29 सितंबर 2026
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MCX पर सोना ₹1,48,410 और चांदी ₹2,25,338 पर फिसली; अमेरिकी बॉन्ड यील्ड व US-ईरान तनाव से बुलियन बाजार पर दबाव

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MCX पर सोना ₹1,48,410 और चांदी ₹2,25,338 पर फिसली; अमेरिकी बॉन्ड यील्ड व US-ईरान तनाव से बुलियन बाजार पर दबाव

सारांश

ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और अमेरिका-ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य विवाद ने मंगलवार को MCX पर सोने और चांदी को एक प्रतिशत से अधिक नीचे धकेल दिया। सोने के लिए ₹1,50,000 और चांदी के लिए ₹2,28,000 का स्तर निर्णायक साबित होगा।

मुख्य बातें

MCX पर 29 सितंबर 2026 को सोना और चांदी दोनों में 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज हुई।
दिसंबर वायदा सोना ₹1,48,410 प्रति 10 ग्राम पर; इंट्राडे निचला स्तर ₹1,48,150 रहा।
दिसंबर वायदा चांदी ₹2,25,338 प्रति किलोग्राम पर; इंट्राडे में ₹2,24,500 तक टूटी।
अंतरराष्ट्रीय स्पॉट गोल्ड पिछले सत्र में लगभग 4 प्रतिशत गिरकर सात सप्ताह के निचले स्तर पर पहुँचा था।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य को 7 दिनों में खोलने के ईरानी प्रस्ताव को खारिज किया।
सोने के लिए ₹1,50,000 और चांदी के लिए ₹2,28,000 प्रमुख प्रतिरोध स्तर माने जा रहे हैं।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 29 सितंबर 2026 के मंगलवार के कारोबारी सत्र में सोने और चांदी दोनों कीमती धातुओं में 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, जिसका मुख्य कारण ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ता भू-राजनैतिक तनाव बताया जा रहा है। मुंबई के बुलियन बाजार में यह दबाव अंतरराष्ट्रीय स्पॉट गोल्ड की कमजोरी के अनुरूप रहा, जो पिछले सत्र में लगभग 4 प्रतिशत लुढ़ककर सात सप्ताह के निचले स्तर पर पहुँच गया था।

MCX पर सोने-चांदी का ताज़ा भाव

दिसंबर डिलीवरी वाला सोना वायदा 487 रुपए (0.33 प्रतिशत) की गिरावट के साथ ₹1,48,410 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। इंट्राडे के दौरान यह 747 रुपए (0.50 प्रतिशत) टूटकर ₹1,48,150 के निचले स्तर तक पहुँचा, जबकि दिन का उच्चतम स्तर ₹1,49,034 रहा।

चांदी पर दबाव तुलनात्मक रूप से अधिक रहा। दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी वायदा इंट्राडे में 2,942 रुपए (1.29 प्रतिशत) गिरकर ₹2,24,500 प्रति किलोग्राम के निचले स्तर तक पहुँची। बाद में यह 2,104 रुपए (0.93 प्रतिशत) की गिरावट के साथ ₹2,25,338 प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती दिखाई दी।

गिरावट के पीछे की वजहें

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस गिरावट के दो प्रमुख कारण हैं। पहला — होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव, जिसने वैश्विक ऊर्जा कीमतों को ऊंचा बनाए रखा है। दूसरा — अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी, जो सोने और चांदी जैसे गैर-ब्याज देने वाले निवेश विकल्पों की आकर्षण-शक्ति को कम करती है।

रिपोर्टों के अनुसार, ईरानी अधिकारियों ने नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले वॉशिंगटन के साथ किसी समझौते की संभावना को लेकर निराशा व्यक्त की है। स्थिति तब और जटिल हो गई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य को सात दिनों के भीतर फिर से खोलने के ईरान के प्रस्ताव को खारिज कर दिया। इससे ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है और निवेशकों का रुझान यील्ड-आधारित परिसंपत्तियों की ओर बढ़ा है।

सोने के तकनीकी स्तर

कमोडिटी विशेषज्ञों के अनुसार, सोने के लिए निकट अवधि में ₹1,50,000–₹1,50,700 का दायरा पहला प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) क्षेत्र है। इसके ऊपर ₹1,52,000–₹1,52,600 का स्तर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नीचे की ओर ₹1,48,000–₹1,47,300 का दायरा प्रमुख समर्थन (सपोर्ट) क्षेत्र है। यदि सोना ₹1,48,000 के नीचे मजबूती से टिकता है, तो इसमें और गिरावट की संभावना बन सकती है।

