तृणमूल कांग्रेस ने कलकत्ता हाई कोर्ट में PIL दायर की, नेताओं पर अंडे फेंकने की घटनाओं पर रोक की मांग
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने 22 जून 2026 को कलकत्ता हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर कर पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर हो रहे अंडे फेंकने के हमलों पर न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की है। यह याचिका कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तापब्रता चक्रवर्ती की खंडपीठ के समक्ष वकील प्रभान्या बनर्जी द्वारा प्रस्तुत की गई है, और मामले की सुनवाई मंगलवार को होने की संभावना है।
मुख्य घटनाक्रम
याचिका में पाँच वरिष्ठ तृणमूल नेताओं पर हुए कथित सुनियोजित हमलों का विशेष उल्लेख किया गया है। डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी पर दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर दौरे के दौरान हमला हुआ। श्रीरामपुर से सांसद कल्याण बनर्जी पर हुगली जिले के चांदीतला इलाके में हमला किया गया। इसके अलावा, राज्यसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन पर भी हमले का आरोप लगाया गया है।
विधायकों में बेलघाटा से तृणमूल विधायक कुणाल घोष पर दक्षिण कोलकाता के कालीघाट स्थित पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आवास के बाहर अंडे फेंके गए। वहीं, विधायक मदन मित्रा पर उत्तर 24 परगना जिले के उनके विधानसभा क्षेत्र कमरहटी में हमला हुआ, जहाँ उनकी कार में भी तोड़फोड़ की गई।
गिरफ्तारी के तरीके पर आपत्ति
तृणमूल कांग्रेस ने याचिका में पुलिस द्वारा गिरफ्तार नेताओं के साथ बर्ताव पर भी गंभीर आपत्ति जताई है। पार्टी का आरोप है कि गिरफ्तार तृणमूल नेताओं को कमर में रस्सी बाँधकर और केवल अंडरवियर में सड़कों पर घुमाया गया। इस तरह के बर्ताव को पार्टी ने मानवीय गरिमा का उल्लंघन बताया है। हालाँकि, पुलिस ने बाद में गिरफ्तार नेताओं के सिर पर हेलमेट लगाकर उन्हें अंडों से बचाने की कोशिश की।
व्यापक राजनीतिक संदर्भ
राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद से तृणमूल नेताओं को विभिन्न आरोपों में गिरफ्तार किया जा रहा है। गिरफ्तारियों के दौरान भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं, कार्यकर्ताओं और कुछ स्थानीय लोगों द्वारा आरोपियों पर अंडे फेंकने की घटनाएँ सामने आई हैं। तृणमूल कांग्रेस का दावा है कि राज्य भर में पार्टी कार्यकर्ताओं पर हमले जारी हैं और पार्टी कार्यालयों को ध्वस्त किया जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में राजनीतिक तनाव अपने चरम पर है।
आगे क्या होगा
कलकत्ता हाई कोर्ट में दायर इस PIL पर मंगलवार को सुनवाई होने की संभावना है। न्यायालय का रुख तय करेगा कि क्या इन घटनाओं पर तत्काल रोक के लिए कोई अंतरिम आदेश जारी किया जाएगा। गौरतलब है कि यह मामला राज्य की कानून-व्यवस्था और राजनीतिक हिंसा के व्यापक सवाल को न्यायिक मंच पर ले आया है।