लाल किले से मोदी का 'विकसित भारत' रोडमैप: सोलर से 160 GW, रेलवे 100% विद्युतीकृत, ₹1 लाख करोड़ इनोवेशन फंड
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2025 को लाल किले की प्राचीर से 79वें स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए पिछले एक दशक की उपलब्धियों का विस्तृत लेखा-जोखा प्रस्तुत किया और 2047 तक 'विकसित भारत' के निर्माण के लिए सात सुधार-लक्ष्यों की रूपरेखा सामने रखी। इस ऐतिहासिक संबोधन में उन्होंने सोलर ऊर्जा, रेलवे विद्युतीकरण, डिजिटल अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तिकरण और राष्ट्रीय सुरक्षा को केंद्र में रखा।
ऐतिहासिक क्षण और 'विकसित भारत' का संकल्प
मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत में कहा, '80 साल बाद स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले पर पहली बार 'वंदे मातरम' गाया गया।' उन्होंने इसे 140 करोड़ से अधिक देशवासियों की सामूहिक आवाज़ बताते हुए कहा कि यह क्षण सभी के लिए ऐतिहासिक है। 2047 तक 'विकसित भारत' का लक्ष्य हासिल करने के लिए उन्होंने 'भारत रिफॉर्म एक्सप्रेस' को और तेज़ करने की बात कही।
ऊर्जा और बुनियादी ढाँचे में बड़ी छलांग
प्रधानमंत्री ने बताया कि 12 वर्ष पहले देश में सोलर ऊर्जा की स्थापित क्षमता मात्र 2 गीगावॉट थी, जो अब बढ़कर 160 गीगावॉट हो चुकी है। रेलवे विद्युतीकरण पर उन्होंने कहा कि 1925 में शुरू हुआ यह काम 90 वर्षों में केवल 30 प्रतिशत पूरा हो सका था, लेकिन पिछले एक दशक में शेष 70 प्रतिशत काम पूरा कर 100 प्रतिशत विद्युतीकरण हासिल किया गया। इससे डीजल आयात में कमी और पर्यावरण को लाभ मिला है।
पाइप गैस वितरण पर उन्होंने कहा कि 2014 से पहले सिर्फ 70 शहरों में यह सुविधा थी, जो अब 700 शहरों तक पहुँच चुकी है। घरेलू पाइप गैस कनेक्शन 20-22 लाख से बढ़कर लगभग 1 करोड़ 75 लाख हो गए हैं।
डिजिटल और विनिर्माण क्षेत्र की उपलब्धियाँ
मोदी ने बताया कि डिजिटल लेनदेन में 100 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या में 4 गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विनिर्माण क्षेत्र में उन्होंने आँकड़े गिनाते हुए कहा कि खादी और ग्रामोद्योग उत्पादन लगभग 5 गुना, इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण 7 गुना, आधुनिक रेलवे कोच निर्माण 21 गुना और मोबाइल फोन उत्पादन 33 गुना बढ़ा है। युवाओं के लिए ₹1 लाख करोड़ से अधिक का इनोवेशन फंड मंजूर किया गया है।
सात सुधार-लक्ष्य (सप्तधारा) और वैश्विक महत्वाकांक्षाएँ
2047 के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए प्रधानमंत्री ने सात सुधार-धाराएँ (सप्तधारा) घोषित कीं — मैन्युफैक्चरिंग पावर, कृषि और फूड प्रोसेसिंग, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन, गति शक्ति, रक्षा शक्ति, ग्रीन इकोनॉमी व ब्लू इकोनॉमी और सॉफ्ट पावर। उन्होंने कहा कि 40 से अधिक देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) हैं और समुद्री भोजन (सीफूड) निर्यात में भारत की बड़ी संभावनाएँ हैं। साथ ही, उन्होंने कहा कि दुनिया के शीर्ष पाँच बैंकों में एक भारतीय बैंक और शीर्ष पाँच फार्मा कंपनियों में भारतीय कंपनियाँ होनी चाहिए।
महिला आरक्षण और नक्सल-मुक्त भारत का आह्वान
मोदी ने कहा कि 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' राजनीतिक बदले की भावना का शिकार हो गया और उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से महिला कोटा विधेयक का समर्थन करने की अपील की। नक्सलवाद और माओवाद पर उन्होंने कहा कि इन विचारधाराओं ने देश के कुछ हिस्सों को बर्बाद किया और संविधान की भावना को नुकसान पहुँचाया। उन्होंने भारत को नक्सल-मुक्त बनाने का संकल्प दोहराया। यह संबोधन भारत की विकास यात्रा को एक नए अध्याय की ओर ले जाने का संकेत है — अब परीक्षा इन घोषणाओं के ज़मीनी क्रियान्वयन की होगी।