दिलीप घोष का ममता बनर्जी पर कड़ा हमला: बंगाल में सरकारी धन की लूट का आरोप
सारांश
Key Takeaways
- दिलीप घोष ने ममता बनर्जी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।
- मालदा की हिंसा को लेकर केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई का जिक्र किया।
- उन्होंने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की मांग की।
- बंगाल में लूट पर रोक लगाने का वादा किया।
- मतदाता सूची में नामों की कमी पर चिंता जताई।
खड़गपुर, 14 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता दिलीप घोष ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। दिलीप घोष का कहना है कि पश्चिम बंगाल में भ्रष्टाचार का बोलबाला है और सरकारी धन की लूट की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि लूट पर रोक लगाई जाए तो हर परिवार में खुशहाली आएगी। उन्होंने अपने चुनावी संकल्प पत्र में इस मुद्दे को शामिल किया है और चुनाव जीतने पर इसे लागू करने का वादा किया है।
दिलीप घोष ने मंगलवार को मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, "कोयला, बालू से लेकर गौ तस्करी तक बंगाल में यह एक गंभीर समस्या है।" उन्होंने आरोप लगाया कि तस्करी के माध्यम से हजारों करोड़ रुपए का लाभ उठाया जाता है। इस धन का उपयोग हिंसा जैसी घटनाओं को बढ़ावा देने में किया जाता है। ऐसे सभी दोषियों को न्याय के कठघरे में लाना जरूरी है।
पिछले चुनाव में हुई हिंसा पर भाजपा नेता ने कहा, "पिछली बार की हिंसाएं आज भी लोगों के जेहन में ताजा हैं। टीएमसी के गुंडे लोगों को डरा-धमका रहे हैं। चुनाव को प्रभावित करने की मंशा से ये सब किया जा रहा है। ऐसे लोगों को जेल भेजा जाना चाहिए, अन्यथा बंगाल में चुनाव फिर से प्रभावित हो सकते हैं।"
मालदा की हिंसा को लेकर उन्होंने कहा, "केंद्रीय एजेंसियों ने अभी तक मात्र कुछ ही लोगों को गिरफ्तार किया है। 4 मई के बाद जब बंगाल में भाजपा की सरकार बनेगी तो कई अपराधियों को जेल में डाल दिया जाएगा। लोगों को थोड़ी और उम्मीद रखनी चाहिए, जल्द ही बंगाल में सफाई होगी।"
पश्चिम बंगाल में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की मांग करते हुए दिलीप घोष ने कहा, "हम बार-बार चुनाव आयोग और अदालत में इस संबंध में याचिकाएं दायर कर रहे हैं। बंगाल में पैसे और दबाव के जरिए चुनाव जीते जाते हैं। जनता इस बात की इच्छा रखती है कि चुनाव साफ-सुथरे हों। अदालत इस दिशा में कदम बढ़ा रही है, यह एक सकारात्मक संकेत है।"
मतदाता सूची से हटाए गए नामों पर दिलीप घोष ने कहा, "एसआईआर को असफल करने के लिए ममता बनर्जी और उनकी पार्टी ने हर संभव प्रयास किए। यही कारण है कि कुछ वैध मतदाताओं के नाम सूची में नहीं आ सके हैं। चुनाव आयोग और अदालत इस मामले को देख रहे हैं। हमें उन पर पूरा भरोसा रखना चाहिए।"