29 सितंबर 2026
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भारतीय राजदूत विनय कुमार की रूसी उप विदेश मंत्री गलुजिन से मास्को में मुलाकात, यूक्रेन संघर्ष पर गहरी चर्चा

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भारतीय राजदूत विनय कुमार की रूसी उप विदेश मंत्री गलुजिन से मास्को में मुलाकात, यूक्रेन संघर्ष पर गहरी चर्चा

सारांश

भारत-रूस कूटनीति एक बार फिर सुर्खियों में — मास्को में भारतीय राजदूत विनय कुमार की रूसी उप विदेश मंत्री गलुजिन से बैठक में यूक्रेन संघर्ष पर गहरी चर्चा हुई। यह जुड़ाव यूक्रेन युद्ध और इंडो-पैसिफिक में बदलते समीकरणों के बीच भारत की रणनीतिक स्वायत्तता की नीति को रेखांकित करता है।

मुख्य बातें

भारतीय राजदूत विनय कुमार ने 29 सितंबर 2026 को मास्को में रूसी उप विदेश मंत्री मिखाइल गलुजिन से मुलाकात की।
रूसी विदेश मंत्रालय के अनुसार यूक्रेन की स्थिति पर 'गहराई से' चर्चा हुई और भारतीय पक्ष को मास्को का रुख बताया गया।
रूस ने कीव और उसके यूरोपीय समर्थकों की नीतियों को कूटनीतिक समाधान में बाधक करार दिया।
बैठक उसी सप्ताह हुई जब विदेश मंत्री एस.
जयशंकर ने UNGA के 81वें सत्र में सर्गेई लावरोव से मुलाकात की थी।
जयशंकर ने एक्स पर पोस्ट कर BRICS के भीतर सहयोग और द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की पुष्टि की।
17 सितंबर को राष्ट्रपति पुतिन ने PM मोदी के 76वें जन्मदिन पर उन्हें बधाई दी थी।

भारत के मास्को स्थित राजदूत विनय कुमार ने 29 सितंबर 2026 को रूस के उप विदेश मंत्री मिखाइल गलुजिन से मुलाकात की, जिसमें द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ यूक्रेन संघर्ष की मौजूदा स्थिति पर विस्तृत चर्चा हुई। रूसी विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में पुष्टि की कि भारतीय राजनयिक को यूक्रेन के हालात पर मास्को का पक्ष विस्तार से समझाया गया।

मुख्य घटनाक्रम

रूसी विदेश मंत्रालय के अनुसार, बातचीत के दौरान गलुजिन ने दोहराया कि कीव सरकार और उसके यूरोपीय समर्थकों की नीतियाँ राजनीतिक एवं कूटनीतिक समाधान में बाधा उत्पन्न कर रही हैं। मंत्रालय के बयान में कहा गया कि ये नीतियाँ अजोव-काला सागर क्षेत्र सहित सैन्य तनाव को बढ़ावा देती हैं, जो 'स्वीकार्य नहीं' हैं।

रूसी पक्ष ने अपने उस 'सैद्धांतिक रुख' को भी दोहराया जिसमें संकट के 'मूल कारणों' को दूर कर निष्पक्ष और स्थायी समाधान की ज़रूरत पर बल दिया गया है। रूस का आरोप है कि ये मूल कारण पश्चिम की उस मंशा से जुड़े हैं जिसके तहत वह यूक्रेन को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रूस को 'रणनीतिक हार' देना चाहता है।

बातचीत का स्वर और रणनीतिक संदर्भ

रूसी विदेश मंत्रालय ने इस विचार-विमर्श को 'जीवंत आदान-प्रदान' करार दिया और कहा कि यह चर्चा दोस्ताना माहौल में हुई — जो कि दोनों देशों के बीच 'विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी' की पहचान है।

गौरतलब है कि यह बैठक ऐसे समय में हुई जब 17 सितंबर 2026 को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके 76वें जन्मदिन पर बधाई देते हुए दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंधों को मज़बूत करने में उनके योगदान की सराहना की थी।

