मुंबई: वारिस पठान के खिलाफ BJP के वसीम खान ने DCP से शिकायत दर्ज कराई, खिलाफत हाउस ताला विवाद
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) माइनॉरिटी सेल के अध्यक्ष वसीम खान ने 29 सितंबर 2026 को मुंबई में डीसीपी जोन-3 से मुलाकात कर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) नेता वारिस पठान के खिलाफ पुलिस शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि पठान कथित तौर पर खिलाफत हाउस पहुँचे और वहाँ के गेट पर ताला लगाया, जो एक विवादित स्थल है और जिसे लेकर वक्फ बोर्ड तथा अन्य पक्षों के बीच संपत्ति-संबंधी विवाद चल रहा है।
मुख्य आरोप और घटनाक्रम
खान ने अपनी शिकायत में सवाल उठाया कि वारिस पठान को खिलाफत हाउस के गेट पर ताला लगाने का अधिकार किसने दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी सरकारी विभाग अथवा वक्फ बोर्ड की ओर से पठान को ऐसा करने के लिए कथित तौर पर अधिकृत नहीं किया गया था। खान के अनुसार, मौके पर तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई और बड़ा विवाद होते-होते बचा।
खान ने जोर देकर कहा कि यदि दो पक्षों के बीच वक्फ संपत्ति को लेकर विवाद है, तो उसका समाधान पुलिस या न्यायालय के माध्यम से होना चाहिए — किसी व्यक्ति को स्वयं मौके पर जाकर कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है।
पुलिस का आश्वासन
डीसीपी जोन-3 ने खान को आश्वासन दिया कि मामले की जाँच के बाद कानून के तहत आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। खान ने पुलिस से यह भी अनुरोध किया कि विवादित स्थल पर लगाए गए ताले को खुलवाया जाए। इसके अतिरिक्त उन्होंने अतिरिक्त पुलिस आयुक्त डॉ. मनोज शर्मा और अपने वरिष्ठ नेताओं से भी इस विषय पर बातचीत की।
AIMIM नेतृत्व पर राजनीतिक सवाल
खान ने इस घटना को राजनीतिक दृष्टि से भी उठाया। उन्होंने कहा कि AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने वक्फ कानून को लेकर पहले कड़ी आपत्ति जताई थी और बड़े आंदोलन की बात कही थी। यह ऐसे समय में आया है जब वक्फ संशोधन कानून को लेकर देशभर में विभिन्न दलों के बीच तीखी बहस जारी है। खान ने कहा कि जिस वक्फ बोर्ड का AIMIM नेतृत्व विरोध करता रहा है, उसी का सहारा लेकर पठान का कथित तौर पर विवादित स्थल पर पहुँचना 'चिंताजनक और निराशाजनक' है।
कानून-व्यवस्था और सामाजिक शांति पर ज़ोर
खान ने कहा कि महाराष्ट्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखना अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि BJP कार्यकर्ता शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने में विश्वास रखते हैं, लेकिन यदि जनहित में आंदोलन की आवश्यकता पड़ी, तो वे पीछे नहीं हटेंगे — और ऐसा आंदोलन भी शांतिपूर्ण एवं मुद्दा-आधारित होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि किसी समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले नेता से यह अपेक्षा की जाती है कि वह समाज में शांति बनाए रखें। पठान की कथित भाषा और बयानों पर सवाल उठाते हुए खान ने कहा कि ऐसी भाषा 'सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं' है।
आगे क्या होगा
पुलिस की ओर से जाँच का आश्वासन मिलने के बाद मामले में अगले कदम की प्रतीक्षा है। खान ने स्पष्ट किया कि किसी को भी अपनी राजनीतिक या सामाजिक पहचान के आधार पर कानून से ऊपर नहीं समझना चाहिए और कानून तोड़ने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।