चांदी के तकनीकी स्तर

चांदी के लिए ₹2,27,000–₹2,28,000 प्रति किलोग्राम का स्तर निकटतम प्रतिरोध माना जा रहा है। इसके ऊपर अगला प्रतिरोध ₹2,32,000–₹2,33,000 के क्षेत्र में है। नीचे की ओर ₹2,24,000–₹2,23,000 और उसके बाद ₹2,20,000–₹2,19,000 का स्तर महत्वपूर्ण समर्थन माना जा रहा है।

आगे क्या होगा

विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल सोना और चांदी दोनों में रुख सतर्क से नकारात्मक बना हुआ है। सोने को मजबूती के संकेत देने के लिए ₹1,50,000 के ऊपर टिकना आवश्यक होगा, जबकि चांदी के लिए ₹2,28,000 का स्तर पार करना जरूरी माना जा रहा है। अमेरिका-ईरान तनाव और फेडरल रिजर्व की भावी नीति दोनों ही कीमती धातुओं की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो गैर-ब्याज देने वाली धातुओं पर संरचनात्मक दबाव बनता है, और होर्मुज संकट जैसे भू-राजनैतिक कारक अनिश्चितता को बढ़ाते हुए बाजार को यील्ड की ओर धकेलते हैं। यह विडंबना है कि जो संकट आम तौर पर सोने को 'सेफ हेवन' बनाते हैं, वही ऊर्जा मूल्य वृद्धि के जरिए महंगाई बढ़ाकर यील्ड को ऊंचा रखते हैं और सोने की चमक फीकी कर देते हैं। जब तक फेडरल रिजर्व की नीति दिशा स्पष्ट नहीं होती और ईरान संकट का कोई ठोस समाधान नहीं निकलता, बुलियन बाजार में यही उथल-पुथल बनी रहेगी।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

29 सितंबर 2026 को MCX पर सोने का भाव कितना रहा?
MCX पर दिसंबर डिलीवरी वाला सोना वायदा 487 रुपए (0.33 प्रतिशत) की गिरावट के साथ ₹1,48,410 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। इंट्राडे में यह ₹1,48,150 के निचले स्तर तक पहुँचा।
MCX पर सोने-चांदी में गिरावट क्यों आई?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार गिरावट के दो मुख्य कारण हैं — ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, जो गैर-ब्याज देने वाली धातुओं को कम आकर्षक बनाती है, और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ता तनाव। अंतरराष्ट्रीय स्पॉट गोल्ड भी पिछले सत्र में लगभग 4 प्रतिशत गिरकर सात सप्ताह के निचले स्तर पर था।
अमेरिका-ईरान तनाव का सोने पर क्या असर पड़ता है?
आम तौर पर भू-राजनैतिक संकट सोने को 'सेफ हेवन' के रूप में मजबूत करते हैं, लेकिन जब यही संकट ऊर्जा कीमतें बढ़ाता है तो महंगाई और बॉन्ड यील्ड दोनों ऊंचे रहते हैं। इससे निवेशक यील्ड-आधारित परिसंपत्तियों को प्राथमिकता देते हैं और सोने पर दबाव बनता है।
सोने और चांदी के लिए निकट अवधि में प्रमुख तकनीकी स्तर क्या हैं?
कमोडिटी विशेषज्ञों के अनुसार सोने के लिए ₹1,50,000–₹1,50,700 पहला प्रतिरोध और ₹1,48,000–₹1,47,300 प्रमुख समर्थन है। चांदी के लिए ₹2,27,000–₹2,28,000 निकटतम प्रतिरोध और ₹2,24,000–₹2,23,000 तथा ₹2,20,000–₹2,19,000 समर्थन स्तर माने जा रहे हैं।
क्या अभी सोने या चांदी में निवेश करना सही है?
विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल दोनों धातुओं में रुख सतर्क से नकारात्मक बना हुआ है। सोने को मजबूती के लिए ₹1,50,000 के ऊपर टिकना होगा और चांदी के लिए ₹2,28,000 पार करना जरूरी माना जा रहा है। समर्थन स्तरों के टूटने पर और गिरावट की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
राष्ट्र प्रेस
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