जयशंकर-लावरोव मुलाकात का पृष्ठभूमि संदर्भ

पिछले सप्ताह न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर और रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के बीच बैठक हुई, जिसमें दोनों ने इस 'विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त' रणनीतिक साझेदारी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता फिर से जताई। जयशंकर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए बताया कि दोनों नेताओं ने 'कई मौजूदा मुद्दों' पर विचारों का आदान-प्रदान किया और BRICS समूह के भीतर सहयोग की स्थिति की समीक्षा की।

जयशंकर और लावरोव BRICS तथा शंघाई सहयोग संगठन (SCO) जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नियमित रूप से मिलते रहे हैं, जहाँ क्षेत्रीय सुरक्षा, व्यापार और बहुपक्षीय संस्थाओं में सहयोग के मुद्दे उठाए जाते हैं।

भारत का संतुलन-नीति का दृष्टिकोण

कूटनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस बातचीत से नई दिल्ली की उस रणनीतिक मंशा का पता चलता है जिसके तहत वह पश्चिमी साझेदारों से संबंध बनाए रखते हुए मास्को के साथ भी सक्रिय संवाद जारी रखना चाहती है। भारत ने विवादों के समाधान में संवाद और कूटनीति की भूमिका पर लगातार ज़ोर देते हुए रणनीतिक स्वायत्तता की अपनी नीति को बनाए रखा है।

यह बैठक ऐसे वैश्विक परिप्रेक्ष्य में हुई है जब भारत और रूस ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग और बहुपक्षीय समन्वय पर मिलकर काम कर रहे हैं — और यूक्रेन संघर्ष के चलते वैश्विक भू-राजनीति में बड़े पुनर्गठन की प्रक्रिया जारी है।

आगे की राह

राजनयिक सूत्रों के अनुसार, भारत और रूस के बीच उच्च-स्तरीय संपर्क आने वाले महीनों में भी जारी रहने की संभावना है, विशेषकर BRICS और SCO के मंचों पर। भारत का रुख संघर्ष-समाधान में बातचीत को समर्थन देने का रहा है, और विश्लेषकों की नज़र इस बात पर टिकी है कि मास्को के साथ इस निरंतर कूटनीतिक जुड़ाव का भारत की पश्चिमी साझेदारियों पर क्या असर पड़ता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारतीय राजदूत विनय कुमार और रूसी उप विदेश मंत्री गलुजिन की मुलाकात में क्या हुआ?
29 सितंबर 2026 को मास्को में हुई इस बैठक में यूक्रेन संघर्ष की मौजूदा स्थिति और द्विपक्षीय अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा हुई। रूसी विदेश मंत्रालय के अनुसार भारतीय राजदूत को यूक्रेन पर मास्को का आधिकारिक रुख विस्तार से बताया गया।
रूस ने यूक्रेन संघर्ष पर भारत के सामने क्या रुख रखा?
रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा कि कीव सरकार और उसके यूरोपीय समर्थकों की नीतियाँ कूटनीतिक समाधान में बाधा डालती हैं और अजोव-काला सागर क्षेत्र में सैन्य तनाव बढ़ाती हैं। रूस ने संकट के 'मूल कारणों' को दूर करने की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया।
जयशंकर और लावरोव की UNGA बैठक में क्या तय हुआ?
न्यूयॉर्क में UNGA के 81वें सत्र के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भारत-रूस की 'विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त' रणनीतिक साझेदारी के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई। जयशंकर ने एक्स पर बताया कि दोनों ने BRICS के भीतर सहयोग और कई मौजूदा मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।
यूक्रेन युद्ध के दौरान भारत की रूस नीति क्या है?
भारत ने यूक्रेन संघर्ष में किसी एक पक्ष का समर्थन करने के बजाय संवाद और कूटनीति के ज़रिए समाधान की वकालत की है। नई दिल्ली रूस के साथ ऊर्जा, रक्षा और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग जारी रखते हुए पश्चिमी साझेदारों से भी संबंध बनाए हुए है।
पुतिन ने PM मोदी को जन्मदिन की बधाई कब दी थी?
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 17 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन पर बधाई दी थी। इस अवसर पर उन्होंने भारत-रूस के बीच 'विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी' को मज़बूत करने में मोदी के योगदान की सराहना की थी।
राष्ट्र प्रेस
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