कलकत्ता हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: ECI की निवारक गिरफ्तारियों पर रोक से इनकार, निजी स्वतंत्रता का रखें ध्यान
सारांश
Key Takeaways
- कलकत्ता हाईकोर्ट ने ECI को निवारक गिरफ्तारियों से रोकने से इनकार किया।
- TMC ने याचिका दायर की थी।
कलकत्ता हाई कोर्ट की एक डिवीजन बेंच ने मंगलवार, 28 अप्रैल को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण (29 अप्रैल) से पहले भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा लागू की जा रही 'निवारक गिरफ्तारियों' पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि आयोग स्वतंत्र, निष्पक्ष और हिंसा-मुक्त चुनाव सुनिश्चित करने के लिए एहतियाती गिरफ्तारियाँ कर सकता है, लेकिन ऐसा करते समय संबंधित व्यक्ति की 'निजी स्वतंत्रता' का पूरा ध्यान रखा जाए।
मामले की पृष्ठभूमि
तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने मंगलवार को कलकत्ता हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर अनुरोध किया था कि अदालत ECI की बेरोकटोक 'एहतियाती गिरफ्तारियों' पर अंकुश लगाए। पार्टी का तर्क था कि बिना किसी पूर्व रिकॉर्ड या साबित आरोप वाले निर्दोष लोगों को भी इन गिरफ्तारियों में शामिल किया जा रहा है।
अदालत की टिप्पणियाँ
चीफ जस्टिस सुजॉय पॉल और जस्टिस पार्थ सारथी सेन की डिवीजन बेंच ने कहा कि चूँकि भारत निर्वाचन आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना है, इसलिए वह आवश्यकता पड़ने पर एहतियाती गिरफ्तारियों का आदेश दे सकता है। हालाँकि, बेंच ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी ऐसे व्यक्ति को परेशान नहीं किया जाना चाहिए जिसका चुनाव से जुड़ी हिंसा में शामिल होने का कोई पिछला रिकॉर्ड या साबित आरोप न हो।
डिवीजन बेंच ने TMC की ओर से याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वे उन लोगों की एक सूची जमा करें, जिन्हें बिना किसी पूर्व रिकॉर्ड के एहतियाती गिरफ्तारियों में लिया गया है।
गिरफ्तारियों का आँकड़ा
भारत निर्वाचन आयोग ने मंगलवार शाम बताया कि पुलिस ने रविवार सुबह से बीते 60 घंटों में राज्य के 7 चुनावी जिलों में 2,473 लोगों को गिरफ्तार किया है। आयोग ने इस बार पूरे राज्य में