई है। इनमें से 91 मौतें खसरे से पुष्टि की गई हैं, जबकि 514 मौतें संदिग्ध श्रेणी में दर्ज हैं।
ताज़ा आँकड़े और प्रकोप की स्थिति
डीजीएचएस के अनुसार, पिछले 24 घंटों में 1,136 नए संदिग्ध मामले सामने आए, जिससे कुल संदिग्ध मामलों की संख्या 75,708 हो गई। इसी अवधि में 69 नए पुष्ट मामले भी दर्ज किए गए, और कुल पुष्ट मामलों की संख्या 9,260 पहुँच गई। चार नए मृतकों में से एक की मौत खसरे से पुष्टि हुई, जबकि शेष तीन की मौत खसरे जैसे लक्षणों के साथ हुई।
यह ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश के डेली स्टार अखबार के एक संपादकीय में देश में खसरा संक्रमण की चिंताजनक वृद्धि और बच्चों में बढ़ती मृत्यु दर पर गहरी चिंता जताई गई है। संपादकीय में यह भी रेखांकित किया गया कि इस महामारी ने देशभर में स्वास्थ्य सुविधाओं — विशेष रूप से बाल चिकित्सा आईसीयू, आइसोलेशन वार्ड, वेंटिलेटरी देखभाल और संक्रमण नियंत्रण प्रणालियों — पर भारी दबाव डाला है।
राजनीतिक विवाद और जवाबदेही की माँग
इस स्वास्थ्य संकट ने बांग्लादेश में तीखी राजनीतिक बहस छेड़ दी है। अवामी लीग ने खसरे के प्रकोप को 'प्राकृतिक आपदा' नहीं, बल्कि 'शासन की मानव निर्मित विफलता' करार दिया है। पार्टी का आरोप है कि यह संकट पूर्व मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के कार्यकाल में शुरू हुआ और सत्तारूढ़ बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (BNP) के नेतृत्व वाली सरकार के तहत भी जारी है।
अवामी लीग के अनुसार, सितंबर 2025 में अंतरिम शासन के दौरान अधिकारियों ने कथित तौर पर संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) के माध्यम से स्थापित विश्वसनीय वैक्सीन खरीद प्रणाली को छोड़ दिया और यूनिसेफ की बार-बार की चेतावनियों — जिनमें कई औपचारिक पत्र और उच्च स्तरीय बैठकें शामिल थीं — के बावजूद एक 'कठिन' खुली निविदा प्रक्रिया अपनाई। पार्टी के अनुसार, इस निर्णय से लाखों बच्चों, विशेषकर पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों में, प्रतिरक्षा का बड़ा अंतर पैदा हो गया।
अवामी लीग ने कहा, "स्वतंत्र जाँचकर्ताओं ने इसे प्रशासनिक अहंकार और अक्षमता के कारण रचा गया 'मानव निर्मित नरसंहार' बताया है।"
सरकार की प्रतिक्रिया पर सवाल
अवामी लीग ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान और बीएनपी सरकार ने फरवरी 2026 में उभरते संकट की पूरी जानकारी के साथ पदभार संभाला था, लेकिन पिछले चार महीनों में प्रतिक्रिया चिंताजनक रूप से अपर्याप्त रही है।
गौरतलब है कि बांग्लादेश में यह प्रकोप ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में टीकाकरण अभियानों की निरंतरता पहले से ही चुनौतीपूर्ण रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि वैक्सीन खरीद प्रक्रिया में किसी भी व्यवधान के परिणाम बच्चों के लिए घातक हो सकते हैं।
तत्काल माँगें और आगे की राह
अवामी लीग ने बांग्लादेश सरकार से स्पष्ट समयसीमा, लक्ष्य और दैनिक सार्वजनिक रिपोर्टिंग के साथ राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित करने का आग्रह किया है। पार्टी ने त्वरित आपातकालीन टीकाकरण अभियान, पूर्ण पारदर्शिता और अंतरराष्ट्रीय निगरानी के साथ उपचार की माँग भी की है। साथ ही, अंतरिम सरकार के कार्यकाल में हुई खरीद संबंधी विफलताओं की स्वतंत्र और समयबद्ध जाँच तथा दोषियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने का भी आह्वान किया गया है।
जब तक बांग्लादेश सरकार ठोस और पारदर्शी कदम नहीं उठाती, मृतकों की बढ़ती संख्या और स्वास्थ्य तंत्र पर दबाव इस संकट को और गहरा करता रहेगा।