दिलीप घोष का तंज: 'ममता बनर्जी के मन में भ्रम है', अखिलेश से मुलाकात पर BJP की तीखी प्रतिक्रिया
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और साल्ट लेक से निर्वाचित विधायक दिलीप घोष ने 8 मई 2026 को तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की कोलकाता में हुई मुलाकात पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। घोष ने मीडिया से बातचीत में कहा कि ममता बनर्जी के मन में भारी भ्रम की स्थिति है और लोग आकर उन्हें प्रभावित कर रहे हैं।
दिलीप घोष ने क्या कहा
दिलीप घोष ने मीडिया से बातचीत में तंज कसते हुए कहा, "ममता बनर्जी के मन में काफी भ्रम की स्थिति है। लोग आकर उन्हें प्रभावित कर रहे हैं और वह चीजों को ठीक से समझ नहीं पा रही हैं।" उन्होंने आगे कहा कि यदि वह जमीन पर गिरती हैं तो उन्हें गंभीर चोट लग सकती है और वह चोट शायद कभी पूरी तरह ठीक नहीं होगी। यह टिप्पणी पश्चिम बंगाल की राजनीतिक बयानबाजी में एक और तीखे अध्याय के रूप में देखी जा रही है।
अखिलेश-ममता मुलाकात का घटनाक्रम
गुरुवार को कोलकाता में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ममता बनर्जी से मुलाकात की। इस बैठक में TMC सांसद अभिषेक बनर्जी भी उपस्थित रहे और उन्होंने अखिलेश यादव का गले लगाकर स्वागत किया। यह मुलाकात विपक्षी एकजुटता की दृष्टि से राजनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण मानी जा रही है।
अखिलेश यादव का BJP पर हमला
मीडिया से बातचीत में अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि BJP की आँखों में ममता बनर्जी इसलिए खटकती हैं क्योंकि वह आधी आबादी, यानी महिलाओं का प्रतिनिधित्व करती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि BJP सामंती सोच वाली पार्टी है और उसके सहयोगी पुरुषवादी मानसिकता रखते हैं। यादव ने यह भी कहा कि BJP नहीं चाहती कि महिलाएँ आगे बढ़ें।
सुवेंदु अधिकारी के PA की हत्या पर प्रतिक्रिया
BJP नेता सुवेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की हत्या के मामले पर भी दिलीप घोष ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इस घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए था और इस तरह की घटनाओं पर रोक लगनी चाहिए। घोष ने दावा किया कि कुछ लोग नई सरकार आने से पहले आक्रामक व्यवहार दिखा रहे हैं और हिंसा को उकसावा दे रहे हैं।
आगे की राजनीतिक स्थिति
दिलीप घोष ने दावा किया कि नई सरकार आते ही इस प्रकार की हिंसा और आक्रामकता हमेशा के लिए बंद हो जाएगी। पश्चिम बंगाल में राजनीतिक तनाव का यह दौर आगामी चुनावी समीकरणों को और जटिल बना सकता है, जबकि विपक्षी दल एकजुटता की कोशिशों में लगे हैं।