दिलीप घोष का ममता पर तंज: 'इंडिया' गठबंधन बैठक में शामिल होना 'मजबूरी', TMC विसर्जन की राह पर
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री दिलीप घोष ने 8 जून 2026 को न्यूटाउन में 'इंडिया' गठबंधन की आगामी बैठक को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला और कहा कि वे 'मजबूरी में' इस बैठक में जा रही हैं। घोष ने सवाल उठाया कि जब गठबंधन में अब कुछ बचा ही नहीं, तो इसका क्या औचित्य है।
मुख्य बयान: 'मजबूरी में जा रही हैं ममता'
घोष ने कहा, 'ममता बनर्जी पहले कभी इसमें शामिल नहीं होती थीं, लेकिन अब मजबूरी में जा रही हैं।' उन्होंने यह भी पूछा कि जिनके साथ खुद की पार्टी के सांसद और विधायक नहीं हैं, वे दूसरी पार्टी के साथ जाकर क्या हासिल करेंगी। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर अंदरूनी कलह की खबरें सामने आ रही हैं।
केजरीवाल-ममता बैठक पर सवाल
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल तथा पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच हुई बैठक पर घोष ने तंज कसते हुए कहा, 'ममता बनर्जी दिल्ली में केजरीवाल की क्या मदद करेंगी? और केजरीवाल बंगाल में ममता बनर्जी की क्या मदद करेंगे?' उन्होंने यह भी जोड़ा कि देखना होगा कि 'इंडिया' गठबंधन में वास्तव में कितने दल सक्रिय रूप से बचे हैं।
TMC के भीतर बिखराव पर निशाना
तृणमूल कांग्रेस के एक और गुट बनने की चर्चाओं पर घोष ने कहा कि हालिया बैठक में न कोई विधायक आया और न ही कोई सांसद। उन्होंने कहा, 'किसी को नहीं पता कि पार्षद कहाँ हैं — वे गायब हैं, दफ्तर नहीं आते।' घोष ने दावा किया कि TMC 'सत्ता से हटते ही पूरी तरह खत्म हो गई है' और 'अब जनता के जनादेश को मान लेना चाहिए।' गौरतलब है कि यह बयान बंगाल की राजनीतिक उथल-पुथल के बीच आया है।
बंगाल में निवेश और अमूल प्लांट
घोष ने बंगाल में अमूल के प्लांट स्थापना की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अमूल के पास लंबे समय से अपनी जमीन है और इसी हफ्ते भूमि पूजन का कार्यक्रम निर्धारित है। उन्होंने बताया कि कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय कंपनियाँ, जिनकी जमीन बेकार पड़ी थी, अब परियोजनाएँ विकसित करने के लिए आगे आ रही हैं और बड़े पैमाने पर निवेश की संभावना बन रही है।
आगे की राजनीतिक तस्वीर
'इंडिया' गठबंधन की एकजुटता पर उठते सवालों और TMC के आंतरिक संकट के बीच घोष के ये बयान बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ सकते हैं। आने वाले हफ्तों में गठबंधन की बैठक और उसके नतीजे यह तय करेंगे कि विपक्षी एकता कितनी ठोस है।