कलकत्ता हाईकोर्ट ने अंडा फेंकने की घटनाओं पर बंगाल पुलिस से माँगी रिपोर्ट, कहा — 'सिर्फ गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
कलकत्ता हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने मंगलवार, 30 जून 2026 को पश्चिम बंगाल पुलिस को निर्देश दिया कि वह 4 जून को विधानसभा चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद से राजनीतिक नेताओं और कार्यकर्ताओं पर हुए अंडा फेंकने के हमलों में की गई कार्रवाई पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करे। अदालत ने स्पष्ट किया कि महज गिरफ्तारियाँ करना इस समस्या का समाधान नहीं है — व्यापक सामाजिक जागरूकता अभियान चलाना भी ज़रूरी है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला तृणमूल कांग्रेस (TMC) द्वारा दायर जनहित याचिका पर आधारित है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यकर्ताओं ने पुलिस की मौजूदगी में TMC के नेताओं — जिनमें पार्टी के पूर्व एवं वर्तमान चुने हुए जनप्रतिनिधि शामिल हैं — पर अंडे फेंके और पुलिस इन हमलों के दौरान मूकदर्शक बनी रही।
गौरतलब है कि ये घटनाएँ चुनाव नतीजों के तुरंत बाद शुरू हुईं और राज्य के कई हिस्सों में दर्ज की गई हैं। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में चुनाव-पश्चात राजनीतिक हिंसा पहले से ही राष्ट्रीय चिंता का विषय रही है।
अदालत की टिप्पणियाँ
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तापब्रत चक्रवर्ती और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी चटर्जी की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि राज्य सरकार को यह बताना होगा कि पुलिस प्रशासन ने ऐसे हमलों को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए हैं। बेंच ने यह भी रेखांकित किया कि सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य प्रशासन की संवैधानिक जिम्मेदारी है।
हालाँकि डिवीजन बेंच ने याचिकाकर्ताओं की अंतरिम आदेश की माँग को अस्वीकार कर दिया।
सरकार और याचिकाकर्ता पक्ष के तर्क
राज्य सरकार के वकील ने अदालत को बताया कि प्रशासन लोगों से बार-बार कानून हाथ में न लेने की अपील कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि चूँकि मामले में कोई ठोस शिकायत दर्ज नहीं हुई है, इसलिए प्रशासन के पास सीमित विकल्प हैं।
दूसरी ओर, याचिकाकर्ता पक्ष के वकील और तृणमूल कांग्रेस के चार बार के लोकसभा सदस्य कल्याण बनर्जी ने पुलिस पर इन घटनाओं के पीछे मुख्य सूत्रधार होने का आरोप लगाया। बनर्जी ने तर्क दिया कि ये हमले हवाई अड्डों जैसी सुरक्षित जगहों पर भी हो रहे हैं और आरोप लगाया कि एक मंत्री कथित तौर पर लोगों को अंडे फेंकने के लिए उकसा रहा है।
आम जनता और राजनीतिक माहौल पर असर
इन घटनाओं ने पश्चिम बंगाल में चुनाव-पश्चात कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। यह पहली बार नहीं है जब राज्य में चुनाव के बाद राजनीतिक कार्यकर्ताओं पर हमलों के मामले सामने आए हों — आलोचकों का कहना है कि यह एक चिंताजनक पैटर्न बनता जा रहा है।
अदालत का यह रुख संकेत देता है कि न्यायपालिका इस मामले में केवल प्रतीकात्मक कार्रवाई से संतुष्ट नहीं होगी। अगली सुनवाई में पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर आगे का निर्देश तय होगा।
आगे क्या होगा
अदालत ने राज्य पुलिस को निर्धारित समय-सीमा में रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि प्रशासन ने अदालत के निर्देशों का पालन किया है या नहीं। कलकत्ता हाईकोर्ट की यह सख्त टिप्पणी राज्य सरकार पर दबाव बढ़ाती है कि वह चुनाव-पश्चात हिंसा की घटनाओं पर जवाबदेही सुनिश्चित करे।