15 अगस्त 2026
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वारिस पठान का बयान: 'वंदे मातरम' के लिए किसी को मजबूर नहीं किया जा सकता, संविधान देता है धार्मिक स्वतंत्रता

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वारिस पठान का बयान: 'वंदे मातरम' के लिए किसी को मजबूर नहीं किया जा सकता, संविधान देता है धार्मिक स्वतंत्रता

सारांश

AIMIM नेता वारिस पठान ने स्वतंत्रता दिवस पर मुंबई में स्पष्ट किया — 'वंदे मातरम' का सम्मान है, पर धार्मिक असहजता के चलते किसी को इसे गाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। साथ ही उन्होंने BJP पर बिल्किस बानो मामले को लेकर निशाना साधा और मुस्लिम राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर कांग्रेस व BJP दोनों से सवाल किए।

मुख्य बातें

AIMIM नेता वारिस पठान ने 15 अगस्त 2026 को मुंबई में कहा कि 'वंदे मातरम' का सम्मान करते हैं, लेकिन किसी को इसे गाने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए।
पठान ने कहा कि वे केवल अल्लाह की इबादत करते हैं; भारतीय संविधान हर नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता देता है।
स्वतंत्रता दिवस पर मुंबई में मदरसे के बच्चों सहित सभी ने 'जन गण मन' गाया और तिरंगे को सलामी दी।
पठान ने बिल्किस बानो मामले का हवाला देते हुए BJP पर महिला सम्मान को लेकर सवाल उठाए।
कांग्रेस और BJP दोनों से पूछा — मुस्लिम उम्मीदवारों को कितने चुनावी अवसर दिए गए?
देश की आज़ादी के 80 वर्ष पर युवाओं के लिए शिक्षा, रोज़गार और विकास की माँग दोहराई।

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिममीन (AIMIM) के नेता वारिस पठान ने 15 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मुंबई में स्पष्ट किया कि वे 'वंदे मातरम' का सम्मान करते हैं, किंतु किसी भी नागरिक को इसे गाने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे केवल अल्लाह की इबादत करते हैं और भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म के अनुसार आचरण करने की स्वतंत्रता प्रदान करता है।

स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगे को सलामी

पठान ने बताया कि 15 अगस्त के अवसर पर मुंबई के विभिन्न स्थानों पर तिरंगा फहराया गया, जिसमें मदरसे के विद्यार्थी, पुलिस अधिकारी और आम नागरिक एकसाथ शामिल हुए। उन्होंने कहा कि सभी ने पूरे उत्साह और राष्ट्रीय गर्व के साथ राष्ट्रगान 'जन गण मन' गाया और तिरंगे को सलामी दी।

पठान के अनुसार, तिरंगा देश के सम्मान, गौरव और शान का प्रतीक है और वे सदैव इसका आदर करते रहेंगे। उन्होंने राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

'वंदे मातरम' पर पठान का पक्ष

पठान ने 'वंदे मातरम' के विषय में कहा कि वे इसका सम्मान करते हैं, परंतु गीत की कुछ पंक्तियों के धार्मिक अर्थ के कारण कोई मुस्लिम नागरिक इसे गाने में असहज महसूस कर सकता है। उनके अनुसार, ऐसी स्थिति में किसी को भी इसे गाने के लिए बाध्य करना उचित नहीं है।

उन्होंने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म का पालन करने का मौलिक अधिकार प्राप्त है। यह विवाद नया नहीं है — 'वंदे मातरम' की अनिवार्यता का प्रश्न दशकों से राजनीतिक और सामाजिक बहस का हिस्सा रहा है।

महिला सम्मान और भाजपा पर निशाना

महिलाओं के सम्मान के मुद्दे पर पठान ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने बिल्किस बानो मामले का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि उस मामले में दोषियों के साथ किए गए व्यवहार के बाद महिलाओं के सम्मान की बात कैसे की जा सकती है।

पठान ने कहा कि महिलाओं के सम्मान की बात करने वालों को अपने कार्यों में भी इसका पालन करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि देश की आज़ादी के 80 वर्ष पूरे हो चुके हैं और आज का युवा नफरत की राजनीति नहीं, बल्कि शिक्षा, रोज़गार और विकास चाहता है।

मुस्लिम समुदाय और राजनीतिक प्रतिनिधित्व

पठान ने आरोप लगाया कि देश में मुस्लिम समुदाय को वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया गया, लेकिन उन्हें उनका उचित हक नहीं मिला। उन्होंने कांग्रेस और BJP दोनों से सवाल किया कि उन्होंने कितने मुस्लिम उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने का अवसर दिया।

यह सवाल ऐसे समय में उठाया गया है जब मुस्लिम राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज़ हो रही है। गौरतलब है कि हाल के चुनावों में प्रमुख दलों द्वारा मुस्लिम उम्मीदवारों की संख्या में कमी आलोचकों के निशाने पर रही है।

एकता और सद्भाव की अपील

पठान ने देश में शांति, सद्भाव और भाईचारे की कामना करते हुए सभी नागरिकों से भारत की प्रगति में मिलकर योगदान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि इसी विविधता में एकता से भारत की असली खूबसूरती कायम है। राजनीतिक दलों से उन्होंने नफरत की राजनीति से दूर रहने का आग्रह किया।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि राष्ट्रगान 'जन गण मन' की अनिवार्यता पर कोई विवाद नहीं है। मुस्लिम प्रतिनिधित्व पर उनका सवाल ज़्यादा ठोस है — लेकिन मुख्यधारा की कवरेज 'वंदे मातरम' वाले हिस्से पर अटक जाती है और असल राजनीतिक जवाबदेही का सवाल पीछे छूट जाता है।
RashtraPress
15 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वारिस पठान ने 'वंदे मातरम' पर क्या कहा?
वारिस पठान ने कहा कि वे 'वंदे मातरम' का सम्मान करते हैं, लेकिन गीत की कुछ पंक्तियों के धार्मिक अर्थ के कारण कोई मुस्लिम नागरिक इसे गाने में असहज महसूस कर सकता है और इसलिए किसी को भी इसे गाने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने संविधान में दी गई धार्मिक स्वतंत्रता का हवाला दिया।
AIMIM नेता वारिस पठान कौन हैं?
वारिस पठान ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिममीन (AIMIM) के वरिष्ठ नेता हैं, जो मुंबई से राजनीतिक रूप से सक्रिय हैं। वे मुस्लिम समुदाय के अधिकारों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मुद्दों पर मुखर रहते हैं।
पठान ने BJP पर क्या आरोप लगाए?
पठान ने बिल्किस बानो मामले का उल्लेख करते हुए BJP पर महिला सम्मान के मुद्दे पर दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उस मामले में दोषियों के साथ हुए व्यवहार के बाद महिला सम्मान की बात करना विश्वसनीय नहीं है।
मुस्लिम राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर पठान ने क्या सवाल उठाए?
पठान ने कांग्रेस और BJP दोनों से सवाल किया कि उन्होंने कितने मुस्लिम उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने का अवसर दिया। उनका कहना था कि मुस्लिम समुदाय को वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया गया, लेकिन उन्हें उनका उचित हक नहीं मिला।
स्वतंत्रता दिवस पर पठान ने तिरंगे और राष्ट्रगान के बारे में क्या कहा?
पठान ने बताया कि 15 अगस्त को मुंबई में मदरसे के बच्चों, पुलिस अधिकारियों और आम नागरिकों ने मिलकर तिरंगा फहराया और 'जन गण मन' गाया। उन्होंने कहा कि तिरंगा देश के सम्मान और गौरव का प्रतीक है और वे हमेशा इसका आदर करते रहेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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