अमेरिका-ईरान तनाव से MCX पर सोना ₹1,42,064 और चांदी ₹2,18,476 प्रति किलो तक लुढ़की
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई, 13 जुलाई 2026: अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव के बीच सोमवार को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में सोने और चांदी की कीमतों में तीव्र बिकवाली देखी गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर दोनों कीमती धातुओं के दाम करीब 2 प्रतिशत तक फिसल गए, जिसकी प्रमुख वजह डॉलर इंडेक्स का मज़बूत होना बताई जा रही है।
MCX पर सोने का हाल
5 अगस्त 2026 के सोने के कॉन्ट्रैक्ट ने पिछली क्लोजिंग ₹1,43,478 प्रति 10 ग्राम के मुकाबले ₹845 यानी 0.58 प्रतिशत की कमज़ोरी के साथ ₹1,42,633 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार शुरू किया। सुबह 9:48 बजे IST तक यह और टूटकर ₹1,414 यानी 0.99 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹1,42,064 प्रति 10 ग्राम पर आ गया।
इंट्राडे कारोबार में सोने ने ₹1,41,557 प्रति 10 ग्राम का न्यूनतम और ₹1,43,478 प्रति 10 ग्राम का उच्चतम स्तर छुआ।
चांदी में भी भारी दबाव
चांदी के 4 सितंबर 2026 के कॉन्ट्रैक्ट में भी तेज़ गिरावट रही। यह पिछली क्लोजिंग ₹2,22,664 प्रति किलो के मुकाबले ₹4,016 यानी 1.80 प्रतिशत की कमज़ोरी के साथ ₹2,18,648 प्रति किलो पर खुला। रिपोर्ट लिखे जाने तक यह ₹4,188 यानी 1.88 प्रतिशत नीचे ₹2,18,476 प्रति किलो पर था।
इंट्राडे में चांदी ने ₹2,17,277 प्रति किलो का निचला और ₹2,22,664 प्रति किलो का ऊपरी स्तर दर्ज किया।
अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में भी कमज़ोरी
वैश्विक स्तर पर भी धातुओं में दबाव रहा। कॉमेक्स पर सोना 1.27 प्रतिशत की गिरावट के साथ 4,061 डॉलर प्रति औंस पर था, जबकि चांदी 58 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी। जानकारों के अनुसार, इस बिकवाली की सीधी वजह डॉलर इंडेक्स का 100.90 के स्तर तक पहुँचना है।
गौरतलब है कि डॉलर इंडेक्स, अमेरिकी डॉलर की यूरो, जापानी येन, पाउंड स्टर्लिंग, कैनेडियन डॉलर, स्वीडिश क्रोना और स्विस फ्रैंक जैसी छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले स्थिति दर्शाता है। डॉलर मज़बूत होने पर सोना और चांदी जैसी डॉलर-मूल्यांकित धातुएँ अन्य मुद्राओं के निवेशकों के लिए महँगी हो जाती हैं, जिससे माँग घटती है।
मध्य पूर्व तनाव की पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में स्थिति लगातार बिगड़ रही है। कमर्शियल जहाज़ों पर हमलों के जवाब में अमेरिकी सेना ने ईरान पर ताज़ा सैन्य कार्रवाई की है। इसके बाद ईरान भी आक्रामक रुख अपनाए हुए है और कुवैत, बहरीन तथा जॉर्डन में स्थित अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना रहा है।
आमतौर पर भू-राजनीतिक संकट के दौरान सोने की माँग बढ़ती है क्योंकि इसे 'सेफ हेवन' माना जाता है। लेकिन इस बार अमेरिका-ईरान टकराव से डॉलर की मज़बूती ने इस परंपरागत रुझान को पलट दिया है — जो बाज़ार विश्लेषकों के लिए एक उल्लेखनीय विरोधाभास है।
आगे क्या होगा
बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक मध्य पूर्व में तनाव कम नहीं होता और डॉलर इंडेक्स में नरमी नहीं आती, सोने और चांदी पर दबाव बना रह सकता है। निवेशकों की नज़र अब अमेरिकी फेडरल रिज़र्व के अगले संकेतों और भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर टिकी है।