स्वतंत्रता दिवस 2026: PM मोदी ने लाल किले से 'शक्ति की सप्त धारा' का आह्वान, 7 क्षेत्रों में नई छलांग का संकल्प
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2026 को 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए 'शक्ति की सप्त धारा' का आह्वान किया — सात रणनीतिक क्षेत्रों का एक दृष्टिकोण, जिसे उन्होंने आने वाले 5 से 7 वर्षों में भारत को नई ऊंचाई देने का माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि यह सामर्थ्य वह कर दिखाएगा जो पिछले पाँच-सात दशकों में संभव नहीं हो सका।
सप्त धारा: सात शक्तियाँ, एक संकल्प
प्रधानमंत्री मोदी ने 'शक्ति की सप्त धारा' की सात धाराओं को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया। पहली शक्ति — मैन्युफैक्चरिंग पावर; दूसरी — कृषि और खाद्य उत्पादन; तीसरी — प्रौद्योगिकी और नवाचार; चौथी — गति शक्ति (कनेक्टिविटी और इन्फ्रास्ट्रक्चर); पाँचवीं — रक्षा बल; छठी — ग्रीन इकॉनमी व ब्लू इकॉनमी; और सातवीं — भारत की सॉफ्ट पावर।
उन्होंने कहा, 'आने वाले 5-7 साल में, जो पिछले 5-7 दशक में नहीं हुआ, उस सप्त धारा के सामर्थ्य से, उसकी शक्ति से हम देश को नई ऊंचाई और गति देंगे और नए लक्ष्यों को पार करने वाले सामर्थ्य देंगे।'
मैन्युफैक्चरिंग और कृषि: वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की भूमिका
मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि डिजाइन से लेकर उत्पादन तक पूरी वैल्यू चेन भारत की होनी चाहिए और भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन का केंद्र बनना होगा। उन्होंने हर निर्माता, उद्यमी और MSME से आग्रह किया कि उनका मंत्र 'क्वालिटी, क्वालिटी और क्वालिटी' होना चाहिए — जिसे उन्होंने भारत की वैश्विक ब्रांड पहचान का आधार बताया।
कृषि की बात करते हुए उन्होंने कहा कि मिलेट्स, मसाले, फल-फूल जैसे उत्पादों को वैश्विक ब्रांड बनाना होगा। उन्होंने कहा कि खेत से लेकर निर्यात बाजार तक की पूरी श्रृंखला को मजबूत करना अनिवार्य है, क्योंकि दुनिया के बाजार अब भारत के लिए खुल चुके हैं।
प्रौद्योगिकी, गति शक्ति और रक्षा आत्मनिर्भरता
प्रौद्योगिकी और नवाचार पर प्रधानमंत्री ने कहा कि AI, क्वांटम कंप्यूटिंग, अंतरिक्ष, रोबोटिक्स और डेटा सेंटर के इस युग में भारत को केवल बाजार नहीं, बल्कि इनोवेशन का हब बनना है। UPI और डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर में भारत की सफलता का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि अब इस तकनीक को दुनिया के कोने-कोने तक पहुँचाना है।
गति शक्ति के अंतर्गत उन्होंने हाई-स्पीड रेल, आधुनिक राजमार्ग, अंतर्देशीय जलमार्ग, हवाई अड्डों और मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स के विकास पर बल दिया। साथ ही पोर्ट-लेड डेवलपमेंट ग्रोथ को प्राथमिकता देने की बात कही।
रक्षा क्षेत्र में उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता अब विकल्प नहीं, अनिवार्यता है। उन्होंने काउंटर-ड्रोन सिस्टम और हाइपरसोनिक डिफेंस टेक्नोलॉजी में नेतृत्व लेने का आह्वान किया और कहा कि भारत को ग्लोबल डिफेंस सप्लायर बनने की दिशा में आगे बढ़ना होगा।
ग्रीन-ब्लू इकॉनमी और सॉफ्ट पावर: भारत का वैश्विक दृष्टिकोण
ग्रीन इकॉनमी पर प्रधानमंत्री ने कहा, 'हमें ग्रीन हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा, एनर्जी स्टोरेज, ग्रीन मोबिलिटी और ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग में वैश्विक पैमाने पर उपस्थिति दर्ज करानी है।' उन्होंने कहा कि जब दुनिया ग्लोबल वार्मिंग पर बहस करती है, भारत समाधान खोजता है। ब्लू इकॉनमी के क्षेत्र में भी भारत के पास विशाल अवसर हैं।
सातवीं धारा — सॉफ्ट पावर — पर उन्होंने योग, आयुर्वेद, होलिस्टिक हेल्थकेयर और 'हील इन इंडिया' आंदोलन का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि योग आज पूरी दुनिया को भारत से जोड़ रहा है और यह वैश्विक ऊर्जा का स्रोत बनता जा रहा है।
युवा शक्ति और राष्ट्र निर्माण
प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी स्पष्ट किया कि इस सप्त धारा के साथ देश की युवा शक्ति का भरपूर उपयोग राष्ट्र निर्माण में किया जाएगा। उनकी ऊर्जा और सामर्थ्य को इस राष्ट्रीय अभियान से जोड़ा जाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है।